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रोहिंग्या मुस्लिम ने सुनाई रूह कंपाने वाली दास्तान- बेटी के साथ गैंग रेप होते देखा है

बांग्लादेश में बने रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में गुजर-बसर कर रहे इन लोगों के चेहरे पर खौफ और दर्द साफ देखा जा सकता है.

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रोहिंग्या मुस्लिम ने सुनाई रूह कंपाने वाली दास्तान- बेटी के साथ गैंग रेप होते देखा है

रोहिंग्या मुस्लिमों ने सुनाई आपबीती

खास बातें

  1. बांग्लादेश में बने शिविर में रुके हैं रोहिंग्या
  2. बर्मा में हुए अत्याचार की सुनाई दास्तान
  3. 5 से 10 लाख रोहिंग्या पहुंच चुुके हैं बांग्लादेश
नई दिल्ली: म्यांमार के रखाइन इलाके से भागकर बांग्लादेश पहुंच रहे रोहिंग्या मुसलमानों जो आपबीती बता रहे हैं उसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाती है. उनका कहना है कि म्यांमार की सेना ने उनके साथ अत्याचार की सारी हदें पार कर दी हैं. बांग्लादेश में बने रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में गुजर-बसर कर रहे इन लोगों के चेहरे पर खौफ और दर्द साफ देखा जा सकता है. इन पीड़ितों में मोहम्मद कासिम (40) भी खुद के साथ बीती दास्तान को बताते हुए रो पड़ते हैं. उन्होंने बताया 'मैंने अपनी बेटी के साथ सामूहिक बलात्कार होते हुए देखा है. मैंने उनको रोकने की कोशिश की तो उन लोगों ने उनकी जांघ में गर्म से लाल हो चुकी चाकू भोंक दी. इसके बाद बेटी को भी मार डाला. वह सभी बर्मा की सेना के जवान थे.'

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कासिम ने रुंधे हुए गले से बताया कि उन्हें नहीं पता कि उनके बाकी बच्चे और पत्नी कहां हैं. जब उनसे पूछा गया वहां की जिंदगी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने याद करते हुए बताया कि वहां उनके पास घर और एक कार थी. लेकिन अब कुछ भी नहीं है. हालांकि मोहम्मद कासिम जो बता रहे हैं उसकी कोई पक्के सबूत फिलहाल नही हैं. लेकिन जब उनसे बार-बार उनकी बेटी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने उसके साथ गैंगरेप वाली बात ही दोहराई.  

वीडियो : रोहिंग्याओं की बिगड़ रही हालत
आपको बता दें कि अब तक 5 से 10 लाख रोहिंग्या मुस्लिम बंग्लादेश पहुंच चुके हैं. बीते 25 अगस्त को रोहिंग्या आतंकियों की ओर से किए गए एक हमले के जवाब में म्यांमार ने कार्रवाई शुरू की तो इन मासूमों का सब कुछ उजड़ गया. इन रोहिंग्याओं की हालत देख बांग्लादेश के नागरिकों को उनके साथ 1971 के युद्ध की यादें ताजा हो जाती है. उनका कहना है कि अगर उस समय उनको भारत ने शरण न दी होती तो उनकी भी हालत रोहिंग्या मुस्लिमों जैसी हो जाती. रोहिंग्या मुस्लिमों के शिविर बांग्लादेश के कॉक्स बाजार के पास ही बनाए गए हैं. इसी बाजार में एक दुकानदार हिजबुल आलम ने 1971 में हुई घटना की याद करते हुए कहा कि पूरी दुनिया को इन रोहिंग्या मुस्लिमों की मदद करनी चाहिए. 


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