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तुर्की ने शुरू की 2016 में तख्तापलट की साजिश में शामिल 121 संदिग्धों की तलाश

जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है, उनमें गुलेन नेटवर्क के नेता फेतुल्ला गुलेन की भतीजी फतमनूर गुलेन भी है.

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तुर्की ने शुरू की  2016 में तख्तापलट की साजिश में शामिल 121 संदिग्धों की तलाश

फाइल फोटो

नई दिल्ली: तुर्की ने 2016 में तख्तापलट की साजिश में शामिल प्रतिबंधित संगठन से जुड़े 121 संदिग्धों की तलाश शुरू कर दी है. समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के हवाले से बताया कि ये तलाशी अभियान 29 प्रांतों में शुरू की गई और अब तक 33 संदिग्धों को हिरासत में ले लिया गया है.  जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है, उनमें गुलेन नेटवर्क के नेता फेतुल्ला गुलेन की भतीजी फतमनूर गुलेन भी है. इसके साथ ही इस तख्तापलट की कोशिश का कथित मास्टरमाइंड आदिल ओकसूज की रिश्तेदार बिल्किस नूर तेतिक है.  तुर्की ने 2016 के सैन्य तख्तापलट के असफल प्रयास के लिए गुलेन नेटवर्क को जिम्मेदार ठहराया था.  इस दौरान 250 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 2,200 घायल हो गए थे.

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कौन हैं  धर्मगुरु फेतुल्ला गिलेन 
र्की में हुई तख्तापलट की कोशिश के लिए जिम्मेदार ठहराए जा रहे अमेरिका में बसे हुए धर्मगुरु फेतुल्ला गिलेन के अपने खुद के देश तुर्की में काफी बड़ी संख्या में समर्थक हैं. उनके समर्थकों में पुलिस और न्यायपालिका के लोग भी शामिल हैं. बता दें कि बेहद प्रभावशाली मुस्लिम धर्मगुरु अमेरिका के पेनसिल्वानिया में पोकोनो पर्वत इलाके में रह रहे हैं. 75 साल के गिलेन कभी राष्ट्रपति  एर्दोग़ान के करीबी थे लेकिन पिछले कुछ सालों में दोनों के बीच दरार आ गई. एर्दोग़ान को शक्तिशाली 'गिलेनिस्ट मूवमेंट' के तुर्की समाज में मौजूदगी का शक होने लगा था जिसमें मीडिया और पुलिस व जुडिशरी के शामिल होने को लेकर भी उन्हें अंदेशा था.  1999 में गिलेन अमेरिका आ गए। इसके बाद ही उन पर तुर्की में देशद्रोह का मुकदमा चलाया गया। इसके बाद से गिलेन ने सार्वजनिक जीवन से एकदम खुद को अलग कर लिया। वह जनता के बीच बमुश्किल देखे जाते। कोई इंटरव्यू भी नहीं देते.

जब बढ़ गई थी दुश्मनी
साल 2013 के आखिर में इन दोनों शीर्ष स्तंभों के बीच की शत्रुता एकदम मुखर हो गई थी. यह तब हुआ जब न्यायिक अधिकारी जो गिलेन के करीब समझे जाते थे, पर करप्शन के चार्ज लगे। इन आरोपों में गिलेन के बेहद करीबी जिनमें उनके बेटे बिलाल भी शामिल थे, की ओर भी इशारा था.  एर्दोगान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए सैंकड़ों आर्मी अधिकारियों को निकाल दिया. इनमें कई टॉप जनरल भी शामिल थे.  गिलेन आंदोलन 'हिज्मत' (Hizmet) द्वारा चलाए जाने वाले कई स्कूलों को बंद कर दिया गया. कई पुलिस अधिकारियों को भी नौकरियों से निकाल दिया गया. 


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