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क्वेटा हमले के दौरान जान बचाने के लिए खिड़कियों, छतों से कूद-कूदकर भाग रहे थे कैडेट...

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क्वेटा हमले के दौरान जान बचाने के लिए खिड़कियों, छतों से कूद-कूदकर भाग रहे थे कैडेट...
क्वेटा:

पाकिस्तानी शहर क्वेटा में पुलिस अकादमी पर सोमवार को हुए आतंकवादी हमले में बच गए लोगों ने गोलीबारी और विस्फोटों के बीच बीते दहशतभरे लम्हों को याद करते हुए बताया कि आतंकी जिस किसी को देखते थे, गोली मार देते थे, और उनसे बचने के लिए पुलिस कैडेट खिड़कियों और छतों से कूद-कूदकर भाग रहे थे.

बलोचिस्तान की राजधानी क्वेटा से सटे इलाके में बने पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज पर सोमवार देर रात चार घंटे तक जारी रहे हमले की ज़िम्मेदारी दो अलग-अलग गुटों ने ली है, जिनमें से एक तालिबान से अलग हुआ आतंकवादी गुट है, और दूसरा आईएसआईएस से जुड़ा है.

अर्द्धसैनिक बल फ्रंटियर कॉर्प्स के प्रवक्ता वसय खान ने कहा कि मारे गए और 123 घायलों में से ज़्यादातर कैडेट और सैनिक थे. हमला करने आए तीन में से दो आतंकवादियों ने खुद को उड़ा लिया था, जबकि तीसरा सेना की गोलीबारी में ढेर हो गया.

पूरे पाकिस्तान में हमले के बाद दहशत का माहौल है, और लोग रह-रहकर वर्ष 2014 में पेशावर में सेना के स्कूल पर हुए तालिबान आतंकवादियों के हमले को याद कर रहे हैं, जिसमें 150 लोग मारे गए थे, जिनमें ज़्यादातर बच्चे थे.


मंगलवार को टीवी चैनलों पर भी क्वेटा में हुए हमले के बाद अकादमी के फुटेज दिखाई गई, जिसमें जली हुई खिड़कियां, और मारे गए और घायल लोगों के जूतों से अटा पड़ा फर्श दिख रहा था.

प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और सेनाप्रमुख जनरल राहील शरीफ भी तुरंत मौका-ए-वारदात पर पहुंचे थे, और बच गए लोगों से मुलाकात की थी. रात को लगभग 11:30 बजे शुरू हुए इस हमले में बच गए लोगों ने नवाज़ शरीफ और राहील शरीफ को दर्दनाक मंज़र के बारे में विस्तार से बताया.

कैडेट आसिफ हुसैन ने बताया कि जब गोलीबारी शुरू हुई, वह सो रहा था. उसने कहा, "हमने चारपाई के नीचे छिप गए... हमारे दिमाग में यही चल रहा था कि अगर हमने खुद को हॉल में बंद नहीं कर लिया, तो वे हमें मार डालेंगे..."

हुसैन के मुताबिक, हमलावरों ने दरवाज़े को धक्का दिया, लेकिन उसे खोल नहीं पाए. इसके बाद आतंकवादियों ने खिड़की से उन पर गोलियां दागीं, जिससे दो कैडेट ज़ख्मी हो गए.

इसके बाद हॉल में घुसते ही एक हमलावर ने कैडेटों पर गोलियां दागने के बाद अपनी जैकेट में विस्फोट कर लिया. इसी आपाधापी में कैडेट और ट्रेनर जान बचाने के लिए भाग रहे थे, खिड़कियों और छतों से कूद रहे थे.

तभी सेना पहुंच गई, जिससे "हमें भरोसा हो गया कि अब हम बच जाएंगे..."

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एक अन्य सैनिक, जिसका चेहरा खून से भरा था, ने एक टीवी स्टेशन को बताया कि हमलावर जिसक किसी को देखते थे, गोली मार देते थे. उसने कहा, "मैं वहां से भाग निकला, और दुआ कर रहा था कि ऊपरवाला मुझे बचा ले..."

एक अन्य गवाह फैसल खान ने कहा कि जब गोलीबारी शुरू हुई, वह दोस्तों के साथ बातें कर रहा था. फैसल ने कहा, "हमने मुख्य दरवाज़ा बंद कर लिया, और बत्तियां बुझा दीं..."



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