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रूठे मालिक को मनाने के लिए कुत्ते ने की दिल छूने वाली हरकत, 2 दिन में 26 लाख बार देखा गया यह वीडियो

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रूठे मालिक को मनाने के लिए कुत्ते ने की दिल छूने वाली हरकत, 2 दिन में 26 लाख बार देखा गया यह वीडियो

कुत्ता और मालिक के बीच प्यार का अनोखा वीडियो.

खास बातें

  1. कुत्ते और इंसानों की दोस्ती जगजाहिर है
  2. मालिक को मनाने के लिए कुत्ते ने की दिल छूने वाली हरकत
  3. कुत्ते और मालिक की दोस्ती का वीडियो हो रहा वायरल
नई दिल्ली: कुत्ता एक ऐसा जानवर है जिसकी इंसानों से सबसे पहले दोस्ती हुई थी. यानी कुत्ते को इंसानों ने सबसे पहले पालतू बनाया था. इंसानों और कुत्ते की दोस्ती आज तक कायम है. शायद इस दुनिया में कुत्ता इकलौता ऐसा जानवर है जो इंसानी भावनाओं को सबसे ज्यादा समझता है. इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कुत्ते और इंसान की दोस्ती का एक भावनात्मक रिश्ता देखने को मिल रहा है. इस वीडियो में दिख रहा है कि एक कुत्ता अपने मालिक में लिपट रहा है. आप अगर इस वीडियो को सुनेंगे तो पता चलेगा कि कुत्ते ने कोई गलती की है, जिसके चलते मालिक उससे नाराज हो गया है. कुत्ता अपने मालिक से माफी मांग रहा है. साथ ही वह बार-बार इस तरह से प्यार जता रहा है कि वह आगे से ऐसी गलती नहीं करेगा. यानी वह अपने नाराज मालिक को मनाने की कोशिश में जुटा दिख रहा है. कुत्ते का मालिक उसे बार-बार दुत्कार रहा है, वह उसे दूर हटने के लिए कहता है, लेकिन वह मनाने की जिद्द पकड़े दिख रहा है. NTD Television के फेसबुक पेज से एक मई को शेयर किए गए इस वीडियो को अब तक 26 लाख से ज्यादा बार देख चुके हैं. इसके करीब अलावा 50 हजार लोग शेयर कर चुके हैं.


मालूम हो कि साल 2015 में आए एक रिसर्च रिपोर्ट में दावा किया गया था इंसान और कुत्ते के बीच दोस्ती का यह रिश्ता 27 से 40 हजार साल पुराना है. 35 हजार साल पुरानी तेमायर भेड़िये की हड्डी पर किए गए आनुवांशिक विश्लेषण के बाद यह बात साबित हुई है. तेमायर भेड़िये वर्तमान कुत्ते और भेड़िये की प्रजातियों के पूर्वज थे. यह स्टडी सेल प्रेस जर्नल करंट बायॉलजी में प्रकाशित हुई है.

स्वीडिश प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय के लव डेलन बताते हैं, 'असल में जिस समय पर हम विश्वास करते हैं, उससे काफी पहले ही कुत्तों को घरों में पाला जाने लगा था. उस वक्त दो प्रकार के भेड़ियों की प्रजाति थी जिसमें से एक वर्तमान की प्रजाति है.'

इस स्टडी के पहले लेखक और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल से संबद्ध पोंटस स्कोगलुंड बताते हैं कि यह संभव है कि बड़ी तादाद में फैले यह भेड़िये इंसानों के संपर्क में आए और उनके साथ रहने लगे. डीएनए से यह भी साबित हुआ है कि वर्तमान में मौजूद साइबेरियन और ग्रीनलैंड नस्ल के कुत्ते तेमायर भेड़ियों की नस्ल के ज्यादा करीब हैं.

स्कोगलुंड आगे कहते हैं, 'ये भेड़िये आदि मानवों के खत्म होने के एक साल के बाद तक ही जिए, इसके बाद आधुनिक मानव यूरोप और एशिया में रहने लगे.'  


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