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शी चिनफिंग फिर बन सकें राष्ट्रपति, इसलिए यह कदम उठाएगा चीन

सीपीसी की केंद्रीय समिति ने देश के संविधान से इस उपबंध को हटाने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के कार्यकाल दो बार से ज्यादा नहीं होने का प्रावधान है.

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शी चिनफिंग फिर बन सकें राष्ट्रपति, इसलिए यह कदम उठाएगा चीन

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग....(फाइल फोटो)

खास बातें

  1. शी चिनफिंग को मिल सकता है दो से अधिक बार का कार्यकाल
  2. सीपीसी ने राष्ट्रपति शी के दो कार्यकाल की सीमा हटाने का रखा प्रस्ताव
  3. शी चिनफिंग 2013 में पार्टी के प्रमुख और राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे
बीजिंग: चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने संविधान से राष्ट्रपति के दो कार्यकाल की सीमा हटाने का आज प्रस्ताव रखा. इससे संभवत: राष्ट्रपति शी चिनफिंग को दूसरे कार्यकाल के बाद भी सत्ता में बने रहने का रास्ता खुल जाएगा. चिनफिंग का कार्यकाल 2023 तक है.

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सरकारी संवाद समिति 'शिन्हुआ' ने बताया कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति ने देश के संविधान से इस उपबंध को हटाने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के कार्यकाल दो बार से ज्यादा नहीं होने का प्रावधान है. कार्यकाल की सीमा हटाने के प्रस्ताव पर पार्टी के पूर्ण अधिवेशन में मुहर लग सकती है. इससे आधुनिक चीन के सबसे शक्तिशाली शासक समझे जाने वाले 64 वर्षीय शी को असीमित कार्यकाल मिल जाने की संभावना है.

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राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पिछले साल सीपीसी की राष्ट्रीय कांग्रेस के बाद 5 साल के अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत की है. वह सीपीसी और सेना के भी प्रमुख हैं. पिछले साल 7 सदस्यीय जो नेतृत्व सामने आया था, उसमें कोई भी उनका भावी उत्तराधिकारी नहीं है. ऐसे में इस संभावना को बल मिलता है कि शी का अपने दूसरे कार्यकाल के बाद भी शासन करने का इरादा है. तब से पार्टी के सभी अंग ने पिछले तीन दशक से चले आ रहे सामूहिक नेतृत्व के सिद्धांत को दरकिनार कर उन्हें पार्टी का शीर्षतम नेता घोषित कर दिया है.

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शी चिनफिंग 2013 में पार्टी के प्रमुख और राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे. बाद में उन्होंने सेना के प्रमुख की कमान भी संभाली थी. वर्ष 2016 में सीपीसी ने आधिकारिक रुप से उन्हें 'प्रमुख' नेता का खिताब दिया था. 5 साल में एक बार होने वाली सीपीसी की कांग्रेस पिछले साल शी की विचारधारा को संविधान में जगह देने पर राजी हो गई थी. यह सम्मान आधुनिक चीन के संस्थापक माओ त्से तुंग और उनके उत्तराधिकारी देंग शियोपिंग के लिए ही आरक्षित था.

(इनपुट : भाषा)


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