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पीओके की जमीन पर गलियारा बनाएगा चीन-पाक, भारत के ऐतराज को किया नजरअंदाज

चीन और पाकिस्तान के बीच आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) बनाने पर सहमति बन गई है.

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पीओके की जमीन पर गलियारा बनाएगा चीन-पाक, भारत के ऐतराज को किया नजरअंदाज

अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद भी चीन हर मौकों पर पाकिस्तान के साथ खड़ा दिखता है.

खास बातें

  1. चीन और पाकिस्तान मिलकर बनाएंगे आर्थिक गलियारा
  2. यह गलियारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से गुजरेगा
  3. भारत को है इसपर आपत्ति, फिर भी चीन-पाक ने किया समझौता
बीजिंग: हाल ही में बीजिंग में संपन्न हुए ब्रिक्स सम्मेलन में आतंकवादियों को पनाह देने वाले पाकिस्तान की मदद करने के लिए चीन को पीएम नरेंद्र मोदी सख्त लहजे में संदेश दिया था. अंतरराष्ट्रीय मंच से संदेश मिलने के बाद भी चीन पाकिस्तान की मदद करने से बाज नहीं आ रहा है. चीन और पाकिस्तान के बीच आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) बनाने पर सहमति बन गई है. भारत के लिहाज से ये आर्थिक गलियारा इसलिए चिंताजनक है, क्योंकि यह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से होकर गुजरेगा. चीन और पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बताने की कोशिश की है कि यह आर्थिक गलियारा आतंकवाद को रोकने में भी कारगर होगा. वहीं पिछले रिकॉर्ड पर नजर डालें तो चीन अक्सर पाकिस्तानी आतंकवादियों की पर्दे के पीछे से मदद करता रहा है.

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क्या है ये आर्थिक गलियारा: चीन और पाकिस्तान रेल और सड़क परियोजनाओं के जरिए दोनों देशों के अशांत इलाकों को जोड़ने की तैयारी में हैं. इस प्रोजेक्ट पर 50 अरब डॉलर खर्च होंगे. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) उत्तर पश्चिम चीन में शिनजियांग प्रांत को दक्षिण पश्चिम पाकिस्तान में अरब सागर में ग्वादर बंदरगाह से जोड़ता है. इसे दोनों क्षेत्रों के इस्लामिक आतंकवादियों से खतरा है.

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भारत की यह है आपत्ति: चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की बेल्ट एंड रोड (बीएंडआर) पहल का हिस्सा सीपीईसी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरता है और भारत ने इस परियोजना पर आपत्ति जताई है.

कम्युनिस्ट पार्टी की सेंट्रल कमेटी के राजनीतिक एवं कानूनी मामलों के आयोग के प्रमुख मेंग जियांझू ने यहां की यात्रा पर आए पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नासीर खान जांजुआ से मुलाकात की और इस दौरान सुरक्षा सहयोग समझौता किया गया.

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खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान ने सीपीईसी से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रहे चीनी नागरिकों की रक्षा के लिए 15,000 सैनिकों को तैनात किया है.

कहा जा रहा है कि पिछले साल कम से कम 71,000 चीनी नागरिक पाकिस्तान गए थे.

मेंग ने आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के प्रयासों की तारीफ की और उन्होंने महत्वाकांक्षी आर्थिक गलियारे के निर्माण में आतंकवाद विरोधी और सुरक्षा सहयोग मजबूत करने का आह्वान किया.

मेंग ने कहा, ‘अच्छे दोस्त, मैत्रीपूर्ण पड़ोसी और सदाबहार रणनीतिक सहयोग साझेदार के तौर पर चीन और पाकिस्तान ने एक-दूसरे के अहम हितों का हमेशा मजबूती से समर्थन किया है.’ चीन के स्टेट काउंसलर यांग जिची ने आसिफ से मुलाकात की.

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यांग ने कहा, ‘चीन और पाकिस्तान के बीच सदाबहार रणनीतिक सहयोग साझेदारी को बढ़ावा देने की नीति अपरिवर्तनीय है.’उन्होंने सीपीईसी परियोजना को आगे बढ़ाने और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर बातचीत को मजबूत करने की मांग की.

आसिफ ने कहा कि चीन के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों को बनाए रखना पाकिस्तान की विदेश नीति की आधारशिला है.

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कल आसिफ से मुलाकात के दौरान पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी रिकॉर्ड की प्रशंसा की. उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान, चीन का अच्छा भाई और पक्का दोस्त है. कोई भी चीन को पाकिस्तान से बेहतर नहीं जानता और समझता.’

इनपुट: भाषा


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