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दुनियाभर में 6.56 करोड़ लोग अपना देश छोड़ने को हुए मजबूर: संयुक्त राष्ट्र

ग्रांडी ने विश्व के कई गरीब देशों पर इस विस्थापन के भार के लिए चेतावनी भी दी. विश्व के लगभग 84 प्रतिशत विस्थापित लोग गरीब और मध्यम आय वर्ग वाले देशों में रह रहे हैं.

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दुनियाभर में 6.56 करोड़ लोग अपना देश छोड़ने को हुए मजबूर: संयुक्त राष्ट्र

शरणार्थी दुनियाभर के देशों के लिए लिए समस्या बनती जा रही है. तस्वीर: प्रतीकात्मक

खास बातें

  1. संयुक्त राष्ट्र संघ ने शरणार्थी के विस्थापन की रपट जारी की
  2. 2016 के अंत तक अनुमानित आंकड़ों में 2015 से 300,000 की वृद्धि हुई
  3. 2014-15 में विस्थापितों की संख्या में 50 लाख की वृद्धि हुई थी
संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र संघ की शरणार्थी एजेंसी ने सोमवार को कहा कि दुनिया भर में रिकार्ड 6.56 करोड़ लोग या तो शरणार्थी हैं, या शरण मांग रहे हैं या आंतरिक रूप से विस्थापित हैं. संस्था की वार्षिक रपट के अनुसार, 2016 के अंत तक अनुमानित आंकड़ों में 2015 के आंकड़ों से 300,000 की वृद्धि हुई है. बीबीसी की रपट के अनुसार, यह 2014-15 की तुलना में कम वृद्धि हुई है. क्योंकि 2014-15 में 50 लाख की वृद्धि हुई थी. लेकिन संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त फिलिपो ग्रांडी ने कहा कि अभी तक ये आंकड़े अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति की एक विफलता को दर्शाते हैं. ग्रांडी ने कहा, "ऐसा जान पड़ता है कि विश्व शांति स्थापित करने में असमर्थ है." 

उन्होंने कहा, "इसलिए आप देखेंगे कि पुराने संघर्ष लगातार बने हुए हैं और नए संघर्ष खड़े हो रहे हैं और दोनों मिलकर लोगों को विस्थापित कर रहे हैं. मजबूरी में किया गया विस्थापन युद्ध का एक निशान है, जो कभी खत्म नहीं होगा."

ग्रांडी ने विश्व के कई गरीब देशों पर इस विस्थापन के भार के लिए चेतावनी भी दी. विश्व के लगभग 84 प्रतिशत विस्थापित लोग गरीब और मध्यम आय वर्ग वाले देशों में रह रहे हैं. 

यूएनएचआरसी ने कहा कि उसे उम्मीद है कि सोमवार को जारी किए गए आंकड़े, अमीर देशों को इस मुद्दे पर एक बार फिर से सोचने पर मजबूर करेंगे. केवल ज्यादा शरणार्थियों को अपने देश में शरण देना ही नहीं, बल्कि शांति स्थापना और पुनर्निर्माण में सहयोग करना भी है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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