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पाकिस्तान : पेशावर स्कूल के नरसंहार का मास्टरमाइंड अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया

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पाकिस्तान : पेशावर स्कूल के नरसंहार का मास्टरमाइंड अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया

पेशावर आर्मी स्कूल में दिसंबर, 2014 में हमला हुआ था (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. पेशावर हमले में 122 स्टूडेंट्स और 22 शिक्षकों की मौत हो गई थी
  2. उमर मंसूर को इस हमले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा था
  3. अमेरिका ने घोषित किया था ग्लोबल टेररिस्ट
इस्लामाबाद:

दिसंबर, 2014 में पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल में हुए नरसंहार के मास्टरमाइंड के मारे जाने की खबर है। एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारी ने दावा किया है कि इस हमले का मास्टरमाइंड अफगानिस्तान में हुए अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया है।

अधिकारियों ने सोमवार को पाकिस्तानी अखबार डॉन को बताया कि पेशावर हमले का मास्टरमाइंड उमर मंसूर और एक अन्य आतंकी लीडर सैफुल्लाह को शनिवार को अफगानिस्तान में नांगराहर प्रांत के बंडार इलाके में अमेरिकी ड्रोन हमले में मार गिराया गया है। एक और अधिकारी ने बताया कि उसके पास मंसूर और सैफुल्ला के मारे जाने की विश्वसनीय रिपोर्ट है, जो सुसाइड हमलावरों का इंचार्ज रहा है।

ग्लोबल टेररिस्ट की सूची में था नाम
अमेरिका ने 25 मई को उमर मंसूर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किया था। इससे वह आंतकियों की हिटलिस्ट में शामिल हो गया था। अमेरिका ने यह घोषणा अफगान तालिबान लीडर अख्तर मंसूर के बलूचिस्तान में हुए ड्रोन हमले में मारे जाने के चार दिन बाद 21 मई को की थी।


मारे गए थे 122 स्टूडेंट
मंसूर ने 16 दिसंबर 2014 को पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल में हुए हमले की पूरी योजना बनाई थी, जिसमें 122 स्टूडेंट्स और 22 शिक्षकों की मौत हो गई थी। यह पाकिस्तान में हुए सबसे बड़े आतंकी हमलों में से एक था। इसके बाद पाकिस्तान की सरकार ने आतंकवादियों के खिलाफ देश में अभियान छेड़ दिया था।

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इन हमलों के लिए भी था जिम्मेदार
मंसूर और सैफुल्ला का संबंध तारीख-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के तारीक गीदार संगठन से था। खैबर जनजातीय क्षेत्र में सैन्य अभियान के बाद मंसूर अफगानिस्तान भाग गया और वह वहीं से सभी गतिविधियों का निरीक्षण करता था। वह पाकिस्तान वायुसेना के सैन्यअड्डे पर सितंबर 2015 में हुए हमले के लिए भी जिम्मेदार है। इस हमले में 29 लोगों की मौत हो गई थी।

बाचा खान यूनिवर्सिटी में जनवरी 2016 में हुए हमले के पीछे भी मंसूर का हाथ था। इस हमले में 18 छात्रों और फैकल्टी सदस्यों की मौत हुई थी।



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