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'अग्नि' से डरा चीन? जानें अब अपने 'सदाबहार' दोस्त पाकिस्तान के साथ मिलकर क्या करने जा रहा है...

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'अग्नि' से डरा चीन? जानें अब अपने 'सदाबहार' दोस्त पाकिस्तान के साथ मिलकर क्या करने जा रहा है...

भारत ने दिसंबर, 2016 में अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण किया था.

खास बातें

  1. पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा अपनी पहली चीन यात्रा पर हैं
  2. चीनी विशेषज्ञों के मुताबिक दोनों देश बड़े पैमाने पर रक्षा सहयोग बढ़ाएंगे
  3. भारत की अग्नि-5 मिसाइल की मारक क्षमता के दायरे में पूरा चीन आता है
बीजिंग: चीन अपने 'सदाबहार' दोस्त पाकिस्तान के साथ बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान सहित रक्षा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सहयोग की योजना बना रहा है. ऐसा लगता है कि चीन यह कदम भारत की ओर से अग्नि-5 मिसाइल विकसित करने के जवाब के तौर पर उठाने जा रहा है. अग्नि-5 की मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर है, जिसके दायरे में समूचा चीन आता है.

पाकिस्तान के सेना प्रमुख का पद संभालने के बाद अपनी पहली चीन यात्रा पर बीजिंग आए जनरल कमर जावेद बाजवा ने गुरुवार को केंद्रीय सैन्य आयोग के तहत आने वाले ज्वाइंट स्टाफ डिपार्टमेंट के प्रमुख जनरल फंग फेंघुई से मुलाकात की. बाजवा ने चीन के कार्यकारी उप प्रधानमंत्री झांग गाओली, केंद्रीय सैन्य आयोग के उपाध्यक्ष जनरल फैन चांगलांग और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के कमांडर जनरल ली झाउचेंग से भी मुलाकात कर क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक रक्षा सहयोग और परस्पर हित के दूसरे मुद्दों पर चर्चा की. फंग ने कहा कि 'सदाबहार' सामरिक साझेदारी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में बदलाव किया है.

चीनी सेना में काम कर चुके सैन्य विशेषज्ञ सांग झांगपिंग ने सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ को बताया कि बातचीत से चीन और पाकिस्तान के बीच सैन्य आदान-प्रदान और बढ़ेगा और उनमें गहराई आएगी जबकि इस दौरान सैन्य तकनीक के क्षेत्र में नए सहयोग पर भी चर्चा संभव है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों, विमान रोधी मिसाइलों, जहाज रोधी मिसाइलों और मुख्य युद्धक टैंकों के निर्माण को चीन की मंजूरी भी इसके एजेंडे में है. उन्होंने कहा कि चीन और पाकिस्तान के बीच सैन्य सहयोग को भी और बढ़ाया जाएगा खासकर हथियारों और आतंकवाद विरोधी क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा.

पाकिस्तान के साथ बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और बहुउद्देशीय लड़ाकू विमानों के निर्माण की योजना संबंधी मीडिया की खबरों पर प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि बीजिंग दक्षिण एशिया में 'सामरिक संतुलन' का पैरोकार है.

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा, 'पाकिस्तानी सेना प्रमुख के चीन दौरे को लेकर पाकिस्तानी सेना ने उनके और उनके चीनी समकक्ष के बीच हुई बैठकों के बारे में सूचना जारी की थी.' सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' में पाकिस्तान के साथ अपना रक्षा सहयोग बढ़ाने की चीन की योजना के बारे में छपे समाचारों के बारे में पूछे जाने पर चुनयिंग ने कहा, 'इस समाचार विज्ञप्ति में हमें बैलेस्टिक मिसाइलों से संबंधित समझौते के बारे में कुछ नहीं मिला.'

उन्होंने कहा, 'मैं आपको इतना बता सकती हूं कि चीन और पाकिस्तान सामान्य रक्षा आदान-प्रदान तथा वाजिब सहयोग रखते हैं.' यह पूछे जाने पर कि क्या 1998 के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान के साथ मिसाइलों को लेकर बीजिंग निकटता से काम करने को तैयार है, तो हुआ ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्यों की यह जिम्मेदारी है कि वे संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का अनुपालन करें. साल 1998 के इस प्रस्ताव में भारत और पाकिस्तान से बैलेस्टिक मिसाइलों का परीक्षण रोकने का आह्वान किया गया था.
(इनपुट भाषा से)


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