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साइबरस्टाकिंग के लिए भारतीय छात्र को स्वदेश भेजा गया

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साइबरस्टाकिंग के लिए भारतीय छात्र को स्वदेश भेजा गया

यूनिवर्सिटी की साइट से ली गई फोटो

ह्यूस्टन: सोशल मीडिया पर विश्वविद्यालय परिसर में गोलीबारी करने की धमकी भरे कमेंट करने के लिए साइबरस्टाकिंग का दोषी पाए गए एक 24 वषीय भारतीय छात्र को अमेरिका से स्वदेश भेजा गया है।

यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन (यूडब्ल्यू) का पूर्व छात्र केशव मुकुंद भिडे दस साल के लिए वापस अमेरिका नहीं जा सकता।

भिडे को यूट्यूब के कमेंट वाले हिस्से में महिलाओं के लिए धमकी भरी बातें लिखने के लिए पिछले साल जून में गिरफ्तार किया गया था।

उसने एलियट रोजर नाम के उस कॉलेज छात्र के कृत्यों का भी बचाव किया था जिसने मई में सांता बारबरा में स्थित यूनिवसिर्टी ऑफ कैलिफोर्निया में छह लोगों की हत्या करने के बाद खुद को गोली मार ली थी।

अपने गूगल यूजरनेम 'फोस डार्क' से कमेंट करते हुए भिडे ने रोजर के कृत्यों का बचाव किया और 9 जून को एक कमेंट में लिखा, 'मैं सिएटल में रहता हूं और यूडब्ल्यू जाता हूं, मैं आपको इतना ही बता सकता हूं। मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि मैं केवल महिलाओं की ही हत्या करूं और वह भी एलियट ने जितनी कीं उससे कहीं ज्यादा।' इस पोस्ट के बाद एफबीआई और यूडब्ल्यू ने जांच शुरू कर दी थी।

उसने अधिकारियों से कहा कि रोजर की तरह उसके भी बहुत कम दोस्त थे और उसे लोगों से मेल जोल बढ़ाने में दिक्कत होती थीं।

भिडे को पिछले महीने के आखिर में निर्वासित किया गया।

आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्र्वतन ने एक बयान में कहा कि उसे किंग काउंटी सुपीरियर कोर्ट में अभ्यारोपित किया गया था जहां उसे साइबरस्टाकिंग का दोषी पाया गया और छह महीने की निलंबित जेल की सजा सुनाई गई।


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