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पाकिस्‍तान ने आतंकवाद की रोकथाम के लिए पर्याप्‍त कदम नहीं उठाए : FATF की रिपोर्ट

'एपीजी रिपोर्ट के बाद इस बात की काफी संभावना है कि पेरिस में 13 से 18 अक्टूबर के बीच होने वाली एफएटीएफ की पूर्ण बैठक के दौरान पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में ही बरकरार रखा जाए.' 

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पाकिस्‍तान ने आतंकवाद की रोकथाम के लिए पर्याप्‍त कदम नहीं उठाए : FATF की रिपोर्ट

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने साल 2018 में पाकिस्तान को 'ग्रे लिस्ट' में रखा

खास बातें

  1. FATF के मुताबिक पाकिस्तान 40 में से 36 शर्ते ही पूरी कर रहा
  2. जून 2018 में FATF ने पाक को आतंकी टेरर फंडिंग रोकने की हिदायत दी थी
  3. पाकिस्तान को पहले ही 'ग्रे लिस्ट' में रखा गया है
नई दिल्ली:

एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) के फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने कहा कि पाकिस्तान, यूएन सिक्योरिटी काउंसिल का प्रस्ताव हाफिज सईद, वैश्विक आतंकवादियों और आतंकवादी समूह जैसे कि जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा के खिलाफ लागू करने में विफल रहा. एशिया पैसेफिक ग्रुप (APG) की एक रिपोर्ट के मुताबिक फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने पाकिस्तान को 'ग्रे लिस्ट' में शामिल करते वक्त जो 40 अनुशंसाएं की थी उनमें से उसने सिर्फ एक का पालन किया है और वहां मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग का काफी जोखिम है. 'ग्रे लिस्ट' में पाकिस्तान को बरकरार या बाहर रखने पर फैसले को लेकर होने वाली FATF की महत्वपूर्ण बैठक से दस दिन पहले शनिवार को APG ने 228 पन्नों वाली यह बहुप्रतीक्षित ‘म्यूच्यूअल इवैल्यूएशन रिपोर्ट' जारी की है. पाकिस्तान को पिछले साल जून में ग्रे लिस्ट में रखा गया था और उसे एक एक्शन प्लान दिया गया था जिसे उसे अक्टूबर 2019 तक पूरा करना था. ऐसा नहीं करने पर उसे ईरान और उत्तर कोरिया की तरह ब्लैक लिस्ट में डाले जाने की बात कही गई थी. 

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पाकिस्तान द्वारा APG को इस दिशा में प्रगति दिखाने की अंतिम तारीख अक्टूबर 2018 है और पाकिस्तानी अधिकारियों ने जोर देकर कहा था कि उन्होंने पिछले साल इस दिशा में काफी प्रगति की है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पाकिस्तान के ग्रे लिस्ट में बने रहने की संभावनाएं प्रबल हैं. एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार की खबर में कहा गया है कि रिपोर्ट के मुताबिक, मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग पर लगाम लगाने से संबंधित एफएटीएफ की 40 अनुशंसाओं में से पाकिस्तान ने पूरी तरह से सिर्फ एक का अनुपालन किया है. रिपोर्ट में कहा गया कि नौ पर उसने काफी हद तक काम किया जबकि 26 अनुशंसाओं पर आंशिक रूप से काम हुआ और चार सिफारिशों पर कोई काम नहीं किया गया.

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रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान में धन शोधन और आतंक के वित्तपोषण का काफी जोखिम है और उसे इन जोखिमों को लेकर अपनी समझ में सुधार करना होगा. ये जोखिम देश में संचालित विभिन्न आतंकी संगठनों से भी है. एपीजी रिपोर्ट के मुताबिक, 'एपीजी रिपोर्ट के बाद इस बात की काफी संभावना है कि पेरिस में 13 से 18 अक्टूबर के बीच होने वाली एफएटीएफ की पूर्ण बैठक के दौरान पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में ही बरकरार रखा जाए.' 

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रिपोर्ट के अनुसार, 'इन विरोधी बातों के सामने आने के बाद एपीजी ने पहले ही पाकिस्तान को अपनी 'एक्स्पिडाइट इन्हैंस फॉलो-अप रिपोर्टिंग' लिस्ट में रखने का फैसला किया है.” रिपोर्ट पाकिस्तान के इस आकलन से भी संतुष्ट नहीं है कि वहां धन शोधन और आतंक के वित्तपोषण का 'मध्यम' जोखिम है. 

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