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आंग सान सू की ने कहा, वह राखिने प्रांत में रोहिंग्या मसले पर अंतरराष्ट्रीय जांच से नहीं डरतीं

म्यांमार के राखिने प्रांत में फैली हिंसा के बाद लाखों रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश पलायन को मजबूर हुए हैं.

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आंग सान सू की ने कहा, वह राखिने प्रांत में रोहिंग्या मसले पर अंतरराष्ट्रीय जांच से नहीं डरतीं

म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. म्यांमार सरकार का मकसद जिम्मेदारी को बांटना या जिम्मेदारी से भागना नहीं.
  2. भारत ने शरणार्थी समस्या के मद्देनजर बांग्लादेश को मानवीय समस्या पहुंचाई.
  3. सू की का यह बयान राखिने प्रांत में फैली हिंसा के बाद पहली बार आया है.
यंगून: म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर हिंसा की बात को लेकर वहां की सरकार में मंत्री आंग सान सू की के ताजा बयान का भारत ने स्वागत किया है. भारत ने म्यांमार के राखिने प्रांत में फैली हिंसा की स्थिति पर म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की के उत्साहजनक और सकारात्मक बयान का मंगलवार को स्वागत किया. म्यांमार के राखिने प्रांत में फैली हिंसा के बाद लाखों रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश पलायन को मजबूर हुए हैं. म्यांमार में भारत के राजदूत विक्रम मिसरी ने सू की के इस मुद्दे पर बयान के बाद पत्रकारों से कहा, 'यह एक उत्साहवर्धक संबोधन था और इसमें काफी सकारात्मकता थी. मेरा मानना है कि हम सभी इस बात से सहमत हैं कि म्यांमार काफी मुश्किल और कठिन समस्या का सामना कर रहा है.'

उन्होंने कहा, 'हाल के दिनों में राखिने प्रांत में उत्पन्न स्थिति न केवल देश के लोगों के लिए, बल्कि पड़ोसी देशों, यहां तक कि हमारे लिए भी चिंता का विषय है.'

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मौजूदा समस्या पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सू की ने मंगलवार को कहा कि वह और उनकी सरकार देश में सभी मानवाधिकार उल्लंघनों और गैरकानूनी हिंसा की निंदा करती है. उन्होंने कहा कि वह राखिने प्रांत में अंतर्राष्ट्रीय जांच से नहीं डरती हैं. सू की का यह बयान राखिने प्रांत में फैली हिंसा के बाद पहली बार आया है. उन्होंने कहा कि इस हिंसा से पीड़ित सभी लोगों के लिए वह बेहद दुखी हैं और म्यांमार इस राज्य के सभी समुदायों के लिए एक स्थायी समाधान के लिए बचनबद्ध है.

बांग्लादेश में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने सोमवार को कहा था कि 25 अगस्त के बाद म्यांमार के राखिने प्रांत में फैली हिंसा के बाद यहां लगभग 415,000 रोहिंग्या मुस्लिम आ चुके हैं. रोहिंग्या को म्यांमार अपना नागरिक नहीं मानता है और बांग्लादेश में इन लोगों में से कुछ को शरणार्थी का दर्जा प्राप्त है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस माह की शुरुआत में म्यांमार दौरे के दौरान राखिने प्रांत में फैली हिंसा के संबंध में स्टेट काउंसलर आंग सान सू की को अपनी चिंताओं से अवगत कराया था. भारत ने शरणार्थी समस्या के मद्देनजर बांग्लादेश को मानवीय समस्या पहुंचाई है.

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सू की ने इस वर्ष न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया. म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की ने मंगलवार को कहा कि उनका देश रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थी संकट को लेकर अंतर्राष्ट्रीय जांच से नहीं डरता है और इस तथ्य से अवगत है कि दुनिया का ध्यान राखिने राज्य के हालात पर केंद्रित है. 

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उन्होंने कहा कि म्यांमार सरकार का मकसद जिम्मेदारी को बांटना या जिम्मेदारी से भागना नहीं है. हम सभी प्रकार के मानवाधिकारों के उल्लंघनों और गैर कानूनी हिंसा की निंदा करते हैं. हम पूरे देश में शांति, स्थिरता और कानून का शासन बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

VIDEO : रोहिंग्याओं पर उठते सवालों पर NDTV की पड़ताल​
राजदूत मिसरी ने सू की के बयान के बाद पत्रकारों से कहा कि भारत ने कई स्तरों पर इस मामले को म्यांमार के समक्ष उठाया है. (इनपुट आईएएनएस से)


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