यह ख़बर 01 सितंबर, 2014 को प्रकाशित हुई थी

महत्वपूर्ण शिखर वार्ता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टोक्यो पहुंचे

महत्वपूर्ण शिखर वार्ता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टोक्यो पहुंचे

टोक्यो:

आज होने वाली महत्वपूर्ण शिखर वार्ता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टोक्यो पहुंच गए हैं। उनके साथ जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे भी मौजूद हैं। इस शिखर वार्ता में रक्षा और सिविल परमाणु क्षेत्रों समेत कुछ अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है।

जिन समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है। उनमें रेयर अर्थ मैटिरियल्स का संयुक्त उत्पादन भी शामिल है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उम्मीद है कि उनकी यात्रा द्विपक्षीय संबंधों में नया अध्याय लिखेगी।

इसके पहले जापान गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे का दूसरा दिन मंदिर और मिलने मिलाने के नाम रहा। बौद्ध मंदिरों में पूजा के बाद मोदी सैलानियों से भी मिले और इस पूरे वक्त जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे उनके साथ ही रहे। दिनभर दिखी गर्मजोशी का आलम कुछ यूं था जैसा पहले कभी किसी भारतीय नेता के लिए शायद ही दिखा हो।

और ऐसे में टोक्यो पहुंचे पीएम जब आज समझौतों की मेज़ पर बैठेंगे तो उम्मीदें आसमान छू रही होंगीं।

जापान के दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बड़े ही आश्वासन से भरे नज़र आए। ऐतिहासिक बौद्ध मंदिरों तोजी और किंकाऊजी में उन्होंने पूजा−अर्चना की और फिर गर्मजोशी के साथ सैलानियों से भी मिले।

जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे जिन्हें मोदी अपना निजी मित्र मानते हैं लगातार उनके साथ रहे। ऐसा कम ही होता है कि जापानी प्रधानमंत्री किसी विदेशी मेहमान के लिए राजधानी टोक्यो के अलावा किसी दूसरे शहर में भी जाएं।

शनिवार को दोनों नेताओं ने डेढ़ घंटे तक एक भोज में शिरकत की और आज टोक्यो लौटने के बजाय आबे दोनों मंदिरों में भी मोदी के साथ रहे।
 
मोदी जापान से कुछ ख़ास रिश्ता रखना चाहते हैं ये उसकी बानगी है।

जापान दौरे में मोदी का लक्ष्य साफ़ है। कुछ नया सीखना−जानना और भारत में उसपर अमल करना। बौद्ध परंपराओं को कायम रखते हुए क्योटो शहर ने जिस तरह आधुनिकता का दामन थामा है। उससे मोदी ख़ासे प्रभावित हैं।

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इस अनुभव को भारत के प्राचीन शहरों जैसे वाराणसी में भी वह आज़माना चाहते हैं, ताकि स्मार्ट सिटी के अपने सपने को साकार कर सकें।

दो दिन के दौरे के बाद मोदी अब टोक्यो पहुंच चुके हैं जहां अगले तीन दिन जापानी नेताओं के साथ उनकी गंभीर वार्ताएं होनी हैं।
जापान के साथ सैन्य और सामरिक समझ को एक नए स्तर पर पहुंचाने के अलावा भारत परमाणु ऊर्जा के नागरिक इस्तेमाल, बुनियादी ढांचों के विकास जैसे मुद्दों पर भी जापान के अनुभव को साझा करना चाहता है।