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Mahavir Jayanti 2019: भगवान महावीर के 12 अनमोल वचन

Happy Mahavir Jayanti 2019: भगवान महावीर का जन्म लगभग 600 वर्ष पूर्व चैत्र शुक्ल त्रयोदशी के दिन हुआ था, जो इस बार 17 अप्रैल को है. उन्होंने हमेशा जीयो और जीने दो का संदेश दिया. साथ ही उन्होंने अपने हर भक्त को अंहिसा, सत्य, अक्षत, ब्रह्मचार्य और स्वत्व-त्याग का पालन करने को कहा.

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Mahavir Jayanti 2019: भगवान महावीर के 12 अनमोल वचन

भगवान महावीर के वचन

खास बातें

  1. महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे.
  2. उनकी जयंती चैत्र माह में शुक्ल त्रयोदशी को मनाई जाती है.
  3. महावीर ने अहिंसा को सर्वोपरि बताया और जैन धर्म के पंचशील सिद्धांत दिए.
नई दिल्ली:

Mahavir Jayanti 2019: सत्य और अहिंसा का रास्ता दिखाने वाले भगवान महावीर (Mahavir) की जयंती का विशेष महत्व होता है. जैन धर्म के 24वें तीर्थकार स्वामी महावीर (Swami Mahavira) को जैन धर्म के 24 वें तीर्थकार के रूप में माना जाता है. भगवान महावीर (Mahavir Jayanti) का जन्म लगभग 600 वर्ष पूर्व चैत्र शुक्ल त्रयोदशी के दिन हुआ था, जो इस बार 17 अप्रैल को है. उन्होंने हमेशा जीयो और जीने दो का संदेश दिया. साथ ही उन्होंने अपने हर भक्त को अंहिसा, सत्य, अक्षत, ब्रह्मचार्य और स्वत्व-त्याग का पालन करने को कहा. इन पांचों बातों को उन्होंने अपने कुछ अनमोल वचनों के साथ कहा. यहां महावीर जयंती के दिन जानिए भगवान महावीर के बेहद ही खास वचन.

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भगवान महावीर के अनमोल वचन :-

1. किसी आत्मा की सबसे बड़ी गलती अपने असल रूप को ना पहचानना है , और यह केवल आत्म ज्ञान प्राप्त कर के ठीक की जा सकती है.

2. शांति और आत्म-नियंत्रण अहिंसा है.

3. प्रत्येक जीव स्वतंत्र है. कोई किसी और पर निर्भर नहीं करता.

4. भगवान का अलग से कोई अस्तित्व नहीं है. हर कोई सही दिशा में सर्वोच्च प्रयास कर के देवत्त्व प्राप्त कर सकता है.

5. प्रत्येक आत्मा स्वयं में सर्वज्ञ और आनंदमय है. आनंद बाहर से नहीं आता.

6. सभी जीवित प्राणियों के प्रति सम्मान अहिंसा है.

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7. सभी मनुष्य अपने स्वयं के दोष की वजह से दुखी होते हैं, और वे खुद अपनी गलती सुधार कर प्रसन्न हो सकते हैं.

8. अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है.

9. स्वयं से लड़ो, बाहरी दुश्मन से क्या लड़ना ? वह जो स्वयं पर विजय कर लेगा उसे आनंद की प्राप्ति होगी.

10. खुद पर विजय प्राप्त करना लाखों शत्रुओं पर विजय पाने से बेहतर है.

टिप्पणियां

11. आपकी आत्मा से परे कोई भी शत्रु नहीं है. असली शत्रु आपके भीतर रहते हैं , वो शत्रु हैं क्रोध, घमंड, लालच, आसक्ति और नफरत.

12. आत्मा अकेले आती है अकेले चली जाती है, न कोई उसका साथ देता है न कोई उसका मित्र बनता है.
 



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