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यह सिविल इंजीनियर एक रुपये में साल भर तक सिखाता है संगीत

दिल्ली के आंध्र भवन के सामने एक रुपये में लोगों को संगीत सिखाने वाले गिटार राव के जीवन में नाटकीय बदलाव लाया संगीत

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यह सिविल इंजीनियर एक रुपये में साल भर तक सिखाता है संगीत

दिल्ली के आंध्र भवन के सामने पेड़ के नीचे बैठकर गिटार बजाते हुए गिटार राव.

खास बातें

  1. राष्ट्रीय राजधानी में रोज तीन स्थानों पर लोगों को सिखाते हैं संगीत
  2. इंजीनियर एसबी राव जब संगीतज्ञ बने तो नाम हो गया गिटार राव
  3. गिटार राव बड़े संगीतकार नहीं लेकिन संगीत का मूलभूत ज्ञान देने में माहिर
नई दिल्ली:

संगीत में दिलों को जीतने की क्षमता तो होती ही है, स्वरों में डूबने वालों का तनाव दूर करने की भी क्षमता होती है. जब कोई संगीत में डूब जाए, सुर जिसके मर्म को छू जाएं तो वह उसे वह नया रास्ता भी दिखा देता है. एक सिविल इंजीनियर को संगीत ने ऐसा रास्ता दिखा दिया जो समाज को तनाव से मुक्त करके शांति की ओर ले जाने के लिए प्रेरित करने वाला है.     

किस्मत कब किसको कहां ले जाए यह किसी को पता नहीं. यहां तस्वीर में जो शख्श दिखाई दे रहा है वह पेशे से सिविल इंजीनियर है, कई बड़ी कंपनियों में काम कर चुका है लेकिन आजकल दिल्ली के आंध्र भवन के सामने एक रुपये में लोगों को संगीत सिखा रहा है. इसके पीछे जो मुख्य मकसद है वह है संगीत के जरिए शांति फैलाना और स्वच्छ भारत के तरह 'संगीत भारत' अभियान शुरू करना.

इस संगीतज्ञ का नाम एसबी राव है, लेकिन लोग इनको गिटार राव के नाम से भी बुलाते हैं. गिटार राव का जन्म आंध्र प्रदेश में हुआ. इन्होंने कई साल तक एक प्राइवेट कंपनी में सिविल इंजीनियर के रूप में काम किया. गिटार राव जब नौकरी करते थे तब किसी कारणवश कर्ज़ में डूब गए. धीरे-धीरे यह कर्ज उनके लिए बोझ बनता चला गया. बाद में वे नौकरी के साथ-साथ घर छोड़कर तिरुपति चले गए. तिरुपति की एक संगीत अकादमी में इन्होंने संगीत सीखना शुरू कर दिया. संगीत इनका तनाव कम करने में कामयाब रहा. राव फिर घर वापस आ गए लेकिन यह भी तय किया कि लोगों को संगीत सिखाएंगे.


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फिलहाल गिटार राव आंध्र भवन की लॉबी में जनरल वर्कर के साथ सो जाते हैं. जनरल बाथरूम का इस्तेमाल करते हैं. सिर्फ एक-दो जोड़ी कपड़े हैं लेकिन साथ में चार-पांच गिटार और कई बांसुरियां हैं. इन्होंने दिल्ली में 100 दिनों तक लगातार संगीत सिखाया. बाद में पेड़ के नीचे संगीत सिखाना शुरू कर दिया. सुबह 7 से 9 बजे तक आंध्र भवन के सामने संगीत सिखाते हैं. दोपहर में 2 से शाम 6 बजे तक विजय चौक पर सिखाते हैं. इसके बाद शाम 6 से 9 बजे तक इंडिया गेट के लॉन में इनके संगीत की धुनें सुनाई देती हैं.

इस संगीत सिखाने के सिलसिले के साथ खाली बचे समय में गिटार राव पढ़ाई करते हैं. अभी डिस्टेंस एजुकेशन के जरिए संगीत में बीए कर रहे हैं. गिटार राव कई बड़े लोगों को संगीत सिखा चुके हैं जिसमें पुलिस अफसर से लेकर कई नेता शामिल हैं. वे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ-साथ आंध्र के मुख्यमंत्री से भी मिल चुके हैं और संगीत सिखाने का ऑफर दे चुके हैं. गिटार राव नो तो कोई बड़े संगीतकार हैं और न ही उन्होंने संगीत की कोई बड़ी ट्रेनिंग ली है. बस वे लोगों को संगीत का आधारभूत ज्ञान देना चाहते हैं.

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गिटार राव ने एनडीटीवी को बताया कि उनकी बेटी कभी पढ़ाई में पीछे थी लेकिन संगीत सीखने के बाद वह फर्स्ट डिवीजन में पास हुई. गिटार राव का मानना है कि संगीत से टेंशन कम होता है और पढ़ाई के प्रति ध्यान बढ़ता है. जब हमने पूछा कि क्या वे परिवार का खयाल नहीं रखते हैं, तो गिटार राव का कहना था कि उन्होंने परिवार को छोड़ा नहीं हैं, परिवार से मिलने भी जाते हैं. बेटी को जब पैसे की जरूरत पड़ती है तो बेटी फोन करती है और फिर गिटार राव उसे पैसे भेजते हैं. जब हमने पूछा कि बेटी के लिए पैसा कहां से लाते हैं तो उन्होंने बताया है कि कई बार ऐसा होता है कि गिटार सीखने के बाद लोग उनसे गिटार भी खरीदते हैं उससे वे कुछ पैसा कमा लेते हैं.

गिटार राव सिर्फ एक रुपये में संगीत सिखाते हैं और एक साल तक सिखाने के लिए सिर्फ 101 रुपये लेते हैं. यह 101 रुपये आप इंस्टालमेंट में भी दे सकते हैं. एक साल पूरा होने के बाद गिटार राव 100 रुपये की एक बांसुरी भी गिफ्ट के रूप में देते हैं. यानी पूरे एक साल आपको सिखाने के बाद उनको जो फीस मिली वो है सिर्फ एक रुपया. गिटार राव स्वरोजगार भी पैदा कर रहे हैं. गिटार राव ने काफी सारे भिखारियों को संगीत सिखाया है. वे चाहते हैं कि भिखारी भीख न मांगे बल्कि दूसरों को संगीत सिखाएं और पैसा कमाएं.

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VIDEO : संगीत की कीमत इनसे जानो

गिटार राव चाहते हैं कि स्वच्छ भारत अभियान की तरह प्रधानमंत्री मोदी 'संगीत भारत अभियान' भी शुरू करें क्योंकि संगीत से लोग तनाव से दूर रहेंगे और खुश रहेंगे. गिटार राव म्यूजिक कोचिंग कोच भी बनाने चाहते हैं.  जिनके पास समय नहीं है यह कोच उनके घर जाकर उन्हें म्युजिक सिखाएंगे.



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