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खून खराबे के बाद फिर शांति की ओर लौटे इस्राइल और फलिस्तीन, युद्धविराम समझौता

इस्राइल ने सीमा पर एक सैनिक की मौत के बाद गाजा पट्टी पर कल घातक हमले शुरू कर दिए और इस खून - खराबे के बाद दोनों आज फिर संघर्ष विराम पर सहमत हो गए. 

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खून खराबे के बाद फिर शांति की ओर लौटे इस्राइल और फलिस्तीन, युद्धविराम समझौता

इस्राइल ने सीमा पर एक सैनिक की मौत के बाद गाजा पट्टी पर कल घातक हमले शुरू कर दिए और इस खून - खराबे के बाद दोनों आज फिर संघर्ष विराम पर सहमत हो गए. (फाइल फोटो)

गाजा सिटी: इस्राइल ने सीमा पर एक सैनिक की मौत के बाद गाजा पट्टी पर कल घातक हमले शुरू कर दिए और इस खून - खराबे के बाद दोनों आज फिर संघर्ष विराम पर सहमत हो गए. हमास और इस्राइल के बीच कल गोलेबारी हुई जिसमें हमास के तीन लड़ाकों की मौत हो गई. गाजा के इस्लामिक शासक हमास के प्रवक्ता ने बताया कि इससे पहले मिस्र और संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता के बाद एक युद्धविराम समझौता किया गया था और आज एक बार फिर दोनों संघर्ष विराम पर सहमत हुए. हमास के प्रवक्ता फवजी बरहम ने एक बयान में कहा कि एक सैनिक सहित पांच लोगों की मौत के बाद हमास और इस्राइल आज एक बार फिर संघर्ष विराम को तैयार हो गए. उन्होंने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय और संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों के बाद , हम एक बार फिर इस्राइल के कब्जे वाले क्षेत्र और और फलिस्तीन गुटों के बीच पूर्व में हुए संघर्ष विराम पर सहमत हो पाए हैं’.    

संयुक्त राष्ट्र में 120 देशों ने गाजा हिंसा पर इस्राइल की निंदा की

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आपको बता दें कि पिछले महीने ही संयुक्त राष्ट्र महासभा ने गाजा में फलस्तीनियों की मौत के लिए इस्राइल की निंदा करने वाले अरब समर्थित प्रस्ताव को भारी बहुमत से स्वीकार किया था. इस प्रस्ताव के जरिए हिंसा की जिम्मेदारी हमास पर डालने की अमेरिका की कोशिश भी नाकाम हो गई. मार्च के अंत में गाजा से लगती सरहद के पास शुरू हुए प्रदर्शनों में इस्राइली गोलीबारी में कम से कम 129 फलस्तीनियों की मौत हुई थी, जबकि इसमें किसी इस्राइली की मौत नहीं हुई. प्रस्ताव अल्जीरिया और तुर्की ने अरब तथा मुस्लिम देशों की ओर से रखा था और 193 सदस्यों वाली महासभा में इसे 120 वोट मिले, जबकि आठ सदस्यों ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया. वहीं 45 सदस्यों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. अमेरिका ने गाजा के साथ लगती सीमा पर ‘हिंसा भड़काने’ के लिए हमास की निंदा करने के लिए एक संशोधन प्रस्ताव पेश किया, लेकिन यह दो तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाया जो इसे स्वीकार करने के लिए जरूरी था. (इनपुट-भाषा)

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