बेंगलुरु की व्यस्त सड़क पर दिखा ऐसा नजारा, 'खूबसूरत परी' ने लिया मेंढक का चुंबन

बेंगलुरु की व्यस्त सड़क पर दिखा ऐसा नजारा, 'खूबसूरत परी' ने लिया मेंढक का चुंबन

खास बातें

  • खराब सड़कों की तरफ प्रशासन का ध्यान दिलाने के लिए अनोखा प्रदर्शन।
  • कन्नड़ अभिनेत्री सोना गौड़ा बनी परी।
  • कलाकार बादल ने सड़क के गड्ढे पर किया परी की कहानी का सीन क्रिएट।
बेंगलुरु:

बेंगलुरु शहर का नायनहल्ली जंक्शन मैसूर से बेंगलुरु को जोड़ता है। यहां सुबह- सुबह लोगों को जो दिखा उसके बारे में उन्होंने सिर्फ कहानियों की किताबों में बचपन में पढ़ा था।

परी की वेश भूषा में एक सुंदर महिला सड़क के बीच बने गड्ढे में एक मेंढक का चुम्बन ले रहीं थी। सड़क के दोनों तरफ बड़े गड्ढे हैं इसलिए गाड़ियों की रफ़्तार काफी धीमी थी। लेकिन परी की कहानियों वाले इस दृश्य को देखने की जिज्ञासा की वजह से ट्रैफिक कुछ क्षणों के लिए थम गया।

तभी वहां बादल नाम का एक शख्स दिखा जो हाथों में रंग की बोतल और ब्रश लिए खड़ा था। उसने बताया कि ये उसकी ही सोच का नतीजा है कि सड़क के बीच इस जानलेवा गड्ढे के ऊपर ये सब कुछ दिख रहा है। उनका मकसद सरकार का ध्यान इन गद्दों की तरफ खींचना है ताकि इनकी फ़ौरन मरम्मत करवाई जा सके।

 
खूबसूरत तालाब में ऐसे बदला सड़क का बदहाल गड्ढा।

कन्नड़ एक्ट्रेस बनीं परी
परी की भूमिका में थी कन्नड़ फिल्मो की अभिनेत्री सोना गौड़ा, उन्होंने बताया कि जब कलाकार बादल ने उनसे संपर्क किया तो उनका मकसद अच्छा लगा इसीलिए उन्होंने हामी भर दी। उन्होंने बताया, 'एक प्रचलित परी कथा है कि राजकुमार को श्राप मिलते ही वह मेंढक बन जाता है। श्राप से मुक्ति का उपाय होता है कि अगर कोई परी उसका चुम्बन लेगी तो वो दोबारा राजकुमार बन जाएगा। इसी दिलचस्प प्रसंग को यहां उठाया गया है।'
 

गड्ढों की तरफ प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए अनोखा प्रदर्शन।

गड्ढों को लेकर लोगों में नाराजगी
इस जगह पर मौजूद ऑटो वालों ने बताया कि हर रोज़ ख़ासकर रात में और बारिश होने पर यहां दुपहिए और दूसरे छोटे वाहन पलट जाते हैं। इन गड्डों की चपेट में आकर कई बार लोग नीचे गिर जाते हैं। लोग इसलिए भी ज्यादा नाराज़ हैं कि इस सड़क के ऊपर के फ्लाईओवर की सड़क की मरम्मत लगातार की जाती है ताकि मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को अपने घर मैसूर जाने में किसी तरह की परेशानी न हो।

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इससे पहले इन जानलेवा गड्ढों की तरफ सरकार का ध्यान खींचने के लिए कभी मगरमछ तो कभी अनाकोंडा को इसी तरह सड़क के बीच रखा जा चुका है।