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बस के प्रयोग के लिए धन्यवाद, बोले साइबराबाद के टेकीज

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बस के प्रयोग के लिए धन्यवाद, बोले साइबराबाद के टेकीज

बस में सफर करने वालों को कुछ यह नजारा दिखा

हैदराबाद: ऑनलाइन के दुनिया के तमाम टेकीज ने अब बीड़ा उठाया है कि वे ऑफलाइन दुनिया में भी अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएंगे।

इसका नजारा दिखा हैदराबाद के पास आईटी हब साइबराबाद में... जब बस में बैठकर ऑफिस जाने वाले के लिए रोज की दिक्कतों में कुछ खुशगवार पल मिले। इन लोगों को कुछ बसों के बाहर हाथों में प्लेकार्ड लिए कह रहे थे कि आपका धन्यवाद की आप बस में सफर कर रहे हैं।

ये लोग हैदराबाद सॉफ्टवेयर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के स्वयंसेवक जो संघ द्वारा चलाई गई 'कार फ्री थर्सडे' मुहिम का हिस्सा बने। ये संघ तेलंगाना सरकार के साथ मिलकर लोगों में हफ्ते में एक दिन सार्वजनिक साधन के प्रयोग पर जोर दे रहा है।

संघ के अध्यक्ष का रमेश लोगनाथन का कहना है कि अगर 50-60 हजार सड़क पर दौड़ रही कारों में अगर 20 हजार कार की कमी भी कुछ हफ्तों में भी दिखाई देगी तो यह हमारी सफलता होगी।

बताया जा रहा है कि इस मुहिम को मजबूत करने के लिए खास तौर पर विशेष बसों का भी प्रबंध किया गया है। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक वाहन का प्रयोग करने से ड्राइविंग के सिर दर्द से भी छुटकारा मिल जाता है। नॉन एसी बसों का किराया 7-35 रुपये तक है जो साइबर सिटी साइबराबाद जाती हैं।

नोवार्टिस में काम करने वाली श्रुति ने बताया कि इस मुहिम ने उन्हें यह समझाया कि वह एक दिन अपने दोस्त के साथ पैदल जाने लगीं। उनका कहना है कि उन्हें बैठ के काम करना होता है और चलने से उनकी अच्छी कसरत हो जाती है। उनका कहना है कि उन्हें इस बात की भी खुशी है कि पर्यावरण के लिए वह कुछ कर रही हैं।

एक आईटी प्रोफेश्नल जेए चौधरी ने कहा कि कब तक हम सरकार पर ही सारी जिम्मेदारी सौंपेंगे, हमें भी जिम्मेदारी लेनी होगी। उनका कहना है कि शहर अब रहने लायक नहीं रह गए हैं। हमें कहीं से तो शुरुआत करनी होगी, और यह एक अच्छा तरीका ऐसी शुरुआत का।

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कुछ लोगों का कहना है कि वह साइकिल से भी ऑफिस जाने को तैयार हैं लेकिन सरकार को साइकिल लेन तैयार करनी चाहिए।

एक्सेंट के सीईओ श्रीकांत शेट्टी का कहना है कि वह जब यूरोप में थे तो हमेशा साइकिल से ऑफिस जाते थे, लेकिन पिछले छह महीनों से वह यहां हैं और यहां पर भी ऐसा ही करने की कोशिश में हैं। साथ ही उनका कहना है कि वह अपने साथियों से भी ऐसा करने को कहते हैं।


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