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बस्तर के लिए वरदान बनी ब्राजील के शख्स की गलती, दुनियाभर में हो रहा इस जिले का नाम

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बस्तर के लिए वरदान बनी ब्राजील के शख्स की गलती, दुनियाभर में हो रहा इस जिले का नाम

ब्राजील बादाम कार्बोहाइड्रेट और हाइडेंसिटी लिपिड्स से लबरेज होने के कारण शरीर के लिए बेहद लाभकारी है. तस्वीर: प्रतीकात्मक

खास बातें

  1. ब्राजील से आए कभी किसी व्यक्ति ने माचकोट के जंगलों में बादाम के बीजों को
  2. ब्राजील में मिलने वाले बादाम के बस्तर में मिलने से छत्तीसगढ़ को विश्व स्त
  3. क्रिकेट के बॉल की तरह दिखता है ब्राजील में मिलने वाला बादाम.
बस्तर: कई बार किसी इंसान की गलती दूसरे के लिए वरदान साबित होती है. ऐसा ही छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में हुआ है. काफी समय पहले यहां ब्राजील से आए किसी शख्स ने वहां से लाए गए बादाम खाकर उसके बीज यहां फेंक दिए थे. उन्हीं बीजों से यहां तैयार हुए बादाम के पेड़ों की वजह से इस इलाके का नाम दुनियाभर में हो रहा है. 

छत्तीसगढ़ का जंगली इलाका कई तरह की औषधीय पौधों के लिए तो प्रसिद्ध है ही, लेकिन अब प्रदेश के जंगल में ब्राजील में मिलने वाले जंगली बादाम के बस्तर में मिलने से छत्तीसगढ़ को विश्व स्तर पर एक नई पहचान मिल गई है.

बताया जाता है कि ब्राजील बादाम कार्बोहाइड्रेट और हाइडेंसिटी लिपिड्स से लबरेज होने के कारण शरीर के लिए बेहद लाभकारी है. दक्षिण अफ्रीका के ब्राजील के जंगलों में मिलने वाले इस जंगली बादाम का एक पेड़ माचकोट के जंगल में मिला है.

क्रिकेट के बॉल की तरह दिखता है बादाम

दक्षिण अफ्रीका के ब्राजील में मिलने वाले जंगली बादाम जिसे वैज्ञानिक नाम स्टरकुलिया फोटिडा के नाम से जाना जाता है. यह जंगली बादाम एक क्रिकेट के बॉल की तरह दिखता है. इसके बीज को भूनकर मूंगफली की तरह खासा जाता है.

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कुछ समय पहले यहां पहुंचे शोधकर्ताओं का मानना है कि माचकोट के जंगलों में इस जंगली बादाम का पेड़ रहा होगा या फिर ब्राजील से कभी कोई व्यक्ति यहां आकर इसके बीजों को यहां फेंक गया होगा, जिससे यहां पेड़ हुआ. इसके साथ ही यहां एक विशेष प्रजाति का कुल्लू गोंद भी यहां पाया जाता है. इसका संरक्षण और संवर्धन करने की जरूरत है. इस दिशा में वन विभाग को पहल करनी चाहिए.

जगदलपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति-शास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. तूणीर खेलकर ने बताया कि माचकोट के जंगल में बादाम का जो पेड़ मिला है, उसे 'स्टरकुलिया फोटिडा' कहा जाता है. इसके बारे में वन विभाग के अफसरों को जानकारी दे दी गई है. इसका संरक्षण जरूरी है.


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