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थाईलैंड: गुफा में फंसे सभी बच्‍चों को बचाया गया, कोच को भी बाहर निकाला गया

रविवार को 4 बच्चों को निकाला गया था और सोमवार को भी 4 बच्चों को गुफ़ा से बाहर लाया गया. बचाव अभियान मंगलवार की सुबह फिर से शुरू किया गया.

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थाईलैंड: गुफा में फंसे सभी बच्‍चों को बचाया गया, कोच को भी बाहर निकाला गया

गुफा से एक और बच्चे को निकाला गया

नई दिल्ली: थाईलैंड की गुफा में फंसे सभी बच्‍चों और उनके कोच को बचा लिया गया है. तीन दिन तक चले बचाव अभियान के बाद राहतकर्मियों को मंगलवार को सभी को बाहर निकाल लेने में कामयाबी मिल गई. थाइलैंड के उत्तर में चियांग राई इलाके की एक गुफ़ा में 23 जून से बच्चों की एक फुटबॉल टीम फंसी हुई थी. थाई नेवी सील ने इसकी घोषणा की है. इसी के साथ पिछले एक पखवाड़े से अधिक समय से इस घटना में तमाम विपरीत परिस्थितियों के बीच जो बचाव अभियान चल रहा था, वह सफलतापूर्व सम्पन्न हो गया तथा दुनिया भर के लोगों ने राहत की सांस ली. यह बचाव अभियान विश्व भर की सुर्खियों में आ गया था.

सील ने एक फेसबुक पोस्ट में बताया, ‘‘सभी 12 ‘वाइल्ड बोर्स’ और प्रशिक्षक को गुफा से निकाल लिया गया है.’’ इसमें यह भी कहा गया कि सभी सुरक्षित हैं. वाइल्ड बोर्स इन फुटबाल खिलाड़ियों की टीम का नाम है.

थाई सील एवं विदेशी गोताखोरों ने गुफा में शेष बचे चार लड़कों और उनके 25 वर्षीय प्रशिक्षक को मंगलवार अपराह्न में निकाल पाने में सफलता हासिल की. इन लोगों को बेहद खतरनाक रास्ते से निकाला गया जिसमें पानी से भरी संकरी सुरंग शामिल हैं. निकाले गये किशोरों की उम्र 11 से 16 वर्ष के बीच है. ये किशोर फुटबॉल का अभ्यास करने के बाद 23 जून को उत्तरी थाईलैंड के पर्वतीय क्षेत्र में स्थित थाम लुआंग गुफा में चले गये थे. गुफा में अंदर जाने के बाद भारी बारिश होने से बाढ़ का पानी गुफा के भीतर घुस गया और गुफा से निकलने का रास्ता कीचड़ और फिसलन भरा होने के कारण बहुत खतरनाक हो गया.

बचाव दल के प्रमुख नारोंगसाक ओसोतानाकोर्न ने बताया कि एक चिकित्सक तथा तीन थाई नौसेना के गोताखोर भी बाद में गुफा से निकल आये. ये चारों गुफा से सबसे बाद में बाहर आये. इन लोगों ने नौ अंधकारमय दिन गुफा में बिताये. इसके बाद दो ब्रिटिश गोताखोर इन तक पहुंचने में कामयाब हुए। किशोर कमजोर होने के बावजूद काफी उत्साहित नजर आ रहे थे. इन किशोरों में से अधिकतर को तैरना नहीं आता था और किसी के पास गोताखोरी का अनुभव नहीं था. लिहाजा बचावकर्ताओं ने उन्हें मास्क पहनना तथा ऑक्सीजन सिलेंडर की मदद से पानी के भीतर सांस लेने का प्रशिक्षण दिया.

इन लोगों को पानी भरी गुफा में ढूंढ लेने की प्रसन्नता अधिक समय तक नहीं टिक सकी क्योंकि अधिकारियों को इन्हें भीतर से सुरक्षित निकालने की योजना को तैयार करने में बहुत माथा पच्ची करनी पड़ी. इसका कारण था कि उन्हें गुफा के भीतर चार किलोमीटर से अधिक जाना था और कुछ सुरंगें तो बेहद संकरी थीं.

थाई नेवी सील के एक पूर्व गोताखोर की गुफा में आक्सीजन की कमी के चलते शुक्रवार को हुई मौत के कारण बचाव मार्ग के खतरों को लेकर आशंकाएं बहुत बढ़ गयीं थीं. थाईलैंड के प्रधानमंत्री प्रयुत चान ओ चा ने मंगलवार को खुलासा किया कि इन किशोरों को कुछ दवा दी गयी ताकि वे शांत रह सकें. उन्होंने कहा, ‘‘यह मामूली बेहोशी वाली दवा थी ताकि उन्हें उद्विग्नता से बचाया जा सके.’’

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीजा मे पहली ऐसी विश्व नेता हैं जिन्होंने इन किशोरों को बचाने में मिली सफलता पर प्रसन्नता जताई तथा उन गोताखोरों के जज्बे को सलाम किया जिन्होंने अपनी जान को जोखिम में डालकर इन किशोरों को बचाया. मे ने ट्वीट कर कहा, ‘‘थाईलैंड में गुफा में फंसे हुए लोगों का सफलतापूर्वक बचाव किए जाने के कारण प्रसन्न हूं. विश्व देख रहा था तथा इसमें शामिल सभी लोगों को वह सलाम कर रहा है.’’

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर कहा, ‘‘थाईलैंड में खतरनाक गुफा से 12 किशोरों और उनके प्रशिक्षक को सफलतापूर्वक बचाने के लिए अमेरिका की तरफ से थाई नेवी सील और सभी को बधाई.’’

इंग्लैंड के फुटबाल क्लब मैनचेस्टर यूनाटेड ने ‘वाइल्ड बोर्स’ तथा बचाव अभियान में शामिल सभी लोगों को इंग्लैंड आने और क्लब का दौरा करने करने का न्योता दिया. क्लब ने ट्वीट कर कहा, ‘‘कितना खूबसूरत क्षण.. सभी बच गये. महान कार्य.’’

अब जबकि सभी लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, इस विभीषिका से गुजरने वाले लोगों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई जा रही है. विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि दूषित पानी अथवा पक्षियों या चमगादड़ों के मल से संक्रमित होने वाले पानी के कारण फंसे रहे लोगों को खतरनाक संक्रमण हो सकता है.

जानें इस पूरे मामले में कब-कब क्या हुआ...

सोमवार, 9 जुलाई
गुफा में फंसे अन्य लोगों को निकालने के लिए बचाव कार्य काफी तेज कर दिया गया है. हालांकि, अभी तक आगे किसी तरह की सूचना नहीं मिली है. 

रविवार, 8 जुलाई
रविवार को बचाव दल को बड़ी सफलता हाथ लगती है और चार बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाता है. हालांकि, अभी भी आठ बच्चे और उनके एक कोच गुफा में फंसे हुए हैं. 

शनिवार, 7 जुलाई
बचाव अभियान के अध्यक्ष नारोंगसाक ओसोट्टानाकोर्न कहते हैं कि बच्चों की सुरक्षा के लिए अभी तक "उपयुक्त नहीं" है. बचाव मिशन के हेड ने कहा कि गुफा में करीब सौ गोताखोर बच्चों को निकालने के लिए उतरे हुए हैं. वहीं, बच्चों के कोच ने गुफा से एक संदेश भेजकर बच्चों के अभिभावकों से माफी मांगी. 

शुक्रवार, 6 जुलाई
बच्चों तक एयरलाइन स्थापित करने की कोशिश में जुटे एक गोताखोर की मृत्यु चैंबर से लौटने के दौरान मौत हो जाती है. समन कुनान की मौत के बाद गंभीर सवाल उठ खड़े होते हैं कि क्या सच में गुफा से बच्चों को नहीं बचाया जा सकता. 

गुरुवार, 5 जुलाई
बारिश की समस्या को देखते हुए अधिकारियों ने एक और योजना बनाई. पंछियों के घोंसले एकत्रित करने वालों के एक दल पहाड़ के ऊपर से गुफा के अंदर जाने का वैकल्पिक रास्ता तैयार करने की कोशिश करते हैं. 

बुधवार, 4 जुलाई
अधिकारियों ने कहा कि बचावकर्मी बच्चों को तैरना सिखाना शुरू किया और बच्चों को गोताखोरी के मास्क और सांस लेने के उपकरणों का प्रशिक्षण देना प्रारंभ किया. वहीं, पंप से पानी निकालने का काम भी जारी रहा. 

मंगलवार, 3 जुलाई
बच्चों और उनके कोच तक खाद्य पदार्थ, दवाईयां, उच्च कैलोरी वाले जेल्स और पारासिटामोल पहुंचाए गये. 

सोमवार, 2 जुलाई 
कई दिनों के मेहनत के बाद आखिर बचावकर्मियों को सफलता हाथ लगती है. सोमवार को करीब चार सौ मीटर गुफा के भीतर पट्टाया बीच के नजदीक 12 बच्चे और उनके कोच जीवित मिलते हैं. 

रविवार, 01 जुलाई
गुफा के भीतर कुछ दूर जाने के बाद गोताखोरों ने ऑपरेटिंग बेस बनाया. उसके बाद वहां सैकडों एयर टैंक और अन्य चीजें अंदर पहुंचाए गये. 

शनिवार, 30 जून
बारिश रुकने की वजह से गोताखोर गुफा के भीतर जाने में सफल होते हैं, मगर बच्चे जहां मौजूद हैं, वहां से काफी दूर ही रह जाते हैं. 
 
शुक्रवार, 29 जून
थाईलैंड के जुनटा नेता प्रयुत चान-ओ-चा साइट पर जाते हैं. बच्चों के परिजनों का ढांढस बंधाते हैं और उन्हें उम्मीद न हारने को कहते हैं. वे परिजनों के साथ खाना बनाते हैं और मन बहलाने की कोशिश करते हैं.
     
गुरुवार, 28 जून
गुफा के भीतर बाढ़ के पानी के तेज बहाव और बारिश की वजह से बचाव अभियान को रोकना पड़ा. हालांकि, उसके बाद उसी दिन गुफा के भीतर से पानी निकालने के लिए पंप लगाए गये ताकि गुफा के उस जगह तक पहुंचा जा सके, जहां बच्चों के होने की उम्मीद थी. 

बुधवार, 27 जून
यूएस पासिफिक कमांड से अमेरिका के 30 नौसेना कर्मी, पारारेसक्यू और सर्वाइवल स्पेशलिस्ट के साथ और तीन ब्रिटिश विशेषज्ञ गोताखोर भी गुफा में पहुंचे. मगह बाढ़ के तेज बहाव की वजह से उन्हें भी पीछे की ओर हटना पड़ा.

मंगलवार, 26 जून
गोताखोर गुफा के अंदर कई किलोमीटर दूर टी-जंक्शन तक पहुंचते हैं लेकिन बाढ़ की पानी की वजह से वापस आने पर मजबूर हो जाते हैं.

सोमवार , 25 जून
सोमवार को थाई नेवी सील डाइवर्स लड़कों कों ढूंढने के लिए गुफा में प्रवेश करते हैं. वहीं, माता पिता भारी बारिश के बीच पूजा-याचना शूरू कर देते हैं. 

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रविवार, 24 जून
अधिकारियों और पुलिस को कुछ हैंडप्रिंट्स  और पैरों के निशान मिलते हैं, जिसे माना जाता है कि ये लापता बच्चों के हो सकते हैं. बच्चों के रिश्तेदार गुफा के बाहर नजर रखना शुरू कर देते हैं. 

शनिवार, 23 जून
11 से 16 वर्ष की आयु के बच्चे और उनके 25 वर्षीय कोच फुटबॉल अभ्यास के बाद भारी बारिश के दौरान उत्तरी थाईलैंड में थम लुआंग गुफा में प्रवेश करते हैं. यह घटना तब सामने आती है, जब उन बच्चों में से किसी की मां बेटे के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराती हैं. लोकल पुलिस गुफा के नजदीक साइकिल, जूते और फुटबॉल पाते हैं. 
 


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