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पाक-चीन से पहले विशेष दूत भेजना चाहते थे मालदीव के राष्ट्रपति, मगर भारत ने कहा- अभी नहीं

भारत में मालदीव के राजदूत अहमद मोहम्मद ने कहा कि ‘असल में योजना के मुताबिक विशेष दूत का पहला पड़ाव भारत ही था और मालदीव के राष्ट्रपति ने विशेष दूत को भेजने का प्रस्ताव किया गया था.

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पाक-चीन से पहले विशेष दूत भेजना चाहते थे मालदीव के राष्ट्रपति, मगर भारत ने कहा- अभी नहीं

मालदीव के राष्ट्रपति यामिन (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: मालदीव में जारी राजनीतिक संकट के बीच मालदीव के राष्ट्रपति ने सबसे पहले भारत में विशेष दूत भेजने की योजना बनाई थी, मगर भारत की तरफ से इस यात्रा को यह कह कर रोक दिया गया कि इस वक्त यह संभव नहीं हो पाएगा. भारत में मालदीव के राजदूत अहमद मोहम्मद ने कहा कि ‘असल में योजना के मुताबिक विशेष दूत का पहला पड़ाव भारत ही था और मालदीव के राष्ट्रपति ने विशेष दूत को भेजने का प्रस्ताव किया गया था. मगर मालदीव के राष्ट्रपति द्वारा प्रस्तावित तारीखें भारतीय नेतृत्व को उचित नहीं लगीं.’

मालदीव के राजदूत ने कहा कि उन्होंने अपने विदेश मंत्री से मुलाकात के लिए भारत के विदेश राज्यमंत्री को लेकर भी एंक्वायरी की थी. बता दें कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अभी देश से बाहर सउदी अरब की यात्रा पर हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 फरवरी से संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और फिलिस्तीन की चार दिवसीय यात्रा पर रवाना होने वाले हैं. बता दें कि यामीन पहले ही अपने विशेष दूतों को चीन, पाकिस्तान और सऊदी अरब भेज चुके हैं ताकि उन्हें देश में गहराते राजनीतिक संकट की जानकारी दी जा सके.

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राजदूत अहमद मोहम्मद ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि हमें दुख हुआ... इसलिए हम बाहर का रुख कर रहे हैं. मोहम्मद ने कहा कि, "हम चाहते हैं कि भारत चीन से भी ज्यादा करे ... क्योंकि हम पड़ोसी हैं.  उन्होंने कहा, ‘हम समझते हैं कि विदेश मंत्री देश से बाहर हैं और प्रधानमंत्री इस हफ्ते संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) रवाना होने वाले हैं.’

बहरहाल, सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि भारत ने प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की अनुपलब्धता की वजह से मालदीव के विशेष दूत की यात्रा को स्थगति कर दिया. किसी दूत को भेजने के लिए तय प्रोटोकॉल है और भारत को दूत की यात्रा के उद्देश्य के बारे में नहीं बताया गया. प्रस्तावित यात्रा को भारत की ओर से नकारे जाने के संकेत देते हुए एक सूत्र ने बताया, ‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय और भारत की ओर से जताई गई चिंताओं पर हमने कोई वास्तविक कार्रवाई भी नहीं देखी है. लोकतांत्रिक संस्थाओं और न्यायपालिका को कमजोर करने और चिंताओं की अनदेखी करने का काम जारी नहीं रखा जा सकता. इन मुद्दों को उचित तरीके से सुलझाने की जरूरत है.

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संकट के मद्देनजर राष्ट्रपति यामीन ने आर्थिक विकास मंत्री मोहम्मद सईद को चीन और विदेश मंत्री मोहम्मद असीम को पाकिस्तान भेजा है. मत्स्यपालन एवं कृषि मंत्री मोहम्मद शाइनी सऊदी अरब जा रहे हैं. बाद में मालदीव के दूतावास की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में भी कहा गया, ‘राष्ट्रपति के विशेष दूत का पहला पड़ाव भारत था. राष्ट्रपति के नामित विशेष दूत और मालदीव के विदेश मंत्री मोहम्मद असीम को आठ फरवरी 2018 को भारत की यात्रा पर आना था, लेकिन भारत सरकार के अनुरोध पर यात्रा रद्द कर दी गई.’ 

विज्ञप्ति के मुताबिक, ‘लिहाजा, यह कहना बहुत गुमराह करने वाली बात है कि मालदीव सरकार भारत की अनदेखी कर रही है.’ लोकतांत्रिक तौर पर चुने गए मालदीव के पहले राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को 2012 में अपदस्थ करने के बाद इस देश ने कई राजनीतिक संकट देखे हैं. 

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बीते गुरुवार को मालदीव में उस वक्त बड़ा राजनीतिक संकट पैदा हो गया जब सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद नौ नेताओं को रिहा करने के आदेश दिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उन कैदियों पर चलाया जा रहा मुकदमा ‘राजनीति से प्रेरित और दोषपूर्ण’ है. इन नौ नेताओं में नशीद भी शामिल हैं. मालदीव के हालात पर पैनी नजर रख रहे भारत ने मंगलवार को कहा था कि मालदीव सरकार की ओर से देश में आपातकाल घोषित करने से वह ‘परेशान’ है. भारत ने मालदीव के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और राजनीतिक हस्तियों की गिरफ्तारी को ‘चिंता’ का विषय करार दिया था.  बहरहाल, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने विपक्षी नेताओं की रिहाई के अपने आदेश को वापस ले लिया था. 

VIDEO : क्या भारत-मालदीव के रिश्ते सहज और बेहतर होंगे? (इनपुट भाषा से)


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