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पाकिस्तान, लश्कर और जैश-ए- मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों पर लगाम लगाने में नाकाम : अमेरिकी रिपोर्ट

अमेरिका सरकार की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को फंडिंग, रिक्रूटिंग और ट्रेनिंग पर रोक नहीं लगा पाया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन संगठनों से जुड़े समूहों को बीती जुलाई में खुलेआम आम चुनाव लड़ने की भी इजाजत दी गई है.

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पाकिस्तान, लश्कर और जैश-ए- मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों पर लगाम लगाने में नाकाम : अमेरिकी रिपोर्ट

अमेरिकी रिपोर्ट में हाफिज सईद के संगठन के चुनाव लड़ने का भी जिक्र किया गया है

नई दिल्ली:

अमेरिका सरकार की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को फंडिंग, रिक्रूटिंग और ट्रेनिंग पर रोक नहीं लगा पाया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन संगठनों से जुड़े समूहों को बीती जुलाई में खुलेआम आम चुनाव लड़ने की भी इजाजत दी गई है. 'कंट्री रिपोर्ट ऑन टेरोरिज्म 2018' के नाम से प्रकाशित इस दस्तावेज में पाकिस्तान को लेकर जो भी कहा गया है यह उसकी मौजूदा छवि से भी मेल खाता है. इसमें आगे लिखा है कि पाकिस्तान, अफगान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क जैसे आतंकी संगठनों को अपनी जमीन का इस्तेमाल करने पर भी रोक लगा पाने में नाकाम साबित हुआ है. जबकि पाकिस्तान अफगान सरकार और तालिबानियों के बीच राजनीतिक  समन्वय की खुलकर वकालत करता है.  

रिपोर्ट में फाइनेंसियल टास्क फोर्स FATF का भी जिक्र किया गया है जिसने पाकिस्तान से लश्कर जैसे आतंकी संगठनों पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को लागू न करने पर खिंचाई की है.  रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक आतंकी घोषित हो चुके हाफिज सईद ने मिल्ली मुस्लिम लीग की स्थापना की जिसके प्रत्याशियों ने 2018 के चुनाव में लड़ा था. दस्तावेज में साल 2018 में हुए पाकिस्तान पर हुए आतंकी हमलों का जिक्र किया गया है. इन हमलों में तहरीक-ए-तालिबान, जामत-उल-अरहर, ISIS खुरासन और लश्कर-ए-झांगवी अल-आलमी जैसे आतंकी संगठन शामिल हैं. 


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रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पाकिस्तान पर 2018 में कई आतंकी हमले हुए लेकिन वह बीते सालों की तुलना में काफी कम थे. आतंकी संगठनों ने बलूचिस्तान और सिंध प्रोविंस में सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों और डिप्लोमैटिक निशाने बनाए, जो लगातार जारी हैं. इसके साथ ही इन आतंकियों ने साल 2018 में नागरिकों, पत्रकारों, सामुदायिक नेताओ, सुरक्षाबलों और पुलिस और स्कूलों को निशाना बनाया जिसमें कई लोग मारे और घायल हुए. अल्पसंख्यकों को इन आतंकी संगठनों से सबसे ज्यादा खतरा है. 

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मनी लॉन्ड्रिंग पर बने एशिया पैसफिक समूह का पाकिस्तान सदस्य भी है जो कि FATF की तरह काम करता है, इसमें पाकिस्तान ने मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से कार्रवाई करने की बात कही है. जबकि सच्चाई है कि आतंकवाद निरोधी कानून के तहत आतंकी फंडिंग को वह आपराध घोषित करने भी इस पर कार्रवाई नहीं की गई है. 



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