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PM मोदी ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस, कहा- दोस्ती का सफर आगे बढ़ा, दर्जनों कारोबारी समझौते हुए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के साथ बुधवार को साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, ''मुझे यहां आकर अपार खुशी हो रही है. यह संभव हुआ है राष्ट्रपति पुतिन के निमंत्रण से. मैं व्लादिवोस्तोक आने वाला पहला भारतीय प्रधानमंत्री. यह संयोग है कि राष्ट्रपति पुतिन और मेरे बीच भारत और रूस का 20वां वार्षिक समिट हुआ है.''

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रूस:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के साथ बुधवार को साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, ''मुझे यहां आकर अपार खुशी हो रही है. यह संभव हुआ है राष्ट्रपति पुतिन के निमंत्रण से. मैं व्लादिवोस्तोक आने वाला पहला भारतीय प्रधानमंत्री. यह संयोग है कि राष्ट्रपति पुतिन और मेरे बीच भारत और रूस का 20वां वार्षिक समिट हुआ है. 2001 में ऐसा पहला समिट हुआ था. उस समय पुतिन रूस के राष्ट्रपति थे और मैं अटल जी के साथ गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर आया था. इसके बाद हम दोनों की दोस्ती का सफर तेजी से आगे बढ़ा है.''

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पीएम मोदी ने आगे कहा, ''पुतिन और मैं इस रिश्ते को विश्वास के जरिये सहयोग की नई ऊंचाइयों तक ले गए हैं. पहला- हमनें सहयोग को सरकारी दायरे से बाहर लाकर उससे लोगों को जोड़ा है. रक्षा जैसे एरिया में भी रूसी उपकरणों के स्पेयर पार्ट भारत में बनाने का समझौता हुआ है. भारत में रूस के सहयोग से बन रहे हैं न्यूक्लियर प्लांट के बढ़ने को लेकर भागीदारी विकसित हो रही है. दूसरा- हम अपने रिश्ते को राजधानी के बाहर भी ले जा रहे हैं. एक तरफ मैं लंबे अर्से तक गुजरात का मुख्यमंत्री रहा हूं और पुतिन भी रूस के रीजन की क्षमताओं को अच्छे से जानते हैं.पुतिन के निमंत्रण के बाद हमनें तैयारी शुरू कर दी थी. इसके लिए भारत के कॉमर्स मिनिस्टर और कई सीएम यहां आए. और कोयला, डायमंड, टिम्बर और टूरिज्म में अनेक संभावनाएं विकसित हुई है.''


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उन्होंने कहा, ''तीसरा- हमनें रिश्ते को और बेहतर करने के लिए कई बातों पर सहमति जताई है. स्पेस में हमारा सहयोग नई ऊचाइंयो को छू रहा है. भारत के अंतरिक्ष यात्री रूस में ट्रेनिंग करेंगे. दोस्तों हमारे स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में भी नए अध्याय जुड़ रहे हैं. जब भी जरूरत होती है भारत और रूस दुनिया एक दूसरे के लिए काम आते हैं. हम ग्लोबल फोरम में घनिष्ट सहयोग करते हैं. हमनें आज कई ग्लोबल और क्षेत्रीय मुद्दों पर खुलकर बात की. भारत एक ऐसा अफगानिस्तान देखना चाहता है जो स्वतंत्र और शांत हो. हम दोनों देश किसी बाहरी दखल के खिलाफ हैं. हमने भारत के इंडो पेसिफिक के कॉन्सेप्ट पर भी बात की. अगले साल भारत और रूस मिलकर टाइगर कंजर्वेसन पर काम करने के लिए सहमत हुए हैं. मैं ईस्टर्न इकोनॉमिक समिट में भाग लेने के लिए उत्सुक हूं.''



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