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दलाई लामा के अरुणाचल दौरे पर थम नहीं रहा चीन का गुस्सा, कहा- रिश्तों पर पड़ेगा 'बुरा असर'

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दलाई लामा के अरुणाचल दौरे पर थम नहीं रहा चीन का गुस्सा, कहा- रिश्तों पर पड़ेगा 'बुरा असर'

दलाई लामा के दौरे को लेकर चीन ने बीजिंग में भारतीय राजदूत के समक्ष विरोध दर्ज कराया. (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. नई दिल्ली ने स्पष्ट कर दिया कि यह एक धार्मिक गतिविधि है.
  2. इस दौरे से चीन-भारत संबंधों को गंभीर नुकसान पहुंचा- चीनी प्रवक्‍ता
  3. चीनी प्रवक्ता ने कहा, यह दौरा निश्चित रूप से चीन का असंतोष बढ़ाएगा.
बीजिंग: दलाई लामा के अरुणाचल प्रदेश के दौरे को लेकर भारत और चीन के बीच वाकयुद्ध छिड़ गया है. चीन ने भारत पर इस दौरे की इजाजत देकर द्विपक्षीय रिश्तों को 'गंभीर नुकसान' पहुंचाने का आरोप लगाया है तो नई दिल्ली ने स्पष्ट कर दिया कि यह एक धार्मिक गतिविधि है. दलाई लामा के दौरे को लेकर चीन ने बीजिंग में भारतीय राजदूत विजय गोखले को बुलाकर अपना विरोध दर्ज कराया.

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने पत्रकारों को बताया, 'चीन की चिंताओं की उपेक्षा करते हुए भारत ने दुराग्रहपूर्वक चीन-भारत सीमा के पूर्वी हिस्से के विवादित इलाकों में दलाई लामा का दौरा कराया, जिससे चीन के हितों और चीन-भारत संबंधों को गंभीर नुकसान पहुंचा'. बहरहाल, नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने कहा, 'हमने स्पष्ट कर दिया कि दलाई लामा एक सम्मानित धार्मिक नेता हैं और वह पहले भी कई मौकों पर अरुणाचल का दौरा कर चुके हैं'. उन्होंने कहा, 'हमने यह भी आग्रह किया कि उनकी धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों को कोई राजनीतिक रंग नहीं दिया जाए और उनके मौजूदा दौरे को लेकर कोई बनावटी विवाद नहीं खड़ा किया जाए'

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा, 'सीमा के पूर्वी हिस्से को लेकर चीन का रूख तर्कपूर्ण और स्पष्ट है. भारत 14वें दलाई लामा की भूमिका से अच्छी तरह वाकिफ था'. उन्होंने कहा, 'उन संवेदनशील और विवादास्पद इलाकों में उनके दौरे की व्यवस्था से न सिर्फ तिब्बत के मुद्दे से जुड़ी भारतीय पक्ष की प्रतिबद्धता पर विपरीत असर पड़ेगा बल्कि सीमा क्षेत्र को लेकर विवाद भी बढ़ेगा'. हुआ ने कहा कि यह द्विपक्षीय रिश्तों की गहराई और गति पर विपरीत असर डालेगा और किसी भी तरह से भारत के लिए फायदेमंद नहीं होगा.

चीनी प्रवक्ता ने कहा, यह दौरा निश्चित रूप से चीन का असंतोष बढ़ाएगा. यह भारत के लिए कोई फायदा लेकर नहीं आएगा. हुआ ने इस बात पर जोर दिया कि चीन अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता और वैधानिक अधिकारों तथा हितों की रक्षा के लिये सख्ती के साथ जरूरी कदम उठाएगा. चीन क्या कदम उठाएगा यह पूछे जाने पर हुआ ने और जानकारी नहीं दी.

उन्होंने कहा, 'मेरे पास बताने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है. मैं यह कहना चाहती हूं कि तिब्बत से जुड़ा मुद्दा चीन के मूल हितों से जुड़ा है. चीन की चिंताओं की उपेक्षा करते हुए भारत दूराग्रहपूर्वक उनके दौरे करा रहा है'. प्रवक्ता ने कहा, 'हम भारतीय पक्ष से मांग करते हैं कि वह दलाई लामा का इस्तेमाल करते हुए चीनी हितों को कमतर करने वाले अपने कृत्य को फौरन रोके और दोनों देशों के बीच संवेदनशील मुद्दों को तूल न दे. इसके साथ ही सीमा मुद्दे तथा द्विपक्षीय कानूनों पर दोनों देशों के बीच बातचीत के आधार को कृत्रिम रूप से नुकसान न पहुंचाए और चीन-भारत के रिश्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये ठोस कार्रवाई करे'. (इनपुट एजेंसी से)


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