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बॉन में प्रदर्शनकारियों के साथ में देवी काली, भारत को विकसित देशों के खिलाफ मिली जीत

भारत और अन्य विकासशील देशों का दबाव काम आया, विकसित देश बताएंगे कि उन्होंने कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए अब तक क्या किया और आगे उनकी क्या है योजना

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बॉन में प्रदर्शनकारियों के साथ में देवी काली, भारत को विकसित देशों के खिलाफ मिली जीत

बॉन में विकासशील देशों की मांग की समर्थन में हुए प्रदर्शन में देवी काली का प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया गया.

खास बातें

  1. जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के आयोजन स्थल के बाहर प्रदर्शन
  2. एशियाई संगठनों ने हिन्दू देवी काली को प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया
  3. 2012 में हुए दोहा समझौते को अब तक कार्यान्वित नहीं किया गया
बॉन (जर्मनी):

बॉन में चल रहे जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के आयोजन स्थल के बाहर बुधवार को एक दिलचस्प दृश्य देखने को मिला. कोयले का विरोध करने के लिए पर्यावरण से जुड़े कई एशियाई संगठनों ने हिन्दू देवी काली को प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया और नारे लगाए. ठीक इसी वक्त भारत और अन्य विकासशील देशों का दबाव काम आया और विकसित देश आखिरकार उस जिम्मेदारी को मानने के लिए तैयार हुए जिससे वे लगातार बच रहे थे.

 
climate change summit bonn

भारत बॉन में लिखी जा रही संधि में यह लिखवाने में कामयाब हुआ है कि विकसित देश बताएंगे कि उन्होंने कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए अब तक क्या किया और आगे उनकी क्या योजना है.

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वार्ता के पहले दिन से ही विकासशील देशों ने यह दबाव बनना शुरू किया कि विकसित देश बताएं कि 2020 से पहले कार्बन उत्सर्जन को कम करने और विकासशील देशों को पैसा देने का जो वादा उन्होंने किया है उस दिशा में क्या काम किया है लेकिन  इस बात को एजेंडा में शामिल करने की इजाज़त नहीं मिली जिससे भारत और चीन समेत विकासशील देश काफी नाराज हो गए थे. भारत लगातार दबाव बनाता रहा कि विकसित देश बताएं कि धरती को गरम होने से बचाने के लिए उन्होंने अब तक क्या जिम्मेदारी निभाई है. असल में जलवायु वार्ता के नियम कायदों के मुताबिक विकसित देशों को ये बताना है कि उन्होंने अपने देश के भीतर कितना कार्बन उत्सर्जन कम किया है और आगे वे क्या करने वाले हैं.

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भारत और चीन की नाराज़गी यह भी है कि विकसित देशों को बाध्य करने के लिए 2012 में हुए दोहा समझौते को अब तक कार्यान्वित नहीं किया गया है जबकि 2015 में की गई एतिहासिक पेरिस डील एक साल के भीतर ही कार्यान्वित हो गई. अमेरिका के पीछे हटने के बाद जिम्मेदारी यूरोपीय यूनियन पर है. भारत की कोशिशों का नतीजा यह निकला है कि डील में यह लिखा जा रहा है विकसित देश आगे होने वाली सभी वार्ताओं में अपनी अब तक की कोशिशों की जानकारी देंगे और आगे का प्लान भी बताएंगे. विकसित देशों को गरीब और विकासशील देशों को पैसे और टेक्नोलॉजी की मदद भी करनी है. संधि में यह लिखा जाएगा कि विकसित देश बताएं कि वह इस बारे में क्या कर रहे हैं.

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VIDEO : जलवायु परिवर्तन की जंग

इस मुद्दे को भारत की कूटनीतिक जीत के तौर देखा जा रहा है क्योंकि लग रहा था कि विकसित देश इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में डलवा लेंगे.


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