श्रीलंका में कूड़े के ढेर ने लील ली 24 जिंदगियां, बचाव अभियान में जुटे सैकड़ों सैनिक

श्रीलंका में कूड़े के ढेर ने लील ली 24 जिंदगियां, बचाव अभियान में जुटे सैकड़ों सैनिक

कोलंबो:

श्रीलंका की राजधानी कोलंबो के पास कूड़े के ढेर में आग लगने और फिर इसके मकानों पर गिरने की घटना में चार बच्चों सहित कम से कम 24 व्यक्यिों की मौत हो गई है. बचावकर्मियों ने जीवित बचे लोगों की तलाश का प्रयास रविवार को भी जारी रखा. कोलोन्नावा के मीतोतामुला क्षेत्र में जीवित बचे लोगों की तलाश के लिए कई बड़ी मशीनें लगाई गई हैं. बचाव अभियान में सैकड़ों सैनिक लगाए गए हैं.

'कोलंबो गैजेट' के अनुसार सेना ने कहा कि मौके पर श्रीलंका लाइट इंफैंट्री, कमांडो, गेमुनु वाच और विजयबाहू इंफैंट्री रेजीमेंड के कर्मी लगे हैं. सुरक्षा बल मुख्यालय (पश्चिम) कमांडर मेजर जनरल सुदांत राणासिंघे बचाव अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं. विदेश उप मंत्री हर्ष डि सिल्वा ने कहा कि सेना उन लोगों की तलाश कर रही है, जिनके मलबे में दबे होने की आशंका है. उन्होंने कहा कि सैकड़ों लोगों को अस्थायी स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है और खतरे के मद्देनजर और लोगों को जल्द स्थानांतरित किया जाएगा. स्कूल और अन्य सुविधाओं को भी स्थानांतरित किया जाएगा. डि सिल्वा ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि मौके पर कूड़ा डालने पर रोक लगा दी गई है. उन्होंने कहा कि सरकार ने कचरे से ऊर्जा बनाने के लिए कुछ ही सप्ताह पहले समझौतों पर हस्ताक्षर किया था. पुलिस ने यह पता लगाने के लिए जांच शुरू की है कि शुक्रवार को 91 मीटर ऊंचे कूड़े के ढेर का धराशायी होना स्वाभाविक घटना थी या इसमें किसी की साजिश थी.

पेराडेनिया विश्वविद्यालय की भूवैज्ञानिकों की 10-सदस्यीय एक टीम को मौके पर भेजा गया है. न्यायिक चिकित्सा अधिकारियों के एक समूह के साथ ही खनन और उत्खनन विभाग के अधिकारियों के एक समूह को भी जांच के लिए बुलाया गया है. पुलिस ने बताया कि कोलोन्नावा के मीतोतामुला क्षेत्र में आग और कूड़े के ढेर के धराशायी होने से 100 से अधिक मकान पूरी तरह से नष्ट हो गए. घटना के बाद 600 से अधिक लोग पलायन कर गए. अधिकारियों ने बताया कि घटना में चार बच्चों सहित 24 लोगों की मौत हो गई और 11 अन्य घायल हो गए. अधिकारियों ने बताया कि घटना के बाद से छह व्यक्ति लापता हैं.

श्रीलंकाई राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना के निर्देश पर दुर्घटनास्थल से सटी झुग्गी बस्ती में रहने वाले लोगों को बचाने के लिए सैकड़ों सैन्यकर्मी तैनात किए गए हैं. प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने सरकार की ओर से पीड़ितों से माफी मांगी है. विक्रमसिंघे ने कहा, 'मीतोतामुला स्थित कचरे के ढेर को हटाने की हमारी तमाम योजनाएं थीं, लेकिन हम यह कर पाते, उससे पहले ही हादसा हो गया. हम आपदा के घटित होने से पहले कार्य को अंजाम देने में सरकार की विफलता पर माफी मांगते हैं.' कूड़े के ढेर के पास के निवासी महीनों से इस मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे कि कचरे के ढेर को वहां से हटाया जाए. हालांकि अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने झुग्गीवासियों से वहां से स्थानांतरित कर जाने की पर्याप्त चेतावनी दे दी थी.

डि सिल्वा ने कहा, 'हमने उन्हें स्थानांतरण के लिए मुआवजा भी दे दिया था.' उन्होंने कहा कि मृतकों के अंतिम संस्कार का खर्च सरकार वहन करेगी. जब कचरे के ढेर में आग लगी और यह दर्जनों घरों पर गिरा तब वहां के निवासी पारंपरिक नववर्ष मना रहे थे. पुलिस ने कहा कि कितना नुकसान हुआ है, यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है. गौरतलब है कि श्रीलंकाई संसद को हाल ही में बताया गया था कि कोलोन्नावा में 2.3 करोड़ टन कचरे का विशाल ढेर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है. तकरीबन 800 टन कचरा इसमें रोजाना डाला जा रहा है.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

 
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