वुहान लैब का दावा- यहां से नहीं निकला है Covid-19 का वायरस, फैलाया जा रहा झूठ

वुहान के वाइरोलॉजी इंस्टीट्यूट की ओर से सफाई दी गई है कि यह वायरस लैब में था ही नहीं. उन्होंने वहां मौजूद चमगादड़ों के कोरोनावायरस की जांच की है और कोई भी कोविड-19 के जीनोम से मेल नहीं खाता है.

वुहान लैब का दावा- यहां से नहीं निकला है Covid-19 का वायरस, फैलाया जा रहा झूठ

वुहान के इस लैब पर आरोप हैं कि यह वायरस यहीं से किसी तरह लीक हुआ है.

बीजिंग:

नॉवेल कोरोनावायरस (novel-coronavirus) से फैली COVID-19 महामारी में अबतक 3,30,000 से ज्यादा लोगों की जानें जा चुकी हैं लेकिन इस वायरस के असली स्रोत का अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है. चीन के वुहान शहर से पिछले दिसंबर से शुरू हुई इस महामारी से अबतक दुनिया भर के 50 लाख लोग प्रभावित हो चुके हैं. ऐसे में पिछले कुछ महीनों में इस नए इस वायरस के स्रोत को लेकर बहुत सारी थ्योरी सामने आई हैं. वायरस के असली स्रोत को लेकर जो संस्था सबसे ज्यादा निशाने पर रही है, वो है चीन के वुहान शहर में ही स्थित- वुहान वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट. दुनिया भर में कई वैज्ञानिकों का मानना है कि वुहान के इसी लैब से, जिसमें कई तरह के वायरसों पर रिसर्च होती है, चमगादड़ों में मौजूद रहने वाला यह कोरोनावायरस लीक हुआ है और किसी भी तरह किसी दूसरे मैमल यानी स्तनपायी जानवर के जरिए इंसानों में घुसा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस दावे का खुलकर समर्थन किया है.

'जांच में नहीं मिला है यह वायरस'
अब खुद वुहान लैब ने आगे बढ़कर इस दावे का खंडन किया है. लैब की डायरेक्टर वांग यान्यी ने एक इंटरव्यू में कहा है कि वुहान लैब में इस वक्त रखे गए चमगादड़ों के अंदर मौजूद रहने वाले कोरोनावायरस के तीन लाइव स्ट्रेन (live strains) लिए गए थे, जिनमें से किसी में Covid-19 का वायरस नहीं मिला है.

वांग यान्यी ने 13 मई को चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर CGTN के लिए रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और दूसरे लोगों की ओर से लैब फैसिलिटी से वायरस लीक होने का दावा गलत है और ये पूरी तरह से गढ़ा हुआ झूठ है. इस इंटरव्यू को शनिवार की रात प्रसारित किया गया था.

वांग ने बताया कि लैब ने दावों के बाद कुछ चमगादड़ों से कोरोनावायरस के कुछ नमूने लिए और उनकी जांच की. उन्होंने कहा, 'हमारे पास वायरस के तीन जिंदा नमूने हैं लेकिन वो SARS-CoV2(कोविड-19 महामारी फैलाने वाला वायरस) से महज 79.8 फीसदी मिलते हैं.'

प्रोफेसर शी झेंगिल के नेतृत्व में उनकी एक रिसर्च टीम 2004 से कोरोनावायरस पर अध्ययन कर रही है और SARS के स्रोत का पता लगाने की कोशिश कर रही है. SARS ने लगभग दो दशक पहले कोविड-19 की तरह ही दुनियाभर में तबाही मचाई थी.

'लैब में ऐसा कोई वायरस ही नहीं'
वांग ने कहा, 'हम जानते हैं कि SARS-CoV2 का पूरा जीनोम SARS से बस 80 फीसदी मिलता है. ये एक साफ अंतर है. ऐसे में प्रोफेसर शी की रिसर्च टीम ने ऐसे वायरसों पर ध्यान नहीं दिया, जो SARS वायरस से कम मिलते हों.' शी ने Scientific American को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि SARS-CoV-2 का जीनोम सीक्वेंस उनके लैब में रिसर्च के लिए इकट्ठा किए गए या अभी रखे गए किसी भी बैट कोरोनावायरस से मेल नहीं खाता है.

लैब ने बताया है कि उसे इस नए और अनजान का वायरस के नमूने 30 दिसंबर को मिले और इसका जीनोम 2 जनवरी तक कन्फर्म हुआ, जिसके बाद लैब ने 11 जनवरी तक इस वायरस के पैथोजन की जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को दे दी थी.

वांग ने बताया कि दिसंबर में वायरस का नमूना मिलने से पहले उनके 'लैब में कभी या वायरस रखा ही नहीं गया था, न ही इसपर कोई रिसर्च हुई थी.' वांग ने सवाल उठाया कि 'ऐसे में हमारे लैब से ऐसा कोई वायरस लीक कैसे हो सकता था, जो यहां था ही नहीं?'

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वायरस लैब में वुहान लैब की भूमिका के अमेरिका के दावे पर WHO का कहना है कि उनकी तरफ से इस दावे की पुष्टि करने के लिए कोई सबूत नहीं है.

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