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भारतीय मूल के प्रीत भरारा समेत 46 अटॉर्नियों से डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने मांगा इस्तीफा

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भारतीय मूल के प्रीत भरारा समेत 46 अटॉर्नियों से डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने मांगा इस्तीफा

भारतीय मूल के अमेरिकी अधिवक्ता हैं प्रीत भरारा.

वॉशिंगटन: अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने भारतीय मूल के अमेरिकी अटॉर्नी प्रीत भरारा समेत 46 अटार्नियों से इस्तीफा मांगा है. इन अटार्नियों की नियुक्ति पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने की थी. अमेरिका में कुल 93 अटॉर्नी (अधिवक्ता) हैं जिनमें से ज्यादातर ने अपना पद छोड़ दिया है. हालांकि करीब 46 अधिवक्ता अभी तक अपने पद पर बने हुए हैं. इन अधिवक्ताओं से अमेरिकी अटॉर्नी जनरल जेफ सेशंस ने इस्तीफा देने के लिए कहा है. इस बारे में न्याय मंत्रालय की प्रवक्ता सारा इस्गर फ्लोर्स ने कहा, "एक समान हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिए सेशन्स ने अधविक्ताओं से इस्तीफा देने के लिए कहा है."

फ्लोर्स ने इस कदम का बचाव करते हुए एक बयान में कहा कि जॉर्ज डब्ल्यू बुश और बिल क्लिंटन दोनों ही प्रशासनों ने अपने कार्यकाल की शुरूआत में इसी तरह के आग्रह किए थे. ‘क्रूसेडर’ अभियोजक के रूप में प्रसिद्ध भरारा ने ट्रंप के चुनाव जीतने के बाद नवंबर में उनसे मुलाकात की थी. मुलाकात के बाद मीडिया रिपोर्टों में कहा जा रहा था कि ट्रंप ने भरारा से पद पर बने रहने के लिए कहा था. न्यूयॉर्क के सांसद चार्ल्स सचमेर ने कहा कि वह अमेरिकी अधिवक्ताओं से इस्तीफा देने की मांग के बारे में जान कर परेशान हैं ,खासतौर पर भरारा से इस्तीफे की मांग पर.

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उन्होंने कहा,‘‘ राष्ट्रपति ने मुझे नंवबर में बुलाया था और आश्वासन दिया था कि वह चाहते हैं कि भरारा दक्षिणी जिले से अमेरिकी अटार्नी के पद बने रहें.’’ न्याय विभाग ने कहा,‘‘ जबतक नए अमेरिकी अधिवक्ताओं अटार्नी की पुष्टि नहीं हो जाती ,अमेरिकी अटार्नी कार्यालय के हमारे समर्पित अभियोजक जांच, अभियोग चलाने और सर्वाधिक हिंसक अपराधियों से निपटने का कार्य करते रहेंगे.

सीनेट की न्यायिक समिति की रैंकिंग सदस्य सीनेटर डियाने फीनस्टीन ने कहा कि वह यह जान कर अचंभित हैं कि ट्रंप और सेशन्स ने एकाएक 46 अधिवक्ताओं को पद से हटा दिया है. उन्होंने कहा, ‘‘पिछले प्रशासनों के तहत व्यवस्थापूर्ण तरीके से किए गए सत्तांतरण ने अमेरिकी अधिवक्ताओं को उनका स्थान लेने वाले लोग चुन लिए जाने पर अपने पद धीरे-धीरे छोड़ने का मौका दिया. यह हमारे अभियोजकों की स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए और चल रहे संघीय मामलों में खलल पैदा करने से बचने के लिए किया गया था.’’


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