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छह मुस्लिम देशों के नागरिक तभी अमेरिका आ पाएंगे, जब कोई अमेरिकी नागरिक उनका करीबी रिश्तेदार होगा

सभी अमेरिकी डिप्लोमैटिक पोस्ट को केबल के रूप में वितरित किए गए इन दिशानिर्देशों में करीबी पारिवारिक संबंध की व्याख्या की गई है, जिसमें अभिभावक, जीवनसाथी, संतान, वयस्क पुत्र या पुत्री, दामाद, पुत्रवधू अथवा भाई-बहन, जिनमें सौतेले भाई-बहन शामिल हैं, तथा अन्य सौतेले रिश्तेदार शामिल हैं.

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छह मुस्लिम देशों के नागरिक तभी अमेरिका आ पाएंगे, जब कोई अमेरिकी नागरिक उनका करीबी रिश्तेदार होगा

छह मुस्लिम देशों के नागरिकों को अमेरिका का वीसा तभी मिलेगा, जब उनका किसी अमेरिकी नागरिक से कोई करीबी पारिवारिक संबंध होगा...

खास बातें

  1. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सभी अमेरिकी डिप्लोमैटिक पोस्ट को केबल भेजा है
  2. केबल के मुताबिक, वीसा आवेदक का US संस्था से रिश्ता भी औपचारिक होना चाहिए
  3. कॉन्स्यूलर अधिकारियों को सलाह, SC के आदेशानुसार केबल को परिभाषित करें
वाशिंगटन: छह मुस्लिम-बहुल देशों के नागरिकों का अमेरिका में प्रवेश करना अब पहले से कहीं ज़्यादा मुश्किल हो जाएगा. अमेरिकी विदेश मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी किए गए नए दिशानिर्देशों के तहत अब इन छह देशों के वीसा आवेदकों की अर्ज़ी उसी स्थिति में मंज़ूर की जाएगी, जब उनका किसी अमेरिकी नागरिक से कोई करीबी पारिवारिक संबंध होगा, या किसी अमेरिकी संस्था से औपचारिक रिश्ता होगा.

सभी अमेरिकी डिप्लोमैटिक पोस्ट को केबल (तार) के रूप में वितरित किए गए इन दिशानिर्देशों में करीबी पारिवारिक संबंध की व्याख्या की गई है, जिसमें अभिभावक, जीवनसाथी, संतान, वयस्क पुत्र या पुत्री, दामाद, पुत्रवधू अथवा भाई-बहन, जिनमें सौतेले भाई-बहन शामिल हैं, तथा अन्य सौतेले रिश्तेदार शामिल हैं. इस केबल की प्रति समाचार एजेंसी रॉयटर ने भी देखी है.

समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ने इस केबल की सूचना सबसे पहले दी थी, जिसमें कहा गया है कि करीबी पारिवारिक संबंधों में "दादा-दादी, नाना-नानी, पोता-पोती, नाती-नातिन, चाचा-मामा-मौसा-फूफा, चाची-मामी-मौसी-बुआ, भतीजे-भतीजी, भान्जे-भान्जी, चचेरे-ममेरे-मौसेरे-फुफेरे भाई-बहन, साला-देवर, साली-भाभी, मंगेतर तथा अन्य कोई दूर का रिश्तेदार शामिल नहीं होगा..."

इन दिशानिर्देशों में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी संस्था से कोई भी ताल्लुक "औपचारिक होना चाहिए, कागज़ों पर दर्ज होना चाहिए, तथा सामान्य प्रक्रियाओं के तहत बना होना चाहिए, एक्ज़ीक्यूटिव ऑर्डर से बचने के लिए नहीं..." इसका आशय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस एक्ज़ीक्यूटिव ऑर्डर से है, जो 6 मार्च को जारी किया गया था, और जिसके ज़रिये छह देशों के नागरिकों के लिए अधिकतर अमेरिकी यात्राएं प्रतिबंधित कर दी गई थी.

इस केबल में अमेरिकी कॉन्स्यूलर अधिकारियों को सलाह दी गई है कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी उस आदेश को उसकी मंशा के अनुरूप ही परिभाषित करें, जिसमें सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने तक एक्ज़ीक्यूटिव ऑर्डर के कुछ हिस्सों को मंज़ूरी दे दी गई है. गौरतलब है कि इस एक्ज़ीक्यूटिव ऑर्डर पर निचली अदालतों ने रोक लगा दी थी.

(इनपुट रॉयटर से)


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