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भारत ने आतंकवाद की साझा परिभाषा पर सहमत नहीं होने पर UN की आलोचना की

नई दिल्ली ने 1986 में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र संधि (सीसीआईटी) पर एक मसौदा दस्तावेज प्रस्तावित किया था लेकिन सदस्य देशों के बीच आतंकवाद की परिभाषा पर कोई एक राय न होने से इसे लागू नहीं किया गया.

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भारत ने आतंकवाद की साझा परिभाषा पर सहमत नहीं होने पर UN की आलोचना की

भारत ने इससे पहले UN को सुधार की दिशा में कई सुझाव भी दिए थे. (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. भारत ने की UN की आलोचना
  2. आतंकवाद के मुद्दे पर असहमति
  3. भारत ने UN को दिए थे सुझाव
वॉशिंगटन:

भारत (India) ने आतंकवाद (Terrorism) की साझा परिभाषा पर सहमत होने में संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की अक्षमता और इस वैश्विक आफत से निपटने में सामंजस्यपूर्ण तथा अच्छी तरह से समन्वित नीति बनाने में इसकी नाकामी को लेकर विश्व निकाय की आलोचना की है. भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय लंबित सीसीआईटी पर देरी कर खुद नाकाम हुआ है.

नई दिल्ली ने 1986 में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र संधि (सीसीआईटी) पर एक मसौदा दस्तावेज प्रस्तावित किया था लेकिन सदस्य देशों के बीच आतंकवाद की परिभाषा पर कोई एक राय न होने से इसे लागू नहीं किया गया. संयुक्त राष्ट्र में भारत के उप स्थायी प्रतिनिधि के. नागराज नायडू ने बुधवार को यहां संगठन के काम पर महासचिव की रिपोर्ट विषय पर महासभा सत्र में कहा कि आतंकवाद से गंभीरतापूर्वक निपटने में वैश्विक समुदाय की अक्षमता ने इस संगठन की प्रासंगिकता पर शक पैदा किया है.

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उन्होंने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र अभी तक एक साझा परिभाषा पर सहमत नहीं हुआ है, हम सीसीआईटी को लेकर निष्कर्ष पर पहुंचने में देरी कर खुद विफल हुए हैं.' नायडू ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की दिशा में प्रगति न होने को लेकर कहा कि संगठन ने अगर वास्तविक सच्चाइयों का प्रतिनिधित्व करने के लिए खुद को नहीं बदला तो उसे औचित्यपूर्ण होने के संकट का सामना करना पड़ेगा. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने महासभा में दिए भाषण में कहा कि दुनिया मानवीय प्रगति पर चार खतरों का सामना कर रही है.

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उन्होंने जिन चार खतरों का जिक्र किया, वह हैं भू-राजनीतिक तनाव में वृद्धि, जलवायु संकट, वैश्विक अविश्वास और तकनीक के नकारात्मक पहलू. गुतारेस ने कहा, 'ये चार खतरे हमारे साझा भविष्य के हर आयाम को जोखिम में डाल सकते हैं, इसलिए अच्छे भाषणों के साथ 75वीं वर्षगांठ मनाने से कुछ हासिल नहीं होगा. हमें 21वीं सदी की इन चार चुनौतियों से 21वीं सदी के समाधानों से ही निपटना होगा.' भारत ने इससे पहले UN को सुधार की दिशा में कई सुझाव भी दिए थे.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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