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जाको राखे साइयां मार सके न कोय : भूस्खलन के बाद 13 घंटे से मिट्टी के नीचे दबी महिला को निकाला गया

आपको बता दें कि यहां हो रही मूसलाधार बारिश ने राजधानी और नजदीकी वेस्ट जावा में तबाही फैला दी है, कई लोग अब भी लापता हैं. टीवी की खबरों में कहा गया है कि जर्काता के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के निकट रातभर बचाव अभियान चलाया गया.

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जाको राखे साइयां मार सके न कोय : भूस्खलन के बाद 13 घंटे से मिट्टी के नीचे दबी महिला को निकाला गया

फाइल फोटो

नई दिल्ली: एक कहावत है कि जाको राखो साइंया... मार सके नो कोय...इंडोनेशिया  में ये बात चरितार्थ हो गई. दरअसल यहां पर भूस्खलन की वजह से कई गांव तबाह हो गए हैं, लेकिन बचाव दल ने भूस्खलन में 13 घंटे से दबी कार में से एक महिला को जीवित निकल लिया है. आपको बता दें कि यहां हो रही मूसलाधार बारिश ने राजधानी और नजदीकी वेस्ट जावा में तबाही फैला दी है, कई लोग अब भी लापता हैं. टीवी की खबरों में कहा गया है कि जर्काता के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के निकट रातभर बचाव अभियान चलाया गया. बचावकर्मियों ने आज सुबह लगभग सात बजे कार में फंसी महिला को बाहर निकाला. वहीं पश्चिमी जावा के पुंकाक में भूस्खलन के कारण कई गांव तहस नहस हो गए हैं. वहां से कल एक व्यक्ति का शव मिला. जबकि आठ अन्य लोगों की तलाश अभी जारी है. 

भूस्खलन से मरने वालों की संख्या बढ़कर 11 हुई

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इंडोनेशिया में बीते साल नवंबर में भी मुख्य द्वीप जावा में भीषण बाढ़ और भूस्खलन में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई थी.  पूर्वी जावा प्रांत के पकीटन में भूस्खलन में नौ लोगों की मौत हो गई थी. जबकि इसी इलाके में भारी बारिश से आई बाढ़ में दो लोगों की मौत हो गई.

वीडियो : शिमला में पिछले साल हुआ था भूस्खलन

गौरतलब है कि भारत में भी खासकर उत्तराखंड में हर साल बारिश के मौसम में भूस्खलन की खबरें आती हैं. कई बार इन घटनाओं में जानमाल का भी नुकसान होता है. संसद की एक समिति ने कहा है कि उत्तराखंड में टिहरी परियोजना द्वारा क्षेत्र में पौधारोपण कार्य नहीं करने के कारण भूस्खलन के रूप में बड़ा पर्यावरणीय खतरा उत्पन्न हो गया है और ऐसे में वृक्षारोपण दीर्घकालीन समाधान साबित हो सकते हैं. लोकसभा में पेश गृह मंत्रालय से संबंधित आपदा प्रबंधन पर याचिका समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तराखंड में 1400 मेगावाट का विद्युत उत्पादन कर रही टिहरी परियोजना ने क्षेत्र में पौधारोपण कार्य पर ध्यान नहीं दिया है जिससे पर्यावरण को खतरा उत्पन्न हुआ है.
 


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