NDTV Khabar

आईएमए के अध्यक्ष का दावा, मनोरोगों से संबंधित सवालों का जवाब देता है महाभारत ग्रंथ

मनोरोगों के निदान के सूत्र देता है प्राचीन ग्रंथ महाभारत, भगवान कृष्ण सही मायने में पहले और सबसे मशहूर परामर्शदाता

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
आईएमए के अध्यक्ष का दावा, मनोरोगों से संबंधित सवालों का जवाब देता है महाभारत ग्रंथ

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  1. मनोचिकित्सा का इतिहास अर्जुन को सफल परामर्श से होता है शुरू
  2. भगवान कृष्ण ने अपने मरीज अर्जुन को की मदद, भगवद गीता रची गई
  3. संस्कृत महाकाव्य ने प्राचीन भारतीयों को कई सवालों के जवाब दिए
नई दिल्ली:

मनोरोगों के संबंधित सवालों के जवाब महाकाव्य महाभारत से मिलते हैं. इस तरह महाभारत ही वह प्राचीन ग्रंथ है जो मनोरोगों के निदान के सूत्र देता है. यह मत है भगवान कृष्ण को सबसे मशहूर परामर्शदाता मानने वाले इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अध्यक्ष केके अग्रवाल का.

केके अग्रवाल ने कहा है कि महाकाव्य महाभारत में ऐसे कई बिंदु हैं जिनसे मनोरोग संबंधी मुद्दों के जवाब मिलते हैं. उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण सही मायने में पहले और सबसे मशहूर परामर्शदाता थे, जिनका अपने मरीज अर्जुन के साथ वाले सत्र में न सिर्फ उनकी स्थिति बेहतर हुई, बल्कि 700 श्लोकों वाले भगवद गीता नाम के प्राचीन ग्रंथ की रचना हुई.

यह भी पढ़ें - महाभारत की ये बातें समझ गए, तो कोई आपको हरा नहीं पाएगा...


अग्रवाल ने ‘दि इक्वेटर लाइन’ मैगजीन में ‘कॉबवेब्स इनसाइड अस’ के ताजा अंक में लिखा है, ‘‘भारत में मनोचिकित्सा का इतिहास महाभारत की 18 दिन चली लड़ाई से पहले भगवान कृष्ण की ओर से अर्जुन को सफल परामर्श दिए जाने से होता है.’’ ‘वेदों के समय में मनोचिकित्सा’ शीर्षक से लिखे गए आलेख में अग्रवाल ने लिखा कि जब कोई मानसिक-स्वास्थ्य पेशेवर या मनोवैज्ञानिक दवाएं नहीं थीं, लगता है उस वक्त संस्कृत महाकाव्य ने प्राचीन भारतीयों को कुछ जवाबों की पेशकश की.’’ उन्होंने कहा कि दवाओं का एक वर्गीकरण है जो व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य का पोषण करता है और अलग-अलग व्यक्तियों पर अलग-अलग दवाएं लागू होती हैं.

टिप्पणियां

यह भी पढ़ें- बेटे के साथ आजकल महाभारत पढ़ रहा हूं : शाहरुख ख़ान

उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर वैदिक तौर-तरीका मस्तिष्क, बौद्धिकता और अहं को नियंत्रित करने पर जोर देता है. अग्रवाल ने लिखा, ‘‘भगवान शिव ने क्रोध को काबू में रखने का बेहद वैदिक तरीका सुझाया है. जब आप असंतोष से भरे होते हैं, तो अपने गले में नकारात्मक विचार भरे होते हैं. कुछ वक्त के बाद उस मुद्दे पर ठंडे दिमाग से सोचिए.’’
(इनपुट भाषा से)



Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करें.


Advertisement