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कालिया दंपति का मिशन....ताकि कोई एम्बुलेंस न मिलने के कारण दम न तोड़े

सड़क हादसे में घायल पिता को सड़क से उठाकर अस्पताल पहुंचाने के लिए मदद न मिलने का बुरा अनुभव मिलने के बाद बदल गई हिमांशु कालिया की जिंदगी

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कालिया दंपति का मिशन....ताकि कोई एम्बुलेंस न मिलने के कारण दम न तोड़े

कालिया दंपति सभी जरूरतमंदों तक एंबुलेंस पहुंचाने के लिए तैयार रहते हैं.

नई दिल्ली: पाकिस्तान में गरीब जरूरतमंद लोगों के लिए मुफ्त एम्बुलेंस चलाने वाले अब्दुल सत्तार एधि पूरी दुनिया में मशहूर हैं. हमारे देश में भी एक कालिया परिवार है जो एधि जितना मशहूर अभी भले  न हुआ हो पर काम भी वही करता है और लगन भी उतनी ही है. दिल्ली के रहने वाले हिमांशु कालिया का बस एक ही सपना है कि सड़क हादसे में घायल पिता को सड़क से उठाकर अस्पताल पहुंचाने का जो उनका बुरा अनुभव था वैसा किसी और को न मिले.

चौदह साल की उम्र में उस दुःखद अनुभव ने हिमांशु को भारत का एधि बना दिया. लोग उन्हें एम्बुलेंस मैन भी कहने लगे. फिर जब उनकी शादी हुई तो पत्नी ट्विंकल भी मायके से एम्बुलेंस लेकर आईं. हिमांशु जब चौदह साल के थे तब उनके पिता एक सड़क हादसे में घायल हो गए थे. समय से अस्पताल नहीं पहुंच पाने की वजह से उनके पहले पिता कोमा में चले गए. ढाई साल बाद वे कोमा से उबरकर स्वस्थ हुए. हिमांशु ने अपने पिता को अस्पताल पहुंचाने के लिए न जाने किस-किस से गुहार लगाई पर कोई खास फायदा नहीं हुआ. इसके बाद हिमांशु ने आम लोगों की इस मुश्किल को आसान करना ही अपने जीवन का मिशन बना लिया. वे करीब 20 सालों से इसी काम में जुटे हैं.
 
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हिमांशु की पत्नी ट्विंकल ने भी एम्बुलेंस चलाना सीख लिया है. जब ड्राइवर की कमी होती है तब वे खुद ही गरीब जरूरतमंद लोगों को अस्पताल पहुंचने का काम करती हैं. पुलिस से लेकर अन्य निजी एम्बुलेंस सेवा में काम करने वालों और झुग्गियों में रहने वालों को हिमांशु ने अपना टेलीफ़ोन नंबर दे दिया है ताकि जिसे भी जरूरत हो वह एम्बुलेंस के लिए उन्हें फ़ोन कर सके.

हिमांशु को अपने इस सेवा मिशन के लिए हर महीने करीब दो लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं. इंश्योरेंस एजेंट के काम से जो कमाई होती है वह उसे अपने इसी मिशन पर खर्च कर देते हैं. हिमांशु और ट्विंकल को अपने इस मिशन में ख़ुशी तो बहुत मिलती है पर चुनौतियां भी कम नहीं हैं. कई बार बच्चों की स्कूल फीस जमा करने में देरी हो जाती है पर वे एम्बुलेंस चलाने वाले को सैलरी देने में कभी देर नहीं करते. ट्विंकल बताती हैं कि कई बार वे अपने छोटे बच्चों को घर में छोड़कर जरूरतमंद लोगों को अस्पताल पहुंचने चली जाती हैं.
 
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ट्विंकल ने बताया कि कई बार घायल लोगों को उठाने और एम्बुलेंस से उतारने के लिए भी लोग आगे नहीं आते. एक वाकये का जिक्र करते हुए ट्विंकल कालिया याद करती हैं कि कैसे एक बार जब वे सड़क हादसे में घायल एक किशोर लड़के को अस्पताल लेकर पहुंचीं तो कई मिन्नतों के बाद ही लोग उसे एम्बुलेंस से उतारने को तैयार हुए. जब वह लड़का ठीक हुआ तो वह अपने माता-पिता के साथ कालिया परिवार से मिलने आया. पिता ने ट्विंकल की तरफ इशारा करते हुआ कहा कि बेटा ये तुम्हारी दूसरी मां हैं. हमने तो तुम्हें जन्म दिया पर इन्होंने तुम्हे जीवन दिया.हिमांशु पिता के हाथों 150 एंबुलेंसों का उद्घाटन कराना चाहते हैं.

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VIDEO : मोटर बाइक एंबुलेंस

चुनौतियां तो हर किसी के जीवन में होती हैं पर हिमांशु और ट्विंकल कालिया सिर्फ अपनी चुनौतियों को ही नहीं किसी बेसहारा के जीवन की चुनौतियों से भी जी-जान से लड़ते हैं और अपना जीवन इन्हीं चुनौतियों को समर्पित कर देना चाहते हैं.


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