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ईरान परमाणु वार्ताओं के लिए तैयार : राष्ट्रपति रूहानी

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  1. ईरान ने छह विश्व शक्तियों से संयुक्त राष्ट्र महासभा से अलग मिलने पर सहमति जताई है, ताकि अप्रैल से रुकी हुई परमाणु वार्ताओं को पुन: शुरू करने की कोशिश की जा सके।
संयुक्त राष्ट्र:

ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी ने कहा है कि उनका देश बातचीत के लिए तैयार है और उनके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। दूसरी ओर, विश्व शक्तियां तेहरान की विवादित परमाणु गतिविधियों को लेकर रुकी हुई बातचीत फिर से शुरू करने की तैयारी में हैं।

ईरान ने छह विश्व शक्तियों से संयुक्त राष्ट्र महासभा से अलग मिलने पर सहमति जताई है, ताकि अप्रैल से रुकी हुई परमाणु वार्ताओं को पुन: शुरू करने की कोशिश की जा सके। पश्चिमी देशों को आशंका है कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है, जबकि तेहरान इसका खंडन करता रहा है।

ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से अलग एक बैठक में संवाददाताओं को बताया, अगर दूसरी ओर राजनीतिक इच्छा शक्ति है, तो हम बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, हम मानते हैं कि परमाणु मुद्दा बातचीत से हल हो जाएगा।

बहरहाल, रूहानी ने कहा कि ईरान और अमेरिका के रिश्तों में तीन दशकों से चल रहे विराम को देखते हुए वाशिंगटन के साथ नए संबंधों की शुरुआत करते हुए ईरान को सावधान रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका पहला लक्ष्य अविश्वास को कम करना है। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका और ईरान में विरोधी स्वर हैं, जो नहीं चाहते कि बातचीत हो, लेकिन आधुनिकीकरण के स्वरों को मजबूत करने और उनका साथ देने की जरूरत है।


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शुरू में रूहानी की संवाददाताओं से यह बातचीत ऑफ द रिकॉर्ड थी, लेकिन बाद में संवाददाताओं के अनुरोध पर वह अपनी टिप्पणियों के कुछ अंशों को उद्धृत कराने के लिए सहमत हो गए। मंगलवार को रूहानी ने संयुक्त राष्ट्र में अपना पहला भाषण दिया। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अपने पहले संबोधन में उन्होंने इस्राइल विरोधी तेवर दिखाए और तेहरान में कट्टरपंथी शासन का उदार चेहरा पेश करने की कोशिश की।

वाशिंगटन स्थित 'कारनेजी एन्डाउमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस' में एक ईरानी विशेषज्ञ करीम सदजादपौर ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि रूहानी का मंगलवार को दिया गया भाषण समझौताकारी या सुलह सहमति के संकेत वाला था। बुधवार को रूहानी ने कहा कि उन्हें राष्ट्रपति बराक ओबामा से मिलने में कोई समस्या नहीं है, लेकिन वह सोचते हैं कि दोनों देशों के नेताओं की तीन दशक के बाद होने जा रही पहली मुलाकात का बहुत ही सावधानीपूर्वक प्रबंधन किए जाने की जरूरत है।



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