H-1B वर्क वीज़ा पाने के लिए अब क्या US में ही पढ़ाई करनी हो जाएगी जरूरी?

H-1B वर्क वीज़ा प्रोग्राम में बड़े सुधारों को लेकर अमेरिकी संसद में एक नया बिल पेश किया गया है, जिसमें वहां आकर काम करने वाले विदेशियों के अमेरिका में ही शिक्षा हासिल करने की शर्त है.

H-1B वर्क वीज़ा पाने के लिए अब क्या US में ही पढ़ाई करनी हो जाएगी जरूरी?

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

खास बातें

  • US सीनेट में पेश H-1B वीज़ा पर नया बिल
  • वीज़ा प्रोग्राम में बड़े सुधारों का प्रस्ताव
  • अमेरिका में शिक्षा हासिल करने की रखी गई है शर्त
वाशिंगटन:

H-1B वर्क वीज़ा प्रोग्राम (H-1B Visa Programme) में बड़े सुधारों को लेकर अमेरिकी संसद (US Senate) में एक नया बिल पेश किया गया है, इसमें सबसे बड़ा फोकस वहां आकर काम करने वाले विदेशियों के अमेरिका में ही शिक्षा हासिल करने की शर्त है. अगर इस विधेयक को मंजूरी मिल जाती है तो अमेरिका में नौकरी ढूंढने वाले दूसरे देशों के टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स के लिए मुश्किल हो जाएगी. जो इमिग्रेंट्स यानी प्रवासी अमेरिका में ही शिक्षा हासिल करने के बाद इस वर्क वीज़ा के लिए अप्लाई करेंगे, उन्हें दूसरों पर वरीयता दी जाएगी.

अमेरिकी कांग्रेस के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट में शुक्रवार को H-1B and L-1 Visa Reform Act पेश किया गया है, जिसके तहत US सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज प्राथमिकता के आधार पर H-1B वीज़ा अलॉट करेगी. इस नए सिस्टम के तहत अमेरिका में ही उच्च शिक्षा लेने वाले विदेशी युवकों को वरीयता दी जाएगी, वहीं जिनकी सैलरी ज्यादा है या जिनके पास कोई एडवांस डिग्री या स्किल है, उन्हें भी इसका फायदा मिलेगा.

सीनेट में इसे सांसद चक ग्रासले और डिक डर्बिन, वहीं हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में इसे सांसदों- बिल पासरेल, पॉल गोज़र, रो खन्ना, फ्रैंक पालोन और लांस गुडेन ने पेश किया है.

किन सुधारों का है प्रस्ताव?

सांसदों का कहना है कि इस विधेयक के जरिए H1-B और L-1 वीज़ा प्रोग्राम ज्यादा नियमित करना, सैलरी की शर्तों में सुधार लाने के अलावा अमेरिकी कर्मचारियों और वीज़ा होल्डर्स दोनों के हितों की रक्षा करना है. इसमें H1-B और L-1 वीज़ा होल्डर्स से अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरी बचाने पर जोर है. इसमें साफ किया गया है कि H-1B वर्कर को नौकरी पर रखने के चलते अमेरिकी वर्करों की स्थिति पर कोई फर्क नहीं पड़ने दिया जाएगा.

विधेयक में उन कंपनियों को खासतौर पर निशाने पर लिया गया है, जो बड़े स्तर पर H-1B और L-1 वीज़ाधारकों को अस्थायी ट्रेनिंग के लिए विदेशों से बुलाती यानी वर्कर्स की आउटसोर्सिंग करती हैं, फिर वही लौटकर अपने देशों में वही काम करते हैं. इसके लिए नियम प्रस्तावित है कि 50 से ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनियों मे अगर आधे कर्मचारी H-1B या L-1 वीज़ाहोल्डर हैं, तो कंपनी इससे ज्यादा ऐसे कर्मचारियों को नौकरी पर नहीं रख सकती.

इस बिल में अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट को वीज़ा प्रोग्राम के तहत ऐसी कंपनियों की ऑडिटिंग, जांच और रिव्यू को लेकर और ज्यादा अधिकार दिए जाने का प्रस्ताव है. डिपार्टमेंट के पास कंपनियों को दंडित करने का भी अधिकार होगा.

इसके अलावा L-1 वीज़ा प्रोग्राम के तहत इन वीज़ाहोल्डर वर्कर्स के लिए एक वेतन दर तय किए जाने और डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी को वीज़ा प्रोग्राम के तहत वर्कर्स को नौकरी पर रखी कंपनियों की जांच और एक्शन के लिए अधिकार दिए जाने का प्रस्ताव है, ताकि यह तय किया जा सके कि ऐसी कंपनियों के बीच ट्रांसफर की प्रक्रिया वैध है, ट्रांसफर कंपनी की वैध ब्रांच के बीच हो रहा है, न कि इसमें कोई बाहरी कंपनी शामिल है. 

अमेरिका में शिक्षा लेने की होगी शर्त

विधेयक लाने वाले सांसदों का कहना है कि उनका लक्ष्य स्किल्ड प्रोफेशनल्स की कमी लाना नहीं, बल्कि अमेरिकी स्किल्ड प्रोफशनल्स के लिए जगह बनाना है. उनका आरोप है कि कुछ कंपनियां सस्ते कर्मचारियों के चक्कर में वीज़ा प्रोग्राम के नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं. सांसदों का कहना है कि इस बिल से यह सुनिश्चित होगा कि अमेरिकी कंपनियां उन्हीं प्रवासियों को नौकरी दे रही हैं, जिन्होंने अमेरिकी शिक्षा संस्थानों में ही अच्छी और बेहतर सुविधा हासिल की है. इससे तय होगा कि अमेरिकियों को भी उतने ही मौके मिल रहे हैं, जितने विदेशी वर्करों को.

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