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117 किलोमीटर की रफ्तार से बांग्लादेश पहुंचा चक्रवाती तूफान 'मोरा', मचाई तबाही

बांग्लादेश के मौसम विज्ञान विभाग ने एक विशेष मौसम बुलेटिन में बताया कि चक्रवात कोक्स बाजार और चटगांव के मुख्य बंदरगाह के बीच स्थानीय समयानुसार सुबह छह बजे पहुंचा. उन्होंने बताया कि चक्रवात के उत्तरी दिशा की ओर आगे बढ़ने की संभावना है.

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117 किलोमीटर की रफ्तार से बांग्लादेश पहुंचा चक्रवाती तूफान 'मोरा', मचाई तबाही

बांग्लादेश में चक्रवाती तूफान 'मोरा' पहुंची. तस्वीर: प्रतीकात्मक

खास बातें

  1. बांग्लादेश में पहुंचा चक्रवाती तूफान मोरा
  2. हवा की रफ्तार 89 से बढ़कर 117 किमी प्रति घंटा हुई
  3. तटीय क्षेत्रों से हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
ढाका: चक्रवाती तूफान 'मोरा' के मंगलवार को बांग्लादेश पहुंचने से कई घर क्षतिग्रस्त हो गए. अधिकारियों ने तटीय क्षेत्रों से हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया. तूफान के बांग्लादेशी तट पर दस्तक देने के दौरान 117 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं. बांग्लादेश के मौसम विज्ञान विभाग ने एक विशेष मौसम बुलेटिन में बताया कि चक्रवात कोक्स बाजार और चटगांव के मुख्य बंदरगाह के बीच स्थानीय समयानुसार सुबह छह बजे पहुंचा. उन्होंने बताया कि चक्रवात के उत्तरी दिशा की ओर आगे बढ़ने की संभावना है.

'डेली स्टार' की रिपोर्ट के अनुसार 'मोरा' के कारण बांग्लादेश की उत्तरी खाड़ी, तटीय जिलों और समुद्री बंदरगाहों में बारिश या गरज के साथ छींटे पड़े और जोरदार हवाएं चलीं. उन्होंने बताया कि चक्रवात केंद्र के 64 किमी दायरे में चलने वाली हवा की रफ्तार 89 किमी प्रतिघंटे से बढ़कर 117 किमी प्रति घंटा हो गई.

'बी डी न्यूज' ने आपदा प्रबंधन मंत्रालय के नियंत्रण कक्ष के प्रवक्ता अतिरिक्त सचिव गुलाम मुस्तफा के हवाले से कहा कि अधिक से अधिक 3,00,000 लोगों को उन 10 जिलों से सुरक्षित आश्रयों में पहुंचाया गया, जहां चक्रवात आने का सबसे अधिक खतरा है.

आपदा प्रबंधन मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ''तटीय इलाके के लोगों को कम से कम 400 चक्रवात आश्रय स्थलों या स्कूलों एवं सरकारी कार्यालयों जैसे सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया.'' कोक्स बाजार, चटगांव, नौखली, लक्ष्मीपुर, फेनी, चांदपुर, बारगुना, पतौखाली, भोला, बरिसाल और पीरोजपुर में 'मोरा' का खतरा बना हुआ है.

अगला आदेश जारी होने तक मछली पकड़ने की नौकाओं और जालदार जहाजों को उत्तरी खाड़ी और गहरे समुद्र से दूर रहने को कहा गया है.

बांग्लादेश में अक्सर अप्रैल से दिसंबर माह के बीच भारी तूफान का कहर बरपता है जिससे कई मौत होती हैं और बड़े स्तर पर तबाही फैलती है.

दक्षिणी तट में पिछले साल 'रोनू' चक्रवात से 20 लोगों की मौत हो गई थी और करीब पांच लाख लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा था.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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