NDTV Khabar

रघुराम राजन बोले, नोटबंदी का नहीं हुआ फायदा, सोच-समझ कर नहीं बनाई योजना

नोटबंदी सोच-समझ कर बनाई गई योजना नहीं थी और यह उपयोगी भी साबित नहीं हुई है. भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन ने यह बातें कही और कहा कि विचार-विमर्श के दौरान उन्होंने सरकार को यह चेतावनी दी थी.

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
रघुराम राजन बोले, नोटबंदी का नहीं हुआ फायदा, सोच-समझ कर नहीं बनाई योजना

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन

खास बातें

  1. नोटबंदी की योजना सही तरीके से नहीं बनाई गई थी
  2. जब यह विचार मेरे सामने रखा गया था तो मैंने अपनी यह राय सरकार को दे दी थी
  3. मुझे ऐसा लगता है कि लोग अपना रास्ता ढूंढ ही लेंगे
न्यूर्याक: नोटबंदी सोच-समझ कर बनाई गई योजना नहीं थी और यह उपयोगी भी साबित नहीं हुई है. भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन ने यह बातें कही और कहा कि विचार-विमर्श के दौरान उन्होंने सरकार को यह चेतावनी दी थी. राजन ने कैम्ब्रिज के हावर्ड केनेडी स्कूल में बुधवार को कहा, "मैं समझता हूं कि नोटबंदी की योजना सही तरीके से नहीं बनाई गई थी और ना ही इसका कोई लाभ हुआ है. जब यह विचार मेरे सामने रखा गया था तो मैंने अपनी यह राय सरकार को दे दी थी. मुझे ऐसा लगता है कि लोग अपना रास्ता ढूंढ ही लेंगे."

BJP पर बरसे राहुल गांधी, बोले- नोटबंदी और GST के जरिए लोगों का पैसा छीन रही है भाजपा

भारत सरकार ने 2016 के नवंबर में काले धन पर काबू पाने के लिए 500 और 1000 रुपये की नोटबंदी की थी. राजन ने कहा, "नोटबंदी के समय जो नोट बंद किए गए वो प्रचलन की 87.5 फीसदी मुद्रा थी. कोई भी अर्थशास्‍त्री यह कहेगा कि जब आप 87.5 फीसदी नोट को बंद कर रहे हैं, तो पहले आप सुनिश्चित कर लें कि 87.5 फीसदी या उसके आसपास की संख्या के नए नोट छाप लें, लेकिन भारत में ऐसा किए बिना नोटबंदी कर दी गई."

उन्होंने कहा, "इसका अर्थव्यवस्था पर काफी नकारात्मक असर पड़ा. विचार ये था कि काला धन निकल कर बाहर आएगा, लोग सरकार के पास अपना धन जमा करेंगे और गलती की माफी मांगेगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कोई भी आदमी जिसे भारत के बारे में पता है, वह जानता है कि लोग बहुत जल्द सिस्टम से बचने के तरीके ढूंढ लेते हैं."

विश्वविद्यालयों में किसी को भी ‘राष्ट्र विरोधी’ बताकर चुप नहीं कराया जाए : राजन

टिप्पणियां
पूर्व गर्वनर ने कहा, "हो सकता है कि इसका कोई दीर्घकालिक फायदा हो. लोग ऐसा सोचें की सरकार आगे भी नोट बंद क सकती है, इसलिए कर चोरी ना करें. लेकिन ऐसा हुआ है, इसका कोई मजबूत साक्ष्य सामने नहीं आया है."

उन्होंने कहा, "वहीं, इसका नकारात्मक असर यह हुआ कि लोगों के पास भुगतान के लिए धन नहीं था. आर्थिक गतिविधियां रुक गई, खासतौर से असंगठित क्षेत्र में. कई लोगों की नौकरियां चली गई और उसकी कोई गिनती भी नहीं हो पाई, क्योंकि वे असंगठित क्षेत्र में थे."


Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...

Advertisement