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'सुट्टा ब्रेक' के बदले कंपनी ने सिगरेट न पीने वाले कर्मचारियों को दिया ये अनोखा तोहफा

ऑफिस में ऐसे कई लोग होते हैं जो सिगरेट पीने के लिए बार-बार बाहर जाते हैं. लेकिन इस सुट्टा ब्रेक से उन ऑफिस कलीग्‍स को सबसे ज्‍यादा द‍िक्‍कत होती है जो सिगरेट नहीं पीते हैं.

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'सुट्टा ब्रेक' के बदले कंपनी ने सिगरेट न पीने वाले कर्मचारियों को दिया ये अनोखा तोहफा

खास बातें

  1. ऑफिस में ऐसे कई लोग होते हैं जो सिगरेट पीने के लिए बार-बार बाहर जाते हैं
  2. सिगरेट ब्रेक की वजह से ऑफिस का काम प्रभावित होता है
  3. ऐसे में जापान की एक कंपनी ने बेहद अनोखा फैसला लिया है
नई द‍िल्‍ली :

ऑफिस में ऐसे कई लोग होते हैं जो सिगरेट पीने के लिए बार-बार बाहर जाते हैं. आम बोलचाला में इसे 'सुट्टा ब्रेक' कहते हैं. लेकिन इस सुट्टा ब्रेक से उन ऑफिस कलीग्‍स को सबसे ज्‍यादा द‍िक्‍कत होती है जो सिगरेट नहीं पीते हैं. तकलीफ होना लाजिमी भी है क्‍योंकि जो लोग सिगरेट पीते हैं उन्‍हें तो काम से ब्रेक मिल जाता है लेकिन जो नहीं पीते हैं वो सारा टाइम ऑफिस में बैठ कर काम करते रहते हैं. यही नहीं कई बार तो उन कलीग्‍स के हिस्‍से का काम भी निपटाना पड़ता है जो बार-बार सिगरेट पीने के लिए बाहर जाते रहते हैं. 

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ऐसे में जापान की राजधानी टोक्‍यो की एक मार्केटिंग फर्म पियाला इंक ने अनोखा फैसला लिया है. इस कंपनी ने सिगरेट ना पीने वाले अपने कर्मचारियों को साल में छह दिन ज्‍यादा पेड लीव देने का ऐलान किया है. कंपनी के एक प्रवक्‍ता के मुताबिक, 'हमारे सिगरनेट न पीने कर्मचारी एक कर्मचारी ने पिछले साल कंपनी की सुझाव पेटी में एक चिट्ठी डाली थी, जिसमें कहा गया था कि सिगरेट ब्रेक की वजह से दिक्‍कतों का सामना करना पड़ रहा है.'


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कंपनी के सीईओ ने भी एक्‍शन लेने में देरी नहीं की और फैसला किया कि जो कर्मचारी सिगरेट नहीं पीते हैं उन्‍हें साल में छह दिन ज्‍यादा पेड लीव मिलेगी. दरअसल, जिस कंपनी की बात हो रही है वह 29वें माले पर स्थित है. ऐसे में सिगरेट का एक ब्रेक कम से कम 15 मिनट का होता है क्‍योंकि बेसमेंट में जाकर सिगरेट पीने और फिर वापस ऊपर आने में काफी समय लगता है. यानी कि एक दिन में अगर किसी कर्मचारी ने चार ब्रेक लिए तो दिन भर उसने एक घंटे काम ही नहीं किया. इस‍ हिसाब से यह साल के 15 दिन हो गए. 

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कंपनी के सीईओ के मुताबिक नई पॉलिसी के लागू होने के बाद से अब तक चार लोग सिगरेट पीना छोड़ चुके हैं. बहरहाल, हम तो कंपनी के फैसले का स्‍वागत करते हैं और यह उम्‍मीद करेंगे कि भारतीय कंपनियां भी इस पॉलिसी को अपने यहां लागू करने में देरी नहीं करेंगी. 

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