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छह मुस्लिम बहुल देशों से ब्रिटेन आने वाले सवारी विमानों में लैपटॉप पर लगी रोक

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छह मुस्लिम बहुल देशों से ब्रिटेन आने वाले सवारी विमानों में लैपटॉप पर लगी रोक

विमानों में लैपटॉप पर रोक

ब्रिटेन ने मंगलवार को छह मुस्लिम बहुल देशों से आने वाले सवारी विमानों पर लैपटॉप लाने पर रोक लगा दी. आदेश के मुताबिक - कैबिन बैगेज में लेपटॉप, आईपैड, टैबलेट, डीवीडी प्लेयर और एक तय साइज़ के मोबाइल फोन लाने पर रोक रहेगी. ब्रिटेन की तरफ से जारी यह प्रतिबंध 14 एयरलाइंस पर लागू रहेगा, जो सीधे मुस्लिम बहुल देशों से होकर आती है. इनमें तुर्की, लेबनान, इजिप्ट, जॉर्डन, ट्यूनिशिया और सउदी अरब शामिल हैं. इससे पहले अमेरिका ने मुस्लिम बहुल देशों से आ रही उड़ानों में यात्रियों पर नई पाबंदियों लगाई हैं, जिनमें इजिप्ट, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, तुर्की और यूएई से आर रहे यात्री विमान में लैपटॉप, आईपैड , कैमरा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान ले जाने पर रोक है. ऐसा सुरक्षा सबंधी खतरे के मद्देनज़र किया गया है.

अमेरिकी समाचारपत्र 'वॉशिंगटन पोस्ट' के मुताबिक, हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने इस बारे में कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की है, और टिप्पणी करने से भी इंकार कर दिया है, लेकिन इस प्रतिबंध के बारे में रॉयल जोर्डानियन एयरलाइन्स ने सोमवार को एक ट्वीट के ज़रिये बताया. समाचारपत्र का यह भी दावा है कि दो सूत्रों ने पुष्टि की है कि प्रतिबंध लागू किए जाएंगे. रॉयल जोर्डानियन एयरलाइन्स का ट्वीट अब डिलीट किया जा चुका है, जिसमें कहा गया था कि 21 मार्च से यात्रियों को अपने साथ कुछ पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लेकर यात्रा करने की अनुमति नहीं होगी. ट्वीट में कहा गया था, "कुछ संबंधित अमेरिकी विभागों से मिले निर्देशों के बाद हम अमेरिका आने और वहां से जाने वाले अपने प्रिय यात्रियों को सूचना देना चाहते हैं कि फ्लाइट केबिन में इलेक्ट्रॉनिक तथा इलेक्ट्रिकल उपकरण लेकर आना कड़ाई से प्रतिबंधित है..." ट्वीट के मुताबिक सेलफोन तथा मेडिकल उपकरणों से प्रतिबंध से छूट दी गई है.हालांकि एक अमेरिकी एयरलाइन अधिकारी के मुताबिक अमेरिकी एयरलाइनों को इस प्रतिबंध से परे रखा गया है.

विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने इस संबंध में पूछे गए सभी सवालों को ट्रांसपोर्टेशन सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन (टीएसए) के पास भेज दिया, और फिर टीएसए अधिकारियों ने उन्हें होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (डीएचएस) के पास भेज दिया. होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने एक ईमेल के ज़रिये इन ख़बरों पर कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया

 


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