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8 दिन टॉर्चर झेलने के बाद ऐसे भारत लौटे थे पाकिस्तान में फंसे पायलट नचिकेता

भारत और पाकिस्तान के बीच कायम तनातनी के बीच पाक की कैद में एक भारतीय पायलट है. ठीक ऐसा ही मामला 1999 के कारगिल युद्ध में सामने आया था. जब भारत के पायलट पाकिस्तानी आर्मी की कैद में थे. उन्हें काफी कोशिशों के बाद भारत वापस लाया गया था.

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8 दिन टॉर्चर झेलने के बाद ऐसे भारत लौटे थे पाकिस्तान में फंसे पायलट नचिकेता

8 दिन टार्चर झेलने के बाद ऐसे भारत लौटे थे पाकिस्तान में फंसे पायलट नचिकेता.

भारत और पाकिस्तान के बीच कायम तनातनी के बीच पाक की कैद में एक भारतीय पायलट है. दरअसल, 27 फरवरी को भारत और पाकिस्‍तान दोनों तरफ जवाबी कार्रवाई को लेकर खबरें जोरों पर रहीं.  पाकिस्‍तान ने एलओसी में अपने लड़ाकू विमान से घुसपैठ की कोशिश की जिसे भारतीय वायु सेना ने नाकाम कर दिया. इस दौरान भारतीय वायुसेना के एक मिग विमान का नुकसान हो गया. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता ने बताया कि भारत का एक पायलट लापता है. बाद में उसके पाकिस्‍तान में बंधक बनाए जाने की सूचना मिली. ठीक ऐसा ही मामला 1999 के कारगिल युद्ध में सामने आया था. जब भारत के पायलट पाकिस्तानी आर्मी की कैद में थे. उन्हें काफी कोशिशों के बाद भारत वापस लाया गया था. उस दौरान पाकिस्तानी पोस्ट पर हवाई हमला करते वक्त 26 वर्षीय पायलट नचिकेता का फाइटर प्लेन बंद हो गया था और पाकिस्तान के इलाके में जा गिरा था. पाकिस्तानी आर्मी ने उन्हें कैद में ले लिया था. पाकिस्तान से रिहाई के बाद नचिकेता से एनडीटीवी के संवाददाता विष्णु सोम ने टॉर्चर के बारे में पूछा था और उन्होंने उस वक्त की पूरी स्टोरी सुनाई थी. 

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फिलहाल के. नचिकेता भारतीय वायु सेना में ग्रुप कैप्टन हैं. उनसे जब उस दौरान के टॉर्चर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा था- 'टॉर्चर काफी बुरा था. उस वक्त मुझे लगने लगा था कि मौत बहुत आसान है. टॉर्चर का आखिरी पार्ट थर्ड डिग्री होता है लेकिन मेरी खुशकिस्मती थी कि मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ.' 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान नचिकेता को 17 हजार फीट ऊपर पाकिस्तानी पोस्ट को निशाना बनाना था. वो ऊपर पहुंचे और मिग-27 फाइटर प्लेन से बम गिराया. उसी वक्त इंजन में से आग निकलने लगी. हवा में ही प्लेन ने काम करना बंद कर दिया. उस वक्त उनके लिए इंजन को चालू करना जरूरी था. 

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मिग-27 में खासियत होती है कि वो फिर चालू हो सकता है. उसमें तुमानस्की टर्बो इंजन होता है. उस समय उनका फोकस था कि जल्द से जल्द वॉर जोन से दूर जाया जाए और सेफ लैंडिंग की जाए. टर्बो इंजन से उन्होंने प्लेन तो चालू कर लिया लेकिन पहाड़ी से काफी करीब होने के कारण उनको प्लेन से कूदना पड़ा.

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उन्होंने कहा- 'प्लेन से बाहर निकलते ही कुछ समझ नहीं आता. लोग अधिकतर बेहोश हो जाते हैं. लेकिन मुझे पता था कि मेरे साथ क्या हो रहा है. मैं जल्द ही नीचे गिर गया. वहां सबकुछ सफेद-सफेद सा नजर आ रहा था. बर्फबारी के कारण पहाड़ी बर्फ से ढकी हुई थी. मेरे आस पास गोलियों की बरसात होने लगी. मेरा लक्ष्य था कि खुद को कवर किया जाए. आधे घंटे बाद ही पाकिस्तानी जवान मुझ पर घात लगाकर हमला कर रहे थे. मेरे पास छोटी पिस्टल थी. मुझे 5-6 लोग नजर आ रहे थे. मैंने पहला राउंड फायर किया. लेकिन पिस्टल सिर्फ 25 यार्ड की दूरी तक ही फायर कर सकती थी. वहीं उनके पास एके-56 राइफल्स थीं. जैसे ही मैं दूसरी मैग्जीन लोड कर रहा था. तभी उन्होंने मुझे पकड़ लिया.'

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पाकिस्तानी उत्तरी लाइट इन्फैंट्री के जवानों ने उनको पकड़ा था और बुरी तरह पीटा था. उन्होंने कहा- 'जिस व्यक्ति ने मुझे पकड़ा था वो मुझे मारना चाहता था क्योंकि उनके लिए मैं दुश्मन पायलट था, जिसने उनके साथियों पर गोलियां चलाई थीं. उसी वक्त एक समझदार ऑफिसर पहुंचा और उन्होंने हालात को संभाला. मेरे लिए उनका आना बहुत बड़ी चीज थी. क्योंकि उस समय पाकिस्तानी जवान काफी गुस्से में थे. जिसके बाद मुझे वो अपने इलाके में ले गए. उस वक्त किसी को नहीं पता था कि मैं कहां हूं. उन्होंने पूछताछ शुरू कर दी और मुझे विश्वास हो चुका था कि मैं कल भारत की सुबह नहीं देख पाऊंगा और सच बताऊं तो उनको बताने जैसा मेरे पास कुछ भी नहीं था और वो मेरे मुंह से कोई बड़ी बात सुनना चाह रहे थे. लेकिन एयर फोर्स पायलट को आर्मी प्लान्स के बारे में पता नहीं होता है.'

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नचिकेता पाकिस्तान में कैद है... ये बात दुनियाभर को पता चल चुकी थी. हर जगह इस बात की चर्चा हो रही थी. रिहाई के लिए भारत सरकार द्वारा अथक प्रयास किए, जिसके बाद नचिकेता को रेड क्रॉस को सौंप दिया गया, 8 दिन बाद उन्हें (नचिकेता) वापस भारत लाया गया, जहां राष्ट्रपति केआर नारायणन और प्रधान मंत्री वाजपेयी द्वारा उन्हें एक हीरो के तौर पर बधाई दी गई. बता दें, नचिकेता इस वक्त भारतीय वायु सेना में ग्रुप कैप्टन हैं और वे ट्रांस्पोर्ट प्लेन उड़ाते हैं. कारगिल युद्ध के बाद फिर कभी वो फाइटर प्लेन नहीं चला पाए क्योंकि उस हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी को भारी नुकसान पहुंचा था. 

हालांकि नचिकेता कहते हैं कि एक पायलट का दिल हमेशा कॉकपिट में रहता है. पाक की कैद में भारतीय पायलट के मामले में NDTV से ग्रुप कैप्टन के. नचिकेता ने कहा कि हमारे जवान फर्ज़ निभाते हुए मोहरा बन गए. उनके साथ अफसरों जैसा सलूक किया जाना चाहिए. जेनेवा समझौते पर भारत और पाकिस्तान, दोनों ने दस्तखत किए हैं. पूरे देश की तरह मेरी दुआएं भी उनके साथ हैं. हर पायलट का दिल हमेशा कॉकपिट में ही होता है. मुझे भरोसा है, दूसरे पक्ष से बात की जा रही होगी.'



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