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साइकिल यात्रा पर निकला 'भुंजावाला', लोगों से धन के लालच में वोट न देने की करी अपील

पटना में एक भुंजावाला मतदाताओं के बीच जागरुकता पैदा करने के लिए चुपचाप काम कर रहा है और मतदाताओं से लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए उम्मीदवारों की योग्यता के आधार पर मतदान करने की अपील कर रहा है.

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साइकिल यात्रा पर निकला 'भुंजावाला', लोगों से धन के लालच में वोट न देने की करी अपील

प्रतीकात्मक चित्र

नई दिल्ली:

राजनीतिक परिदृश्य में एक तरह चायवालों और चौकीदारों की हर कोई बात कर रहा है, वही दूसरी ओर पटना में एक भुंजावाला मतदाताओं के बीच जागरुकता पैदा करने के लिए चुपचाप काम कर रहा है और मतदाताओं से लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए उम्मीदवारों की योग्यता के आधार पर मतदान करने की अपील कर रहा है. 50 वर्षीय लालमणि दास अपनी ‘साइकिल जागरुकता यात्रा' के तहत बिहार की राजधानी में घूम घूम कर लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे धन या किसी अन्य लालच में आकर मतदान नहीं करें. बाजार स्मृति में नाश्ता बेचने वाले दास अब केवल शाम को ही अपना ठेला लगाते हैं और सुबह लोगों को जागरुक करने का काम करते हैं.

पतलून-कमीज और निर्वाचन आयोग के प्रतीक चिह्न वाली टोपी पहने दास साइकिल से पटना की गलियों में घूमते हैं और लोगों को पर्चे बांटते हैं और इनके जरिए वे उनसे समझदारी से मतदान करने की अपील करते हैं. वह अपनी साइकिल के आगे एक बैनर लगाए रहते हैं जिसमें वह यह बताते हैं कि एक अच्छे उम्मीदवार में क्या गुण होने चाहिए जिन्हें हर मतदान को दिमाग में रखना चाहिए. इसके अलावा वह स्वयं कमीज के ऊपर एक बैनर पहनते हैं जिस पर संदेश लिखा होता है ‘नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करें. अपने मताधिकार का प्रयोग करें.'

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दास ने कहा, ‘‘‘मजबूत लोकतंत्र सुनिश्चित करने के लिए मतदान बहुत जरूरी है. मेरा पहला लक्ष्य अधिकाधिक लोगों तक पहुंचना है ताकि मतदान के दिन अधिक से अधिक लोग मतदान करें. मैं लोगों से यह भी कह रहा हूं कि वे मजबूत चरित्र वाले और कानून के शासन का सम्मान करने वाले उम्मीदवारों को वोट दें.'' दास ने कहा कि यदि मतदाताओं को अक्सर कानून तोड़ने वाले उम्मीदवारों के बीच चयन करना पड़ा तो उन्हें नोटा को प्राथमिकता देनी चाहिए.

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यह पूछे जाने पर भी ‘भुंजा' बेचकर उनकी कितनी कमाई होती है, उन्होंने कहा, ‘‘मैं औसतन 500 से 600 रुपए कमाता हूं, लेकिन अभी मैं अपनी मुहिम को अधिक समय दे रहा हूं, इसलिए मुझे नुकसान हो रहा है. मुझे इसका कोई अफसोस नहीं है.'' दास ने कहा कि उनकी पत्नी और बच्चे चाहते हैं कि वह अपनी जागरुकता मुहिम छोड़कर भुंजा बेचने का काम करें लेकिन देश के नागरिक के तौर पर वह इसे अपना कर्तव्य समझते हैं. 

(इनपुट- पीटीआई भाषा)



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