पेरिस जलवायु समझौता पूरे विश्व की साझा विरासत है : फ्रांस में पीएम नरेंद्र मोदी

पीएम मोदी ने कहा, 'पेरिस जलवायु समझौता पृथ्वी और हमारे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के हमारे कर्तव्‍य को बताता है. हमारे लिए यह आस्था का विषय है.'

पेरिस जलवायु समझौता पूरे विश्व की साझा विरासत है : फ्रांस में पीएम नरेंद्र मोदी

फ्रांस के राष्‍ट्रपति मैकरॉन के साथ साझा बयान जारी करते पीएम नरेंद्र मोदी

खास बातें

  • पेरिस जलवायु समझौता भविष्य की पीढ़ियों को भी लाभान्वित करेगा
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ने पेरिस जलवायु समझौते से अलग होने की घोषणा की थी
  • भारत लगातार पेरिस समझौते की अपेक्षाओं से अधिक काम करता रहेगा
पेरिस:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को फ्रांस के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति इमैन्युएल मैकरॉन से मुलाकात की और अतंरराष्ट्रीय तथा परस्पर हितों के मुद्दों पर चर्चा के साथ ही रणनीतिक संबंधों, आतंकवाद की रोकथाम और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर रिश्तों को और आगे बढ़ाने पर जोर दिया. दोनों नेताओं ने पेरिस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एलिसी पैलेस में मुलाकात की. मुलाकात के बाद दोनों देशों ने साझा बयान जारी किया.

पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के अलग होने के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि यह समझौता दुनिया की साझा विरासत है और भारत जलवायु संरक्षण के लिए अपेक्षाओं से भी आगे बढ़कर काम करेगा. फ्रांस के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति इमैन्युएल मैकरॉन के साथ पेरिस के एलिसी पैलेस में व्यापक विचार-विमर्श के बाद मोदी ने कहा कि पेरिस जलवायु करार धरती और हमारे प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के हमारे कर्तव्य को झलकाता है. हमारे लिए यह आस्था का मामला है.

उन्होंने मैकरॉन के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘पेरिस जलवायु समझौता दुनिया की साझा विरासत है. यह भविष्य की पीढ़ियों को भी लाभान्वित करेगा.’’ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कार्बन उत्सर्जन कम करने पर हुए पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते से अलग होने की शुक्रवार को घोषणा की थी. ट्रंप ने कहा कि यह समझौता भारत और चीन जैसे देशों को अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाता है.

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प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत लगातार काम करता रहेगा... पेरिस समझौते की अपेक्षाओं से अधिक करता रहेगा. उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास प्राकृतिक संसाधन हैं क्योंकि हमारी पहले की पीढ़ियों ने इन संसाधनों को संजोया है. हमें भावी पीढ़ियों के लिए ऐसा ही करना होगा.’’

(इनपुट भाषा से...)