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Arun Jaitley: CA बनना चाहते थे अरुण जेटली, वकालत कर ऐसे उतरे राजनीति में...

Arun Jaitley Passes Away: पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली (Arun Jaitley) का शनिवार को एम्स (AIIMS) में निधन हो गया. वह 66 वर्ष के थे. जेटली का कई सप्ताह से एम्स में इलाज चल रहा था.

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Arun Jaitley: CA बनना चाहते थे अरुण जेटली, वकालत कर ऐसे उतरे राजनीति में...

CA बनना चाहते थे अरुण जेटली, वकालत कर ऐसे उतरे राजनीति में...

Arun Jaitley Passes Away: पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली (Arun Jaitley) का शनिवार को एम्स (AIIMS) में निधन हो गया. वह 66 वर्ष के थे. जेटली का कई सप्ताह से एम्स में इलाज चल रहा था. एम्स ने इसकी घोषणा करते हुए एक संक्षिप्त बयान में कहा कि हम बड़े दुख के साथ अरुण जेटली के निधन की जानकारी दे रहे हैं. जेटली को सांस लेने में दिक्कत और बेचैनी की शिकायत के बाद नौ अगस्त को यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया था. छात्र जीवन में ही भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष करने वाले अरुण जेटली ने वित्त मंत्रालय, कार्पोरेट मामले के मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, कानून मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय संभाला. वे जहां भी रहे, सराहना हासिल करते रहे. बता दें, अरुण जेटली चार्टेड अकाउंटेंट बनना चाहते थे. लेकिन पिता के पेशे वकालत को चुना. 

LIVE Updates: पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली का निधन, AIIMS में ली अंतिम सांस

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CA बनना चाहते थे Arun Jaitley
अरुण जेटली सीए बनना चाहते थे लेकिन उन्होंने अपने पिता के पेशे वकालत को ही अपनाया. राजनीति में आने से पहले अरुण जेटली सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रहे थे. सन 1977 में एलएलबी करने के बाद अरुण जेटली सुप्रीम कोर्ट और देश के कई उच्च न्यायालयों में वकालत करने लगे थे. जनवरी 1990 में अरुण जेटली को दिल्ली हाईकोर्ट ने वरिष्ठ वकील नामित किया. अरुण जेटली को सन 1989 में वीपी सिंह सरकार के दौर में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया था.

अरुण जेटली का स्वभाव चुनावी राजनीति से मेल नहीं खाता था, जानिए- कैसा था संपूर्ण जीवन

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इस दौरान उन्होंने बोफोर्स घोटाले की जांच की तफसील तैयार की थी. जेटली ने भारतीय ब्रिटिश विधिक न्यायालय के समक्ष 'भारत में भ्रष्टाचार और अपराध' विषय पर दस्तावेज प्रस्तुत किए. जून 1998 में नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून को अधिनियमित करने के उद्देश्य से आयोजित संयुक्त राष्ट्र संघ सम्मेलन में वे भारत सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल हुए थे. विधिक और समसामयिक समस्याओं पर अनेक जेटली ने कई पुस्तकें लिखीं. लालकृष्ण आडवाणी, माधवराव सिंधिया समेत कई वरिष्ठ नेता अरुण जेटली के क्लाइंट रहे हैं.

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पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली का 66 साल की उम्र में निधन

अरुण जेटली के 1977 में जनसंघ में शामिल होने के साथ ही उसी वर्ष उन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का सचिव और फिर 1980 में अध्यक्ष बनाया गया. वे 1991 में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बने.एक जुलाई 2002 को उन्हें भाजपा का जनरल सेक्रेटरी नियुक्त किया गया. वे 1999 के आम चुनाव से पहले बीजेपी के प्रवक्ता थे. सन 1999 में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए गठबंधन की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के सत्ता में आने पर 13 अक्टूबर 1999 को अरुण जेटली को सूचना और प्रसारण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया. मई 2004 में एनडीए की हार के बाद जेटली पार्टी के महासचिव बने और वकालत भी करने लगे.

उन्होंने 2009 से 2014 तक राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में कार्य किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में 26 मई 2014 को अरुण जेटली को वित्त मंत्री बनाया गया. उनको कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय का जिम्मा भी दिया गया था. वे 27 मई 2014 से 14 मई 2018  तक केंद्रीय वित्त एवं कार्पोरेट मामलों के मंत्री रहे. उनके पास 27 मई 2014 से 9 नवंबर 2014 तक रक्षा मंत्रालय का प्रभार भी रहा. वे 13 मार्च 2017 से 3 सितंबर 2017 तक रक्षा मंत्री के पद पर रहे.



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