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अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी का बयान, 'कोरोना एयरलाइन उद्योग के लिए 9/11 से भी ज्यादा खतरनाक'

विशेषज्ञों ने चेताया है कि सरकारों ने स्थिति से निपटने के लिए कारगर कदम नहीं उठाए तो मई माह के अंत तक दुनियाभर की ज्‍यादातर एयरलाइंस कंपनियां दिवालिया होने की कगार पर पहुंच सकती हैं.

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी का बयान, 'कोरोना एयरलाइन उद्योग के लिए 9/11 से भी ज्यादा खतरनाक'

कोरोना वायरस से एयरलाइन उद्योग पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा है.

खास बातें

  • अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी ने कोरोना वायरस को लेकर बयान दिया है
  • कोरोना को एयरलाइन उद्योग के लिए 9/11 से भी ज्यादा खतरनाक बताया
  • दुनिया के 100 से ज्यादा देश कोरोना से प्रभावित हैं
वाशिंगटन :

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्टीवन न्यूचन ने दुनिया भर में एयरलाइन उद्योग को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. स्टीवन के मुताबकि कोरोना वायरस महामारी से होने वाला नुकसान एयरलाइन उद्योग के लिए 9/11 हमले से भी ज्यादा नुकसान करने वाला होगा. दुनिया भर के एयरलाइन कंपनियों के मालिकों की सबसे बड़ी यहीं चिंता है कि कोरोना के चलते जहां सारे देश अपने यहां के बॉर्डर को सील कर रहे हैं. साथ ही विदेशों से आवाजाही को ज्यादातर देशों ने रोक दिया है. ऐसे में इस महामारी का एयरलाइन के कारोबार पर दूरगामी असर होगा. मौजूदा स्थिति में एयरलाइन कंपनियों के लिए काम करना बहुत मुश्किल हो रहा है.  

अपने बयान में अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी ने कहा कि एयरलाइन उद्योग के लिए कोरोना एक बहुत बड़ा संकट है जो कि 9/11 के हमले से भी ज्यादा भयावह होने वाला है. यह बयान उन्होंने एक प्रेस वार्ता में दिया जहां अमेरिकी राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों मौजूद थे. बता दें कि कोराना वायरस की महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है. इस वायरस के चलते दुनियाभर की गतिविधियों में ठहराव आ गया है.

व्‍यापार, अर्थव्‍यवस्‍था और पर्यटन व्‍यवसाय इसके कारण बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. कोरोना के खतरे के कारण दुनिया मानो अपने आप में 'सिमट' गई है. ऐहतियात के तौर पर लोग बस, ट्रेन और हवाई यात्रा से भी परहेज कर रहे हैं. कोरोना वायरस के पूरी दुनिया को अपनी जद में लेने के बाद से लोग धड़ाधड़ अपने ट्रेवल प्रोग्राम को कैंसल कर रहे हैं,

इसका असर उड्डयन इंडस्‍ट्री पर भी पड़ा है.एविएशन सेक्‍टर से जुड़े विशेषज्ञों ने चेताया है कि सरकारों ने स्थिति से निपटने के लिए कारगर कदम नहीं उठाए तो मई माह के अंत तक दुनियाभर की ज्‍यादातर एयरलाइंस कंपनियां दिवालिया होने की कगार पर पहुंच सकती हैं.

(एजेंसियों से इनपुट के साथ) 

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