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...जब पहली दफा सत्ता से बेदखल करके पाकिस्तान से निकाले गए थे नवाज

शरीफ को साल 2000 से 2007 तक निर्वासन झेलना पड़ा था, पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वापसी की इजाजत मिली थी

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...जब पहली दफा सत्ता से बेदखल करके पाकिस्तान से निकाले गए थे नवाज

पूर्व प्रधानमंत्री और पीएमएल-एन के नेता नवाज शरीफ.

खास बातें

  1. सऊदी अरब के दखल के कारण मौत की सजा से बचे थे नवाज
  2. सात साल तक परिवार के साथ सऊदी अरब के जेद्दा में रहे थे
  3. स्टील व्यवसायी शरीफ ने 1976 में शुरू किया था राजनीतिक सफर
नई दिल्ली: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (पीएमएल) के वरिष्ठ नेता नवाज़ शरीफ़ दूसरी बार देश से निर्वासित होने के बाद पाकिस्तान लौट रहे हैं. इससे पहले सन 2000 से 2007 तक उन्हें निर्वासन झेलना पड़ा था. तब उन्हें पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वापसी की इजाजत दी गई थी. उन्हें एक बार तो इस्लामाबाद के एयरपोर्ट से ही वापस जेद्दा भेज दिया गया था.    

नवाज शरीफ को सन 2000 में तत्कालीन सैन्य शासक परवेज मुशर्ऱफ ने देश से निकाल दिया था. इससे पहले पाकिस्तान में तख्तापलट हुआ था और मुशर्ऱफ ने शरीफ की निर्वाचित सरकार को बर्खास्त कर दिया था. इसके बाद पाकिस्तान की आतंक-विरोधी अदालत ने नवाज़ शरीफ़ को भ्रष्टाचार के अपराध में दोषी करार दिया था. मिलिट्री शासन ने नवाज शरीफ पर मुकदमा चलाया था और माना जाता है कि उन्हें मौत की सजा देने की तैयारी कर ली गई थी. शरीफ गंभीर संकट में फंस गए थे और तब सऊदी अरब के किंग फहद और अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने दखल देकर उनको पाकिस्तान की जेल से निकलवाकर सऊदी अरब के जेद्दा शहर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी. शरीफ को दस साल के लिए देश से निर्वासित किया गया लेकिन साल 2007 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उनकी स्वदेश वापसी संभव हो सकी.

23 अगस्त 2007 को सुप्रीम कोर्ट ने नवाज शरीफ़ को पाकिस्तान वापस आने की इजाज़त दे दी. 10 सितम्बर 2007 को नवाज शरीफ सात वर्षों के निर्वासन के बाद काफी उम्मीदों के साथ इस्लामाबाद लौटे लेकिन उन्हें इस्लामाबाद एयरपोर्ट से ही तुरंत जेद्दा वापस भेज दिया गया. पाक में इमरजेंसी लगने के बाद पहली बार 20 नवंबर 2007 को परवेज मुशर्रफ सऊदी अरब गए. मुशर्रफ कोशिश में थे कि जनवरी 2008 में होने वाले आम चुनाव से पहले शरीफ की पाकिस्तान वापसी न हो. लेकिन सऊदी अरब ने तर्क दिया कि पाकिस्तान ने महिला नेता बेनजीर भुट्टो को देश में वापस जाने की इजाजत दी है, तो शरीफ को भी वापस जाने की अनुमति होनी चाहिए. इसके बाद 25 नवंबर 2007 को नवाज शरीफ आखिरकार पाकिस्तान लौट आए.

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नवाज शरीफ तीन बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रह चुके हैं. सबसे पहले एक नवंबर 1990 को पाक के 12 वें प्रधानमंत्री बने थे और इस पद पर 18 जुलाई 1993 तक रहे. इसके बाद 14 वें पीएम के रूप में उनका कार्यकाल 17 फरवरी 1997 से 12 अक्टूबर 1999 तक रहा. शरीफ तीसरी बार 5 जून 2013 को पाक के 27 वें प्रधानमंत्री बने. साल 2016 में पनामा पेपर लीक मामले में शरीफ का नाम आने के बाद 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पीएम के पद के लिए अयोग्य करार दिया और 28 जुलाई 2017 को उन्हें प्रधानमंत्री के पद से हटाना पड़ा. नवाज़ शरीफ को साल 2000 में तख्तापलट के बाद तत्कालीन सैन्य शासक मुशर्रफ़ ने निर्वासित कर दिया था.

नवाज शरीफ का जन्म लाहौर में 25 दिसम्बर 1949 को हुआ था. सन 1947 में उनके पिता मोहम्मद शरीफ अमृतसर से पाकिस्तान चले गए थे. शरीफ की शिक्षा लाहौर के सेंट एंथनी स्कूल और गवर्नमेंट कॉलेज यूनिवर्सिटी लाहौर में हुई. उनके परिवार का स्टील का व्यवसाय था. साल 1976 में स्टील व्यवसाय का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया और इसके बाद शरीफ ने राजनीति की डगर चुन ली.

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सन 1976 में नवाज शरीफ का राजनीतिक सफर शुरू हुआ और वे पाकिस्तान मुस्लिम लीग में शामिल हो गए. वे साल 1980 में पाक के पंजाब प्रांत के वित्त मंत्री बन गए. सन 1981 में उन्हें पंजाब सलाहकार बोर्ड में शामिल हो किया गया. इसके बाद उनकी तत्कालीन सैन्य शासक जनरल जिया-उल-हक से नजदीकियां बढ़ गईं. इसी के नतीजे में उन्हें 1985 में पंजाब का मुख्यमंत्री बना दिया गया.

साल 1988 में जिया उल हक की मौत के बाद राजनीतिक उठापटक शुरू हो गई और पाकिस्तान मुस्लिम लीग का विभाजन दो गुटों फीदा और जुनेजा गुट में हो गया. फीदा गुट का नेतृत्व नवाज शरीफ के हाथ में आ गया. जिया के समर्थकों ने शरीफ के नेतृत्व में विश्वास जताया. नवंबर 1988 में हुए चुनाव में बेनजीर भुट्टो ने जीत हासिल की और नवाज शरीफ विपक्ष के नेता बनाए गए.

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साल 1990 में नवाज शरीफ सत्ता के शिखर पर पहुंच गए और एक नवंबर को प्रधानमंत्री बने. सन 1993 में आम चुनाव में शरीफ को हार का सामना करना पड़ा और उन्होंने पीएम पद से इस्तीफा दे दिया. इस चुनाव में बेनजीर भुट्टो दूसरी बार सत्ता में आईं और नवाज नेता विपक्ष बने. सन 1994-1995 में शरीफ मे तत्कालीन पीएम बेनजीर भुट्टो के खिलाफ प्रदर्शन तेज कर दिए. उन्होंने मुर्तजा भुट्टो के साथ बेनजीर के खिलाफ ट्रेन मार्च निकाला. साल 1997 में हुए आम चुनाव में शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन ने जोरदार जीत हासिल की और नवाज दूसरी बार प्रधानमंत्री बन गए. साल 1998 में नवाज शरीफ की सरकार ने चघाई में परमाणु परीक्षण कराया. इसके अगले साल 1999 में सेना प्रमुख जनरल जहांगीर करमट को बर्खास्त कर दिया गया. उनकी जगह पर जनरल परवेज मुशर्रफ सैन्य प्रमुख बनाए गए. जनरल परवेज मुशर्रफ ही बाद में शरीफ के राजनीतिक प्रतिद्वंदी साबित हुए.

नवाज शरीफ ने 5 जून 2013 को तीसरी बार पीएम का पद संभाला लेकिन 2016 में वक्त ने फिर उनका साथ छोड़ दिया. साल 2016 में पनामा पेपर लीक में नाम आने के बाद 2017 में पाक सुप्रीम कोर्ट ने शरीफ को पीएम के पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया. इसके बाद 28 जुलाई 2017 को उनको पीएम के पद से हटना पड़ा. पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब नवाज शरीफ आजीवन किसी भी सार्वजनिक पद पर आसीन नहीं हो सकेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी शख्स को संविधान की धारा 62 (1)(एफ) के तहत अयोग्य करार दिया गया है तो वह शख्स आजीवन अयोग्य रहेगा.

VIDEO : पाकिस्तान के लिए कुर्बानी

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साल 2013 में बहुमत प्राप्त करने के बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) सत्ता में है. इस पार्टी का पाक के पंजाब प्रांत में भी शासन है. नवाज शरीफ के बाद अब उनके भाई शाहबाज पीएमएल-एन के अध्यक्ष हैं.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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