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बैलगाड़ी से दुल्हनियां लेने पहुंचा सॉफ्टवेयर इंजीनियर, लाखों रुपए है दूल्हे का सैलरी पैकेज

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बैलगाड़ी से दुल्हनियां लेने पहुंचा सॉफ्टवेयर इंजीनियर, लाखों रुपए है दूल्हे का सैलरी पैकेज

इंजीरियर रमेश पाटीदार ने यह पहल कर समाज को संदेश देने की कोशिश की है.

खास बातें

  1. रतलाम जिले के एक इंजीनियर ने बैलगाड़ी से बारात ले जाकर मिसाल पेश की
  2. पढ़े-लिखे लोगों को शादियों में खर्च से बचने का संदेश दिया
  3. दूल्हा रमेश के अलावा बाराती भी बैलगाड़ी में सवार थे
रतलाम: शादियों में रुतबा दिखाने के लिए महंगी गाड़ियों के बाद अब हेलीकॉप्टर से दुल्हन को लाने की खबरें भी आती रहती हैं, लेकिन बदलते दौर में मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के एक इंजीनियर ने बैलगाड़ी से बारात ले जाकर मिसाल पेश की है. इंजीरियर रमेश पाटीदार ने यह पहल कर समाज को दो संदेश देने की कोशिश की है. रमेश ने कहा वे चाहते हैं कि पढ़े-लिखे लोग शादियों में खर्च से बचें. वे शादियों को रुतबा दिखाने की सोच से ऊपर उठें. साथ ही वे चाहते हैं लोग अपनी परंपरा की ओर लौटें, ताकि अपने समाज के गरीब तबके के लोग धनी लोगों से अपना जुड़ाव समझें.

रमेश बंगलुरु में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. जब उनकी शादी हुई तो उन्होंने सोचा कि वे इसके जरिए समाज में कुछ संदेश दें. इसके लिए उन्होंने तय किया कि वे बैलगाड़ी लेकर बारात में जाएंगे. दिलचस्प रहा कि दुल्हा रमेश के अलावा बाराती भी बैलगाड़ी में सवार थे. कुछ बाराती पैदल चल रहे थे.

रमेश के इस पहल की पूरे इलाके में चर्चा हो रही है. दुल्हन के पिता भी अपने दामाद के इस फैसले काफी खुश दिखे. उन्होंने कहा कि अगर सभी युवा उनके दामाद की तरह सोचें तो समाज की कई बुराइयां यूं ही खत्म हो जांएगी. साथ ही शादियों में फिजूलखर्ची भी काफी हद तक खत्म हो जाएगा. यह शादी 28 फरवरी को संपन्न हुई थी, लेकिन स्थानीय डीएम ने अब इंजीनियर के इस फैसले की तारीफ की है.

आईएएस जोड़े ने 1100 रुपए की थी शादी

नोटबंदी के दौरान मध्यप्रदेश के भिंड़ जिले में अनोखी शादी देखने को मिली थी. यहां आईएएस ने महज 500 रुपये खर्च कर शादी के बंधन में बंधे थे. 2013 में सिविल सर्विसेज परीक्षा पास करने वाले आशीष वशिष्ठ और सलोनी सिडाना ने सोमवार को बेहद ही सादे अंदाज में भिंड कोर्ट में शादी कर ली. आशीष भिंड के गोहद में एसडीएम हैं तो वहीं सलोनी इन दिनों आंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा में पदस्थ हैं. दोनों की पहली मुलाकात मसूरी की लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन में ट्रेनिंग के दौरान हुई और फिर उसके बाद दोनों ने शादी का फैसला किया. हालांकि ट्रेनिंग पूरी होते ही दोनों को अलग-अलग पोस्टिंग मिली. जहां आशीष को मध्यप्रदेश में पोस्टिंग मिली तो वहीं सलोनी को आंध्रप्रदेश जाना पड़ा.


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