COVID-19 को लेकर दुनिया को 'खुशखबरी' दे सकते हैं भारत और इजराइल

कोविड-19 की रैपिड जांच प्रणाली विकसित करने के लिए भारत के सहयोग को "अद्भुत" बताते हुए इज़रायल ने बुधवार को उम्मीद जताई कि दोनों देशों के संयुक्त प्रयास कुछ महीनों में दुनिया को "खुशखबरी" दे सकते हैं.

COVID-19 को लेकर दुनिया को 'खुशखबरी' दे सकते हैं भारत और इजराइल

इजराइल ने रैपिड जांच प्रणाली विकसित करने के लिए भारत के सहयोग को बताया अद्भुत - प्रतीकात्मक तस्वीर

यरूशलम:

कोविड-19 की रैपिड जांच प्रणाली विकसित करने के लिए भारत के सहयोग को "अद्भुत" बताते हुए इज़रायल ने बुधवार को उम्मीद जताई कि दोनों देशों के संयुक्त प्रयास कुछ महीनों में दुनिया को "खुशखबरी" दे सकते हैं. इज़रायल और भारत के वैज्ञानिक रैपिड कोरोना जांच प्रणाली विकसित करने के लिए एक महत्त्वाकांक्षी परियोजना पर काम कर रहे हैं. इस रैपिड जांच से कुछ सेकेंड में नतीजा मिल जाएगा.

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इज़रायल के रक्षा मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि रक्षा मंत्रालय में रक्षा अनुसंधान विकास निदेशालय (डीडीआर एंड डी) और विदेश मंत्रालय ने जांच करने के लिए नमूने इकट्ठा करने और इज़रायल की चार नैदानिक प्रौद्योगिकियों की पुष्टि के वास्ते अपना मिशन पूरा कर लिया है. बयान में भारत में इज़रायल के दूतावास में रक्षा संबंधित मामलों से जुड़े अधिकारी कर्नल असाफ मलर के हवाले से कहा गया है कि लक्ष्य दुनिया को ऐसी प्रौद्योगिकीय क्षमता देने का है जिसमें रैपिड कोरोना जांच कर कुछ सेकंड के भीतर नतीजा मिल जाए। इससे हवाई अड्डों, दफ्तरों, स्कूलों,रेलवे स्टेशनों आदि को खोला जा सकेगा.

मलर ने जोर देकर कहा, "इस परियोजना के लिए भारत का सहयोग अद्भुत है. प्रधानमंत्री (नरेंद्र) मोदी के वैज्ञानिक सलाहकार समेत सभी अनुसंधान एवं विकास संस्थान पूरी क्षमता के साथ परियोजना में शामिल हुए. हम उम्मीद कर रहे हैं कि कुछ महीनो में हम दुनिया को खुशखबरी दे सकेंगे." यहां सूत्रों ने बताया कि इज़रायल की टीम 26 जुलाई को भारत के लिए रवाना हुई थी और वह कुछ दिनों में वापस आ जाएगी और उसके पास कोविड-19 के मरीजों के 20,000 से ज्यादा नमूने होंगे.

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महामारी का प्रकोप शुरू होने के बाद से ही डीडीआर एंड डी ने दर्जनों नैदानिक प्रौद्योगिकियों का परीक्षण किया है. रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि कुछ प्रौद्योगिकियां इज़रायल में शुरुआती परीक्षण में सफल रही, लेकिन पूर्ण परीक्षण और प्रभावशीलता को साबित करने के लिए उनका परीक्षण बड़े पैमाने पर मरीजों पर करना है.

चार तरह की जांच पर काम हो रहा है. इनमें आवाज़ की जांच, टेरा-हर्ट्ज तरंगों पर आधारित ब्रेथएलीइजर (श्वास से) जांच, इसोथर्मल जांच और पोलयामिन एसिड्स परीक्षण शामिल है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके इज़रायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू महामारी के प्रकोप के बाद से तीन बार फोन पर बातचीत कर चुके हैं. वायरस से निपटने में पारस्परिक सहायता का वादा किया है और दोनों देशों के बीच संयुक्त प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए प्रतिबद्ध जताई है.

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रक्षा मंत्रालय के प्रेस बयान में डीडीआर एंड डी की तरफ से इज़रायली प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख लेफ्टिनेंट कर्नल यनीव मीरमन ने कहा, "हमने जो डेटा इकट्ठा किया है, हम उसका प्रसंस्करण और विश्लेषण कर रहे हैं और हम इजरायल पहुंचने पर यह प्रक्रिया जारी रखेंगे. हमें आशा है कि हम ऐसा तंत्र ला सकेंगे जो कोरोना वायरस का तेजी से पता लगाए."

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संयुक्त टीम में रक्षा मंत्रालय, विदेश तथा स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल हैं. उन्होंने नमूनों के लिए दिल्ली में छह केंद्र तथा प्रौद्योगिकी इस्तेमाल कर डेटा प्रसंस्करण करने के लिए दो प्रयोगशालाएं स्थापित की हैं. भारत सरकार ने भी नमूनो को एकत्रित करने के लिए सैकड़ों स्थानीय पेशेवरों को काम पर लगाया था.



(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)