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इस शादी में देवी लक्ष्‍मी बनकर पहुंची दुल्‍हन तो दूल्‍हा बना व‍िष्‍णु, बारात में सभी बने थे 'भगवान'

इस शादी के दूल्‍हा-दुल्‍हन स्‍टार कपल तो नहीं थे, लेकिन हां 'भगवान' जरूर थे. आंध्र प्रदेश में हुई इस शादी की थीम कोई ऐसी-वैसी नहीं बल्‍कि 'गॉड' थीम थी.

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इस शादी में देवी लक्ष्‍मी बनकर पहुंची दुल्‍हन तो दूल्‍हा बना व‍िष्‍णु, बारात में सभी बने थे 'भगवान'

खास बातें

  1. दूल्‍हा-दुल्‍हन स्‍टार कपल तो नहीं थे, लेकिन हां 'भगवान' जरूर थे.
  2. दुल्‍हन के प‍िता का कहना है क‍ि पुराने जमाने में शादियां ऐसे ही होती थीं
  3. इस अनोखी शादी की फोटो इंटरनेट पर खूब वायरल हो रही हैं
नई द‍िल्‍ली :
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पिछले कुछ दिनों से साउथ के सुपरस्टार नागार्जुन के बेटे नागा चैतन्य और अभिनेत्री सामंथा रुथ प्रभु की शादी खूब सुर्ख‍ियां बटोर रही है. इस स्‍टार कपल ने शुक्रवार को पहले हिंदू रीति-रिवाज और फिर शनिवर को क्रिश्‍चियन तरीके से शादी
की. इस फेयरी टेल वेडिंग की तस्‍वीरें इंटरनेट पर खूब वायरल भी हो रही हैं. लेकिन इस बीच एक और शादी भी लोगों की चर्चा का व‍िषय बनी हुई है. 
 
bride groom andhra pradesh

आफताब शिवदासानी ने श्रीलंका में की 'दूसरी शादी' लेकिन

इस शादी के दूल्‍हा-दुल्‍हन स्‍टार कपल तो नहीं थे, लेकिन हां 'भगवान' जरूर थे. आंध्र प्रदेश में हुई इस शादी की थीम कोई ऐसी-वैसी नहीं बल्‍कि 'गॉड' थीम थी. जी हां, इस शादी में दूल्‍हा-दुल्‍हन और उनके माता-पिता भगवान जैसे कपड़े पहनकर शरीक हुए. यही नहीं शादी में शामिल हुए सभी मेहमान और बाराती भी देवी-देवताओं की वेष-भूषा में थे. शादी का वीडियों और तस्‍वीरें इंटरनेट पर खूब वायरल हो रहे हैं.
 
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ख़बर के मुताबिक जहां दुल्‍हन लक्ष्‍मी वेष में तैयार हुई थी वहीं दूल्‍हे ने संसार के पालनहार व‍िष्‍णु का रूप धारण किया हुआ था. भगवान स्‍टाइल की इस शादी का आयोजन दुल्‍हन के पिता श्रीधर स्‍वामी ने किया था. श्रीधर स्‍वामी खुद को संत बताते हैं और मुक्‍कमला में उनका एक आश्रम भी है. 
 
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दूल्‍हा-दुल्‍हन की तरह स्‍वयंभू संत और उनकी पत्‍नी भी भगवान की वेष-भूषा में सजे-धजे थे. द न्‍यूज म‍िनट की रिपोर्ट के मुताबिक, 'पुराने जमाने में शादियां इसी तरह हुआ करती थीं. हमें सनातन परंपराओं का निर्वाहन करना चाहिए. शादियां धार्मिक तरीकों से हुआ करती थीं. उन्‍हीं बातों को दोहराकर हमने उन्‍हीं धार्मिक भावनाओं के साथ शादी की हर रस्‍म को निभाया.' 
 
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स्‍वामी से जब यह पूछा गया कि उन्‍होंने भगवान थीम का ही चुनाव क्‍यों किया तो उन्‍होंने कहा, 'हर शादी में कन्‍यादान के दौरान दुल्‍हन को लक्ष्‍मी के रूप में देखा जाता है. हर कोई दुल्‍हन को देखते हुए अपने दिमाग में लक्ष्‍मी की छवि बनाता है. मैंने अपनी बेटी को लक्ष्‍मी की तरह कपड़े और आभूषण पहना कर उस कल्‍पना को सच कर दिखाया.'


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