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डोकलाम के लिए क्या सचमुच में युद्ध की तैयारी में था चीन?

चीन की सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बयान दिया है कि डोकलाम के मामले को 'सुरक्षित ढंग से सुलझाया गया था.' चीन सेना के इस अधिकारी का नाम लियू फांग है.

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डोकलाम के लिए क्या सचमुच में युद्ध की तैयारी में था चीन?

डोकलाम के मुद्दे पर भारत और चीन की सेनाएं 73 दिनों तक आमने-सामने थीं.

खास बातें

  1. 73 दिनों तक सेनाएं थीं आमने-सामने
  2. चीनी मीडिया दे रही थी धमकी भरे बयान
  3. अब चीनी सेना के अधिकारी ने बताई बड़ी बात
नई दिल्ली:

डोकलाम  के मुद्दे पर भारत और चीन की सेनाएं 73 दिनों तक आमने-सामने थीं. चीन की ओर से भारत को लगातार देख लेने की धमकी भी दी जा रही थी और लेकिन भारतीय सेना के जवानों पर उनकी धमकियों का कोई असर नहीं पड़ा और वहीं भारत सरकार भी इस दौरान सधा रवैया अपना रही थी. चीन की सरकारी नियंत्रण मीडिया भारत को लगातार उकसाने में जुटी हुई थी. एक अखबार ने तो युद्ध का समय तक तय कर डाला था. लेकिन भारत ने अपनी कूटनीति के दम पर चीन पर दबाव बनाना जारी रखा. इस बीच सीमा पर जवानों के बीच बिना हथियार के मारपीट की भी खबरें आती रहीं. आखिरकार युद्ध की धमकी देने वाले चीन की कोई रणनीति काम नहीं आई और उसे डोकलाम से पीछे हटना पड़ा. कई विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की तैयारी और कूटनीति ने उसे पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया. लेकिन अब जो बात निकलकर सामने आ रही है उससे ऐसा लगा रहा है कि चीन भी भले ही ऊपरी तौर पर युद्ध की धमकी दे रहा था लेकिन वह भी नहीं चाहता था कि ऐसे कोई हालात पैदा हो जाएं. 

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चीन की सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बयान दिया है कि डोकलाम के मामले को 'सुरक्षित ढंग से सुलझाया गया था.' चीन सेना के इस अधिकारी का नाम लियू फांग है. वह समझाना चाह रहे थे कि चीन की सेना दूसरे देशों के साथ बातचीत के जरिए किस तरह से मुद्दों को हल करने की कोशिश कर रही है. लियू ने डोकलाम गतिरोध का हवाला देते हुए कहा, 'हमने काफी व्यवहारिक कदम उठाये.' लियू ने कहा, 'निश्चित तौर पर इसे सुरक्षित ढंग से हल कर लिया गया.' उन्होंने कहा, 'सेना में मेरे साथी और दूसरे मंत्रालयों ने बहुत नजदीक से मिलकर काम किया और भारतीय पक्ष के साथ कई बार बातचीत की.' लियू ने कहा, 'इन सबसे चीन-भारत सीमा पार विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने में मदद मिली.'

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गौरतलब है कि डोकलाम गतिरोध 16 जून को उस वक्त आरंभ हुआ था जब चीनी की सेना ने भूटान के दावे वाले क्षेत्र में सड़क बनाने की कोशिश की थी. यह गतिरोध 28 अगस्त को खत्म हुआ था.



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