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...तो ब्रिटेन में ब्रेक्जिट के लिए दोबारा रेफरेंडम होगा

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...तो ब्रिटेन में ब्रेक्जिट के लिए दोबारा रेफरेंडम होगा
नई दिल्ली: यूरोपियन यूनियन से ब्रिटेन के अलग होने के लिए जरूरी कानूनी प्रक्रिया अब निर्णायक दौर में है. लेकिन इसके लिए तैयार यूरोपियन यूनियन (नोटिफिकेशन आफ विथड्राल) बिल पर ब्रिटिश संसद में वोटिंग से पहले ही स्कॉटलैंड की फर्स्ट मिनिस्टर ने रेफरेंडम की बात फिर से उठा दी है.

ब्रेक्जिट को लेकर ब्रिटिश संसद के आखिरी फैसले से पहले स्कॉटलैंड की फर्स्ट मिनिस्टर ने कहा है कि वे स्कॉटलैंड की पार्लियामेंट में दोबारा रेफरेंडम की मांग को लेकर प्रस्ताव लाएंगी और अगर स्कॉटिश संसद ने उसे मंजूरी दे दी तो 2 साल के अंदर दोबारा रेफरेंडम करवाया जाएगा. अगर ऐसा हुआ तो पांच साल के भीतर ये दूसरा रेफरेंडम होगा. स्कॉटिश फ़र्स्ट मिनिस्टर निकोल्स स्टर्जन ने कहा, "जनमत संग्रह से स्काटलैंड के लोगों को ये चुनने का मौका मिलेगा कि वे  यूरोपियन यूनियन के साथ रहना चाहते हैं या नहीं".

दरअसल ब्रेक्जिट पर आखिरी फैसले से पहले ब्रिटिश संसद में हाउस आफ लार्ड्स में जो संशोधन बिल में शामिल किए गए हैं
उस पर लोअर हाउस में ब्रिटिश सांसद चर्चा करेंगे. संसद की मंजूरी के बाद बिल को रानी एलिजाबेथ के पास अंतिम मंज़ूरी के लिए भेजा जाएगा.  रानी एलिज़ाबेथ की मंज़ूरी मिलते ही ये बिल कानून बन जाएगा.

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स्कॉटिश फर्स्ट मिनिस्टर निकोल्स स्टर्जन ने कहा, "हम ये सुनिश्चित करना चाहते हैं कि स्काटलैंड के पास ये अधिकार हो  कि वो ब्रेक्जिट के मुद्दे पर यूके के साथ आगे बढ़ना चाहता है या एक स्वतंत्र देश के रूप में यूके और यूरोप का साथ बराबरी का संबंध रखना चाहता है."  

माना जा रहा है कि सांसद बिल में दो संशोधन करने के लार्ड्स के सुझावों को स्वीकार नहीं करेंगे. इनमें से एक संशोधन ब्रिटेन में ईयू के नागरिकों को अधिकारों की गारंटी देने का प्रस्ताव है. जबकि दूसरे संशोधन में ईयू के साथ किसी भी डील पर संसद की मंज़ूरी अनिवार्य करने का प्रस्ताव है.


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